13 September, 2008
एरियर पर आयकर में कमी संभव!
वहीं दूसरी ओर चालू वित्त वर्ष के दौरान पूरे अथवा 40 फीसदी एरियर पर टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) को लेकर आयकर विभाग को वर्ष 1999 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी एक फैसला हाथ लगा है। इस फैसले के जरिए पूरे एरियर को टैक्स के दायरे में लाने का पक्ष लिया गया है। जहां तक एरियर के मामले में टैक्स बोझ हल्का करने की बात है, उसके लिए धारा 89-1 का विकल्प सामने है। इसके तहत चालू वित्त वर्ष सहित पिछले तीन वित्त वर्ष के दौरान बगैर एरियर और एरियर सहित आयकर बोझ निकाला जाएगा।
इन सभी सालों के लिए एरियर सहित टैक्स बोझ में एरियर रहित टैक्स बोझ को घटा दिया जाएगा। चालू वित्त वर्ष के दौरान हासिल अंतर में पिछले तीन सालों के अंतर को जोड़कर घटा दिया जाएगा। इससे प्राप्त राशि को चालू वित्त वर्ष में देय समग्र टैक्स में घटाया जाएगा। यही देय टैक्स होगा।
यह रास्ता इसलिए अपनाया जा रहा है क्योंकि बीते सालों में सरकारी नहीं अदा की गई देय राशि पर ब्याज लागू न किया जाए, अन्यथा इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय माना जाएगा। इस प्रकार की गणना से बहुत से कर्मचारी आयकर दर के ऊंचे स्लैब में जाने और अधिभार यानी सरचार्ज देने से बचने की संभावना बनेगी।
वहीं दूसरी ओर आयकर विभाग के हाथ सुप्रीम कोर्ट की ओर से 26 अक्टूबर, 1999 को जारी एक फैसला हाथ लगा है। इसके मुताबिक पेबल यानी देय राशि की व्याख्या आयकर कानून की मंशा के मुताबिक ही की गई है। मतलब यह एरियर चाहे वह किसी खास वर्ष में अदा किया गया हो अथवा नहीं, उसी खास वर्ष के दौरान ही कर दायरे में ही आएगा।
(दैनिक हिन्दुस्तान में विकास द्विवेदी की शब्दश: रिपोर्ट)
01 March, 2008
टैक्स स्लैब में परिवर्तन
महिला आयकरदाताओं के लिए छूट की सीमा एक लाख 45 हजार से बढ़ाकर एक लाख 80 हजार तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट की सीमा एक लाख 95 हजार से बढ़ाकर सवा दो लाख रूपए कर दी गई है। आयकर छूट की सीमा डेढ़ लाख करने से व्यक्तिगत आयकरदाताओं को चार हजार रूपए, महिला आयकरदाताओं को साढ़े छह हजार रूपए तथा वरिष्ठ नागरिक आयकरदाताओं को छह हजार रूपए का फायदा कर बचत के रूप में होगा। इन सभी आयकरदाताओं को इससे ज्यादा फायदा डेढ़ लाख से तीन लाख तक की आय पर कर की दर घटाकर दस फीसद करने से होगा।पहले जिन लोगों की आय एक लाख दस हजार से डेढ़ लाख के बीच थी उन पर ही दस फीसद का कर लगता था। डेढ़ से ढाई लाख की आय पर कर की दर 20 फीसद तथा ढाई से दस लाख तक की आय पर 30 फीसद थी। दस लाख से ऊपर की आय वालों को 30 फीसद कर के अलावा दस फीसद का सरचार्ज और तीन फीसद का सेस भी देना होता था। अब जिन लोगों की आय तीन लाख रूपए तक होगी उन्हें डेढ़ लाख रूपए तक तो कोई कर नहीं देना होगा। साथ ही डेढ़ से तीन लाख रूपए तक की आय पर दस फीसद की दर से 15000 रूपए का कर देना होगा। पहले तीन लाख रूपए की आय पर कर की राशि 39000 रूपए बैठती थी।
