24 December, 2008

फिलहाल, सरकारी कर्मचारियों की संख्या में कटौती का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के चलते सरकारी कर्मचारियों की संख्या में कटौती से साफ इनकार करते हुए सरकार ने 23 दिसम्बर को कहा कि इन सिफारिशों को लागू करने से वित्त वर्ष 2009-10 में केंद्रीय खजाने पर लगभग 36000 करोड़ रुपये का भार पड़ने की संभावना है।

वित्त राज्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने राज्यसभा में कहा कि राज्य सरकारों पर कितना बोझ पड़ेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे छठे वेतन आयोग की सिफारिशें किस तरह लागू करती हैं। उन्होने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकारी कर्मचारियों की संख्या में कटौती का कोई भी प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।

23 December, 2008

उड़ीसा : कर्मचारियों के वेतन में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी

हालांकि खबर 10 दिन पुरानी है लेकिन है तो खबर! उड़ीसा सरकार ने राज्य कर्मचारियों के वेतन में 36 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का निर्णय किया है। वर्ष 2006 से प्रभावी होने वाली इस बढ़ोतरी के कारण राज्य सरकार पर प्रति वर्ष 2.1 अरब रुपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। बकाए वेतन के 40 प्रतिशत हिस्से का भुगतान इसी महीने के अंत में कर दिया जाएगा, जबकि बची हुई राशि का भुगतान अगले वर्ष के प्रारंभ में किया जाएगा। 

उड़ीसा सरकार ने छठें वेतन आयोग की सिफारिशों के अध्ययन व इसे लागू किए जाने के बाद राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का पता लगाने के लिए राज्य विकास आयुक्त के नेतृत्व में एक निर्धारण समिति का गठन किया था। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में निर्धारण समिति की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी गई और आयोग की सिफारिशों के मुताबिक वेतन वृध्दि का निर्णय किया गया।  

सशस्त्र सेनाओं के लिए नई promotion नीति

सशस्त्र सेनाओं के अधिकारियों के लिए नई प्रमोशन नीति की घोषणा में व्यवस्था की गई है कि भ्रष्ट, नैतिक रूप से दागदार और रणभूमि में कायरता दिखाने वाले अफसरों को किसी भी सूरत में तरक्की नहीं दी जाएगी। रक्षामंत्री एके. एंटनी ने इस नई प्रमोशन नीति को मंजूरी दी है और यह 1 जनवरी, 2009 से लागू मानी जाएगी। नई नीति में प्रमोशन चयन बोर्ड की भूमिका को कम से कम किया गया है और प्रक्रियाओं को इतना परिभाषित किया गया है कि मनमानेपन की गुंजाइश लगभग नहीं रहेगी।

पक्षपात की सम्भावना को यथा सम्भव समाप्त किया गया है और यह सुनिश्चित किया गया है दागदार अफसरों को किसी भी सूरत में तरक्की नहीं मिल पाए, भले ही प्रदर्शन मानकों में उन्होंने कितने ही अंक क्यों न कमा लिए हों। उल्लेखनीय है कि यह नई नीति उच्चतम न्यायालय के निर्देशों और उच्च न्यायालय के एक 2004 के फैसले में की गई टिप्पणियों को देखते हुए की गई है।

नई नीति को इस तरह गढ़ा गया है कि कानून की कसौटी पर प्रमोशन के आधार खरे उतरें और सशस्त्र सेनाओं के कानूनी मामलों में कमी आए। अभी उच्च न्यायालय में करीब आठ हजार मामलों में अधिकतर प्रमोशन से संबंधित हैं। सेना, नौसेना और वायुसेना में करीब 36 हजार अधिकारी हैं और प्रमोशन में पक्षपात, पारदर्शिता के अभाव और मनमानेपन तक के आरोप सामने आते रहे हैं। इसे देखते हुए एंटनी ने रक्षामंत्री बनने के दो महीने के भीतर ही रक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया था कि प्रमोशन बोर्ड की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और उदारता बरतकर प्रमोशन देने या किसी का प्रमोशन रोकने के हर मामले का पर्याप्त तर्कसंगत आधार बनाया जाए।

