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08 November, 2008

नौकरी के लिए गर्मजोशी से हाथ भी मिलाइए

साक्षात्कार में में टाई के रंग, अच्छी वेषभूषा और मुस्कान से ही काम नहीं चलेगा, इसके लिये गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाना भी जरूरी है। एक अंतरराष्ट्रीय दल ने शोध के बाद यह खुलासा किया है। अध्ययन में पाया गया कि सुस्ती के साथ हाथ मिलाने के बजाय रोज़गारादाता उन लोगों को तवज्जो देते हैं जो गर्मजोशी से हाथ मिलाते हैं। नजर मिलाकर बात करना और अधिक फायदेमंद है। डेली मेल में छपी रिपोर्ट में कहा गया कि जिंदादिली से हाथ मिलाने वाले अधिक सामाजिक, दोस्ताना और प्रभावित करने वाले माने जाते हैं जबकि ढीले-ढाले ढंग से पेश आने वालों को अंतर्मुखी, शर्मीला और स्नायुतंत्र से संबंधित समस्या से ग्रस्त माना जाता है।

शोध करने वाले दल के नेता जॉर्ज स्टीवर्ट ने कहा, 'हमने पाया कि हाथ कैसे मिलाते हैं, इससे ही पहला प्रभाव बाकी इंटरव्यू पर पड़ता है।' दल ने कुछ विशेषज्ञों का सहारा लिया जिन्होंने आवेदनकर्ताओं के इंटरव्यू से पहले उनके साथ हाथ मिलाया और उसकी गर्मजोशी और अवधि को नोट किया गया। बाद में उसका मिलान नतीजों से किया गया।

06 October, 2008

आफिस से नियमित गायब रहने वाले व्यक्तियों की असमय मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है!?

बात थोड़ा हैरान, थोड़ा परेशान करने वाली है लेकिन सावधान! अगर आप बीमारी के नाम पर आफिस से जल्दी-जल्दी छुटि्टयां ले रहे हैं तो सचेत हो जाएं, क्योंकि एक नए शोध से यह बात सामने आई है कि ऐसा करने वालों के दरवाजों पर समय से पहले, मौत खड़ी हो जाती है। एक ब्रिटिश जर्नल में यह शोध प्रकाशित हुआ है।

अनुसंधानकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि आफिस से नियमित गायब रहने वाले व्यक्तियों की असमय मृत्यु की संभावना 66 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। ऐसे कर्मचारी, जो मनोवैज्ञानिक परेशानियों की वजह से ऑफिस आने में असमर्थ रहते हैं, उनमें कैंसर से मौत का खतरा ढाई गुना तक बढ़ जाता है। ऐसे लोग जो संक्रामक बीमारियों के कारण आफिस नहीं आ पाते, अपने स्वस्थ सहयोगियों की अपेक्षा जल्दी मौत का शिकार हो जाते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया इन लोगों में यह खतरा चार गुना ज्यादा पाया जाता है। हालांकि मांसपेशियों से संबंधित बीमारियों से ग्रसित कर्मचारियों में ऐसा खतरा नहीं बढ़ता। लंदन के यूनिवर्सिटी कालेज की खोज में ब्रिटिश सिविल सर्विसेज के कर्मचारियों का परीक्षण किया गया।

इस खोज की प्रमुख रहीं जेनी हेड के मुताबिक मनोवैज्ञानिक बीमारियों और कैंसर जैसे रोग का कारण अवसाद से ग्रस्त लोगों का समय पर अपने डॉक्टर के पास न जाना हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि हमने इसके कारणों पर शोध नहीं किया, लेकिन ऐसा लगता है कि ऐसे लोगों में डॉक्टरी सलाह लेने की प्रवृत्ति कम पाई जाती है।'

बीबीसी पर आया यह मूल समाचार मौज़ूद है।