एक लाख दस हजार से डेढ़ लाख तक की राशि दस फीसद के हिसाब से चार हजार रूपये, डेढ़ से ढाई लाख के बीच की एक लाख की राशि पर 20 फीसद के हिसाब से बीस हजार रूपए तथा ढाई से तीन लाख के बीच के पचास हजार रूपए पर 30 फीसद के हिसाब से पंद्रह हजार रूपए कर के रूप में बनते थे। इस तरह यह राशि कुल मिलाकर 39 हजार रूपए बनती थी। इसी तरह कर की दर कम होने से तीन लाख रूपए सालाना आय वाले व्यक्ति को कम से कम 24000 हजार रूपए की बचत होगी। फायदे की यह गणना तीन प्रतिशत के सेस (उपकर) के बिना की गई है।
उपकर वह कर है जो कर में सरचार्ज की राशि को शामिल करके आने वाली राशि पर लगाया जाता है। सरचार्ज वह कर है जो कर पर लगाया जाता है। जिन लोगों की आय दस लाख रूपए से अधिक है उनकी एक लाख की आय पर 30 हजार रूपए का आयकर, 30 फीसद की दर से, 30 हजार पर दस फीसद का सरचार्ज 3000 हजार रूपए तथा 33000 हजार रूपए (कर जमा सरचार्ज) पर तीन फीसद का सेस 990 रूपए देय होगा।
बजट प्रस्तावों के तहत 1।5 से 3.0 लाख रूपए के बीच की आय पर 10 प्रतिशत, 3 से 5 लाख रूपए की आय पर 20 प्रतिशत एवं 5 से 10 लाख रूपए की आय पर 30 प्रतिशत का आयकर देना होगा। 10 लाख से अधिक आय वाले व्यक्तियों को गत वर्ष की तरह दस फीसद का सरचार्ज और तीन फीसद का उपकर (सेस) भी देना होगा।
21 February, 2008
फिर बजट चर्चा, और क्या?
जब भी बजट आने वाला होता है, आम आदमी खासकर वेतन भोगी कर्मचारियों की बेताबी बढ़ जाती है। इनकी आय फिक्सड होने के कारण ये सोचते हैं कि वित्तमंत्री अवश्य ही आयकर छूट की सीमा में वृद्धि करेंगे जिससे उनकी सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी।
इस बार उम्मीद की जा रही है कि आयकर छूट की सीमा व्यक्तिगत कर दाता की दशा में 1,10000 रूपए से बढ़कर 1,25,000 रूपए हो जाएगी, 65 साल से कम उम्र की महिलाओं के मामले में यह सीमा 1,45,000 रूपए से बढ़कर 1,60,000 और सीनियर सिटिजन के मामले में 1,95,000 से बढ़कर 2,10,000 तक हो जाएगी। ऐसा होने से व्यक्तिगत आयकर दाता पुरूषों को 1500, महिलाओं को 2500 तथा सीनियर सिटिजन को 3000 रूपए तक का फायदा होगा। वेतन भोगियों को यह भी उम्मीद है कि वित्तमंत्री स्टैंडर्ड डिडक्शन को फिर से लागू कर उनके आयकर के बोझ को कम करेंगे। स्टैंडर्ड डिडक्शन का प्रावधान कर निर्धारण वर्ष 2006-07 से हटा दिया गया था। बढ़ते हुए मेडिकल खर्च को देखते हुए लोग मेडिक्लेम पालिसियों की आ॓र आकर्षित हुए हैं। सबको उम्मीद है कि आयकर अधिनियम की धारा 80 डी के अंतर्गत इन पालिसियों पर छूट की सीमा 15,000 रूपए से बढ़ाकर 25,000 रूपए कर दी जाएगी। ऐसा होने से 10,000 रूपए पर आयकर की अतिरिक्त छूट मिल जाएगी। एक और समस्या जो सबसे परेशान करती है बैंक से पैसे निकालने पर लगने वाला शुल्क। फाइनेंस एक्ट 2005 के अंतर्गत 1.6.2005 से बचत खाते के अलावा अन्य किसी खाते से एक दिन में 25,000 रूपए से अधिक निकालने पर ट्रांजेक्शन टैक्स देना पड़ता है। हर कोई इस बोझ से मुक्ति की उम्मीद कर रहा है। पांच लाख सालाना कमाने वाला वेतन भोगी कर्मचारी यदि आयकर छूट के लिए कोई भी निवेश नहीं करता है तो उसे 1,00,000 तक आयकर चुकाना पड़ता है यानि वह साल में दो महीने आठ दिन सिर्फ टैक्स चुकाने के लिए काम करता है। वित्तमंत्री से इस बार इस वर्ग के वेतन भोगियों की उम्मीद है कि वित्तमंत्री आयकर की दरों में परिवर्तन कर 30 फीसदी की दर को ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख से ऊपर की आय पर लागू करेंगे।