नई नीति में यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी अधिकारी की योग्यता कुछ भी हो, लेकिन अनुशासन के मामले अस्वीकार्य तथा चरित्र पर कोई दाग अथवा कार्रवाइयों के दौरान खराब प्रदर्शन का रिकॉर्ड रहा, तो उसका प्रमोशन किसी भी कीमत पर स्वीकृत नहीं होगा। अनैतिक आचरण, खुल्लमखुल्ला लापरवाही या रणभूमि में कायरता दिखाने वाले अफसरों की भी तरक्की नहीं हो पाएगी।

नई नीति में ये सख्त मानक ऐसे समय अपनाए गए हैं, जब कैचअप छिड़ककर पदक बटोरने से लेकर सहयोगी महिला अधिकारी के साथ बदसलूकी करने और फौजियों के लिए घटिया राशन खरीदने से लेकर उनके कपड़ों तक में अनियमितता बरतने के मामले सामने आए हैं। कई मामलों में दागदार अफसर भी आला अधिकारियों से अपनी नजदीकियों या प्रमोशन नीति की खामियों का फायदा उठाकर तरक्की लेने में कामयाब होते रहे हैं। 

नई नीति में किसी अधिकारी की गोपनीय रिपोर्ट को 95 प्रतिशत तरजीह दी जाएगी और बाकी पांच प्रतिशत फैसला प्रमोशन बोर्ड पर छोड़ा जाएगा। इस पांच प्रतिशत को भी नई नीति में स्पष्ट कर दिया गया है। प्रमोशन के समय यह भी देखा जाएगा कि अधिकारी की तैनाती कितने चुनौतीपूर्ण वातावरण में रही है, उसके रिपोर्ट के आंकलन में कितनी उदारता और सख्ती बरती गई है, रिपोर्ट बढ़ाचढ़ा कर लिखी गई या घटाई गई है, तथा उसने कितने पुरस्कार और सम्मान हासिल किए हैं।

इस नीति में यह प्रयास किया गया है कि मूल्यांकन का तरीका व्यापक एवं वैज्ञानिक हो, मानवीय गलतियों की गुंजाइश कम की जाए ताकि काम का स्वस्थ माहौल रहे। रक्षा मंत्रालय ने तीनों सैन्य बलों के लिए ये मानक तय किए हैं और अब इसके बाद वायुसेना. नौसेना और थल सेना अपनी-अपनी जरूरतों के हिसाब से इन मानकों के आधार पर अपनी कसौटियां तय करेंगी। थल सेना ने अपने मानकों के लिए एक अध्ययन शुरू भी कर दिया है।

12 December, 2008

वैश्विक आर्थिक संकट के बीच टाटा स्टील ने बढ़ाया वेतन

वैश्विक आर्थिक संकट के गहराते असर के बीच टाटा स्टील ने औद्योगिक उपकरण बनाने वाली अपनी सहायक कंपनी Tata Steel Growth Shop (टीजीएस) के कर्मचारियों का वेतन बढ़ा दिया है। कंपनी ने बताया कि अब न्यूनतम मूल वेतन- ग्रेड RG-1 के लिए मौजूदा 4 हजार रुपये से बढ़कर 8,080 रुपये प्रतिमाह और अधिकतम मूल वेतन- ग्रेड RG-9 के लिए-10,750 से बढ़कर 18,090 रुपये प्रतिमाह हो जाएगा। बढ़ा हुआ वेतन 1 जनवरी 2007 से देय होगा। टीजीएस, स्टील कंपनियों के अलावा एल्युमीनियम, सीमेंट, ऊर्जा एवं विद्युत, उड्डयन, रेलवे और अंतरिक्ष अनुसंधान संबंधी विभिन्न कंपनियों के उपकरणों के डिजाइन, प्रॉडक्शन तथा सप्लाई करती है।

जमशेदपुर से सटे सरायकेला-खरसांवा जिले के गम्हरिया औद्योगिक क्षेत्र में स्थित टीजीएस के लगभग 700 कर्मियों के वेतन में वृद्धि के इस समझौते पर 10 दिसम्बर को टाटा स्टील के सीओओ एच. एम. नेरूरकर और टाटा मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय ने हस्ताक्षर किए।

याहू और जेट के कर्मचारी ...

ग्लोबल इंटरनेट फर्म याहू ने अपने भारतीय कर्मचारियों की संख्या में 3 प्रतिशत कटौती का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक कंपनी ने वैश्विक आर्थिक संकट के मद्देनजर लागत घटाने के लिए 10 दिसम्बर को करीब 40 लोगों को नोटिस दे दिया। कंपनी के भारतीय कारोबार में करीब 2000 कर्मचारी हैं।

इसके अलावा जेट एयरवेज ने 1900 कर्मचारियों को बर्खास्त करने का आदेश सार्वजनिक होने से काफी पहले ही करीब एक हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था और कंपनी इस घटना पर पर्दा डालने में कामयाब रही। जेट एयरवेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वोल्फगैंग ने निवेशकों को बताया था कि कंपनी अपने कर्मचारियों की छंटनी करने के बाद जेट एयरवेज एवं बजट विमानन कंपनी जेटलाइट के बीच बेहतर तालमेल बिठाने में सक्षम है।

11 December, 2008

Air India ने कर्मियों की यात्रा, फोन और अन्य भत्तों पर लगाम कसी

घाटे से उबरने की कोशिश में Air India ने अपने खर्च में कटौती करने के लिए अपने पाइलटों को ईंधन की बचत करने के नुस्खे बताने के साथ ही उनके यात्रा, फोन और अन्य भत्तों पर लगाम कस दी है। Air India के सूत्रों के मुताबिक खर्च में कटौती के उपाय सुझाने के लिए प्रबंधन ने कई समितियां बनाई थीं। इनके सुझावों पर अमल शुरू कर दिया गया है। यही नहीं लॉस ऐंजिलिस, सोल और दरूल सलम जैसे कुछ स्थानों की घाटे वाली उड़ानें बंद कर दी गई हैं।

अब तक कर्मचारियों पर भत्तों और अन्य सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने वाली Air India और Indian Airlines के विलय के बाद बनी एयर इंडिया ने फोन, मोबाइल फोन, वर्दी, बिजली और पेट्रॉल भत्तों में भारी कटौती कर दी है। इससे सालाना करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।

09 December, 2008

हरियाणा के कर्मचारियों को नए वर्ष का तोहफा

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश के कर्मचारियों के लिए अपने खजाने का मुंह खोल दिया है। लंबे समय से छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का इंतजार कर रहे हरियाणा के कर्मचारियों को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने नए वर्ष का तोहफा दे दिया। उन्होंने घोषणा कर दी है कि एक जनवरी, 2009 से छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया जाएगा। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह सिफारिशें जनवरी, 2006 से मान्य होंगी।

गौरतलब है कि हुड्डा सरकार ने अपने बजट में पहले ही छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए 1550 करोड़ रूपये का प्रावधान किया हुआ था। इन सिफारिशों के लागू हो जाने से राज्य के खजाने पर 3 हजार करोड़ रूपये का सालाना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कर्मचारियों को इसका 40 प्रतिशत नकद दिया जाएगा जबकि 60 प्रतिशत उनके पीएफ में जमा करने का प्रावधान किया गया है।

03 December, 2008

अब LTC पैकेज में कीजिए विदेश यात्रा

सरकारी कंपनी एयर इंडिया सहित निजी विमान कंपनियों ने हवाई सफर करने वालों की संख्या बढ़ाने के लिए कमर कस ली है। एयर इंडिया ने LTC पैकेज में सरकारी कर्मियों को किराये में बंपर 80 प्रतिशत की छूट देने का फैसला किया है। जबकि निजी एयरलाइंस इस पैकेज में उन्हें विदेश यात्रा कराने को तैयार हैं। एयर इंडिया ने केंद्रीय-राज्य कर्मियों सहित PSU स्टाफ को घूमने के लिए मिलने वाले LTC (लीव ट्रैवल कंसेशन) पैकेज में डिस्काउंट 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत कर दिया है।

सरकारी कर्मियों को घरेलू उड़ान के किराये (इकोनॉमी क्लास) में एयर इंडिया सिर्फ 20 प्रतिशत शुल्क लेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि योजना दो दिसंबर से शुरू कर दी गई है। इसके अलावा एयर इंडियाविंटर वार्मयोजना के तहत पांच दिसंबर से पांच फरवरी तक हवाई सफर करने वाले यात्रियों को गिफ्ट टिकट यानी एक जोड़े को मुफ्त यात्रा करने का अवसर देगा। जेट एयरवेज, किंगफिशर व अन्य निजी एयरलाइंस ने LTC पैकेज में ही कर्मियों को विदेश में घुमाने की योजना तैयार की है। विशेषता यह है कि देश में घूमने के लिए मिले LTC पैकेज पर कंपनियां मुफ्त में सिंगापुर, बैंकाक और मलेशिया (कुआलालंपुर) आदि देशों की सैर कराएंगी।

साथ में दो दिन एक रात के लिए पांच सितारा होटल में ठहरने व दर्शनीय स्थलों को दिखाया जाएगा। इसके अलावा ट्रेन के 2-3 एसी में घूमने वालों के लिए भी आकर्षक योजनाएं हैं।

02 December, 2008

हरियाणा में जनवरी 2006 से लागू होगी वेतन आयोग की सिफारिश

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्पष्ट किया है कि छठे वेतन आयोग की सिफारिश जनवरी 2006 से लागू होगी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि प्रदेश के सभी कर्मचारियों के लिए छठे वेतनमान आयोग की सिफारिशों के आधार पर संशोधित वेतनमान एक जनवरी 2006 से ही लागू किए जाएंगे। प्रदेश सरकार के पास नए वेतनमान लागू करने को लेकर पर्याप्त बजट है और प्रदेश के सभी कर्मचारियों के वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर बेहतर होंगे।

श्री हुड्डा ने बताया कि प्रदेश में छठे वेतन आयोग के अनुसार संशोधित वेतनमान के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव धर्मबीर सिंह की अध्यक्षा में कमेटी का गठन किया हुआ है। कमेटी को वेतनमान संशोधन को लेकर विभिन्न विभागों से करीब 225 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए थे। कमेटी ने वेतनमान का निर्धारण पारदर्शी तरीके से करने के लिए सभी प्रार्थनापत्र एवं सुझावों पर निजी सुनवाई की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नए संशोधित वेतनमान को लेकर 1500 करोड़ रुपए का प्रावधान पहले ही किया हुआ है। उन्होंने कहा कि अतीत में लागू हुई वेतन आयोग की रिपोर्ट में अक्सर यह हुआ है कि वेतनमान निर्धारण को लेकर आपत्तियां अभी तक लटकी हुई है। प्रदेश के सभी कर्मचारियों के हित में प्रदेश सरकार की यह मंशा है कि छठे वेतन आयोग के मुताबिक वेतनमान सभी कर्मचारियों को संतुष्ट करने वाले हों और हर वर्ग के कर्मचारी को न्याय मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समायोजित कर्मचारियों की मांग पर वायदे के मुताबिक समायोजित होने वाले कर्मचारियों को फिर से विभागीय परीक्षा पास करने के नियम से भी मुक्त कर दिया है।

01 December, 2008

सार्वजनिक तेल कंपनियों के अधिकारियों की हड़ताल स्थगित

सार्वजनिक तेल कंपनियों के कार्यकारियों ने दो दिसंबर से प्रस्तावित अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को स्थगित कर दिया है। सरकार द्वारा वेतनमान में 40 से 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी से नाखुश तेल क्षेत्र अधिकारी संगठन (OSOA) ने दो दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी। यह संगठन 14 सार्वजनिक तेल कंपनियों के 55000 अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है।

एक अधिकारी ने कहा कि हड़ताल को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि उच्च स्तर पर कठोर रवैया तथा सरकारी दबाव के चलते यह फैसला किया गया है।



28 November, 2008

उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों के लिए छठा वेतन आयोग लागू

अपनी घोषणा पर अमल करते हुए उत्तर प्रदेश की सरकार ने 27 नवम्बर को प्रदेश के कर्मचारियों के लिए छठा वेतन आयोग लागू कर दिया है। प्रदेश के कर्मचारियों को बढ़ा वेतन पहली जनवरी 2006 से दिया जायेगा। हालांकि कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन नए साल में ही मिलेगा। कर्मचारियों को उनके एरियर का 80 फीसदी सीधे भविष्य निधि में दिया जाएगा जबकि 20 फीसदी का नकद भुगतान किया जाएगा। सुश्री मायावती की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया है।

शिक्षकों को बिना किसी संघर्ष के छठे वेतनमान का तोहफा मिल गया है। राज्य कर्मचारियों के साथ ही सभी सहायता प्राप्त कालेजों के शिक्षकों और तकनीकी कालेजों के शिक्षकों को भी नए वेतनमान देने का फैसला किया गया है। पहली बार पेंशन, पारिवारिक पेंशन, मातृत्व लाभ, सीसीए, गच्चुटी और अन्य भत्ते केंद्र की ही तरह से मिलेंगे।

27 November, 2008

तेल कंपनियों के अधिकारी हड़ताल पर गए तो कार्रवाई!

पेट्रोलियम मंत्रालय ने सरकारी तेल कंपनियों के अधिकारियों के दो दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के निर्णय को बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया है। मंत्रालय ने कहा है कि आयल सेक्टर आफिसर्स एसोसिएशन [ओसा] ने जिन मुद्दों पर हड़ताल पर जाने का फैसला किया है वे आधारहीन हैं। सरकार ने ग्लोबल मंदी के बावजूद तेल कंपनियों के अधिकारियों के वेतन में सालाना 4.5 लाख रुपये से लेकर आठ लाख रुपये तक की वृद्धि का फैसला किया है। इसके बावजूद हड़ताल पर जाने का ओसा का आह्वान समझ से परे है।

पेट्रोलियम सचिव आरएस। पांडे ने तेल कंपनियों के आला अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की है। तेल कंपनियों को साफ तौर पर कहा गया है कि वे सबसे पहले तो यह सुनिश्चित करें कि हड़ताल होने की स्थिति में भी कंपनियों के काम पर खास असर नहीं पड़े। सभी तेल कंपनियों ने आपातकालीन तैयारी भी शुरू कर दी है। खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि किसी भी स्थिति में रिफाइनरियों में काम सुचारु रूप से चलता रहे।

सनद रहे कि ओसा ने सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करने के सरकार के फैसले को अपर्याप्त मानते हुए दो दिसंबर, 2008 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। ओसा का कहना है कि सरकार के नए फैसले के बाद उनके मूल वेतन में केवल 30 फीसदी की वृद्धि हो रही है, जबकि मंत्रालय का आकलन है कि मूल वेतन और महंगाई भत्ते के कुल योग पर वृद्धि का फैसला किया गया है जो मूल वेतन का 51 फीसदी होता है।

इसी तरह से ओसा का कहना है कि नया वेतनमान लागू होने के बाद उनके वेतन में कुछ सौ रुपये की वृद्धि होगी। जबकि मंत्रालय का कहना है कि यह वृद्धि ग्रेड-ए के अधिकारियों के लिए 28,032 रुपये की होगी। ग्रेड बढ़ने के साथ वृद्धि और आकर्षक होती जाएगी। ग्रेड-आई के अधिकारियों के लिए यह वेतन वृद्धि 66,771 रुपये प्रति माह की हो जाती है। इस बारे में पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एस। सुंदरेशन ने हड़ताल पर जाने की धमकी को पूरी तरीके से गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है।

24 November, 2008

PSUs कर्मियों को केंद्र का तोहफा

केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के करीब चार लाख अधिकारी और सुपरवाइजर स्तर के कर्मियों को अब तक की सर्वाधिक वेतन वृध्दि की सौगात देते हुए सरकार ने कहा है कि इससे केन्द्रीय उपक्रमों का प्रदर्शन सुधरेगा और उच्च कर्मचारियों का निजी क्षेत्र की तरफ पलायन रुकेगा। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने केन्द्रीय उपक्रमों के लिए गठित दूसरी वेतन निर्धारण समिति की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। नए वेतनमान एक जनवरी, 2007 से लागू होंगे।  इससे करीब 151 मुनाफा कमाने वाले केन्द्रीय उपक्रमों के 2.58 लाख अधिकारी स्तर के और 1.20 लाख यूनियन से अलग रहने वाले सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारियों को वेतन वृध्दि का लाभ मिलेगा। घाटे में चलने वाले केन्द्रीय उपक्रम के कर्मी वेतन वृध्दि के पैकेज से महरुम रहेंगे। नया पैकेज लागू करने के लिए उन्हें लगातार तीन साल तक मुनाफा कमाना होगा।

पिछले साल कुल 217 केन्द्रीय उपक्रम थे, जिनमें से 151 मुनाफा कमा रहे थे। इनमें से भी 76 उपक्रम ही मजबूत है और वही नए वेतनमानों को पूरी तरह से लागू करने की स्थिति में बाकी 75 उपक्रम नये पैकेज को आंशिक रूप में ही लागू कर पाएंगे। शेष 66 घाटे में चलने वाले उपक्रम नए पैकेज का लाभ नहीं उठा पाएंगे।

नए वेतनमानों के मुताबिक 'ए' श्रेणी में आने वाले केन्द्रीय उपक्रमों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों का मूल वेतन अब 80 हजार से शुरू होकर सवा लाख रुपए मासिक तक होगा। सबसे निम्न 'डी' श्रेणी में आने वाले उपक्रमों के सीएमडी के लिए 51300 से लेकर 73000 रुपए तक का मूल वेतन पाएंग, जबकि इस श्रेणी के निदेशक मंडल के सदस्यों के लिए 43200 से 66000 रुपए तक के नए वेतनमान तय किए गए हैं।

कार्यकारी अधिकारियों की पुरानी मांग को मानते हुए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 3.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दी है। नए पैकेज में सरकार ने कार्यकारी स्तर के सभी अधिकारियों को एक जनवरी, 2007 के उनके मूल वेतन पर 30 प्रतिशत की समान दर से फिटमेंट देने का फैसला किया है। केन्द्रीय उपक्रमों की वर्तमान चार श्रेणियों को यथावत रखा गया है।

केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एम जगन्नाथ राव की अध्यक्षता में केन्द्रीय उपक्रमों की वेतन समीक्षा समिति का गठन किया था। समिति ने इसी साल 30 मई को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। उसके बाद अब मंत्रिमंडल ने भी इन पर अपनी मुहर लगा दी।

4000 रुपए तक के उपहार ले सकेंगे सरकारी कर्मचारी

हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों के उपहार स्वीकारने की सीमा निर्धारित कर दी है। इसके तहत कर्मचारी विवाह, वर्षगांठ व धार्मिक समारोह में निकट संबंधियों व मित्रों से 4000 रुपए तक के उपहार ले सकेंगे। 

उपहार इससे ज्यादा के हुए तो उन्हें इसकी सूचना सरकार को देनी होगी। पहले उपहार की सीमा 500 रुपए थी। यह फैसला शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। यह भी तय किया गया कि किसी अन्य मामले में पहले व दूसरे दर्जे के कर्मचारी 1000 रुपए और तीसरे व चौथे दर्जे के कर्मचारी 500 रुपए से ज्यादा के उपहार सरकार की मंजूरी के बिना न खुद लेंगे और न परिवार के किसी सदस्य को ऐसा करने की इजाजत देंगे। 

बैठक में उपहार की यह सीमा 100 रुपए से बढ़ा कर 1000 रुपए और 50 रुपए से बढ़ा कर 500 रुपए की गई है। बैठक में यह भी तय किया गया है कि कोई सरकारी कर्मचारी या उसके परिवार का आश्रित सदस्य अपने नाम से 50,000 रुपए से ज्यादा की अचल संपत्ति का सौदा करता है तो उसे एक महीने में इसकी सूचना संबंधित अधिकारी को देनी होगी।

20 November, 2008

जजों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के लाखों कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले होगी!?

केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों के लाखों कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले होने वाली है। केंद्रीय कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग की सौगात देने के बाद केंद्र सरकार केंद्रीय सार्वजनिक उद्यमों (Central PSUs) के कर्मचारियों तथा अधिकारियों के भी वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव को आज कैबिनेट में विचार करने के लिए ला रही है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने अपना प्रस्ताव सरकार के पास भेजा है।

आज होने वाली कैबिनेट की बैठक में सरकार यदि वित्त मंत्रालय का प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है तो प्रस्तावित वेतनमान में सभी लाभार्थियों को दो गुना से लेकर तीन गुना वेतनवृद्धि का लाभ मिलेगा जबकि नवरत्न कंपनियों के अध्यक्षों का वेतन केंद्र सरकार के सचिव से लेकर कैबिनेट सचिव से भी ऊपर हो जाएगा। ONGC, HPCL, Indian Oil जैसी कंपनियों के सीएमडी का वेतन 27500-31000 से बढ़कर 80,000-125,000 रूपए महीना हो जाएगा जबकि एक्जीक्यूटिव का वेतन 6500-11350 से बढ़कर 12600-32500 रूपए महीना हो जाएगा। इसके अतिरिक्त DA भी मिलेगा।

इसके अलावा सरकार सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के जजों के भी वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार करेगी।

18 November, 2008

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के अधिकारियों की हड़ताल टली

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के अधिकारियों ने 17 नवम्बर से प्रस्तावित अपनी हड़ताल को एक हफ्ते के लिए टाल दिया है। अधिकारियों ने अधिक वेतनमान की मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी। तेल क्षेत्र अधिकारी एसोसिएशन (OSOA) के अध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि वेतनमान पर कैबिनेट की बैठक में विचार-विमर्श को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है। कैबिनेट 20 नवंबर को इस मसले पर विचार करेगी। इससे पहले ओएसओए ने कहा था कि एक जनवरी 2007 से वेतनमान में संशोधन नहीं किए जाने की वजह से सार्वजनिक क्षेत्र की 14 कंपनियों के 50000 अधिकारी कल हड़ताल पर जाएंगे।

पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने व्यापक तौर पर राष्ट्रीय हित की बात ध्यान में रखकर कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने का फैसला वापस लेने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि उनका मंत्रालय अधिक वेतनमान का समर्थन करता है और इस सिलसिले में उसने सार्वजनिक उद्यम विभाग को इस बारे में सुझाव दिया है। अमित कुमार ने कहा कि कैबिनेट की बैठक के बाद ही एसोसिएशन अपने भावी रणनीति की घोषणा करेगा।

17 November, 2008

केंद्रीय कर्मियों की सेवानिवृत्ति की आयु नहीं बढ़ेगी

केंद्रीय कर्मियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाए जाने की अटकलों को खारिज करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई योजना नहीं है। इस बारे में कैबिनेट सचिव केएम। चंद्रशेखर ने कहा कि ऐसी किसी योजना पर सरकार विचार नहीं कर रही। इस मामले में यथास्थिति बनी रहेगी। इस समय केंद्रीय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 साल है।

चंद्रशेखर ने कहा कि इस तरह की अफवाह हैं, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि मैने जानने की कोशिश की लेकिन किसी विभाग में ऐसी कोई फाइल नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु सरकारें ही तय करती हैं। अलग अलग राज्यों में सेवानिवृत्ति की अलग अलग आयु है। केरल में वहां के सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 55 साल है वहीं उत्तर प्रदेश और असम में 60 साल, मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों में सेवानिवृत्ति की आयु 62 साल है।

राजस्थान रोडवेज में छठा वेतनमान लागू

राजस्थान रोडवेज में छठा वेतनमान 17 नवम्बर से लागू हो जाएगा। इसका 22 हजार कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। राजस्थान रोडवेज ने बोर्ड की बैठक में पिछले महीने छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मंजूरी दी थी। चुनाव आचार संहिता के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। इसके लिए चुनाव आयोग ने अनुमति मांगी गई। वहां से अनुमति मिलने के बाद रोडवेज अध्यक्ष ने इसे लागू करने के आदेश दे दिए हैं।

संभवतया यह सोमवार से लागू हो जाएगा। सवा चार सौ करोड़ के घाटे से जूझ रहे रोडवेज को इसे लागू करने के बाद 9 करोड़ रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे निपटने के लिए रोडवेज प्रशासन ने डिपो के मुख्य प्रबंधकों को आय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

NTPC के कर्मचारी हड़ताल पर

देश में बिजली का उत्पादन करने वाली सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन (एनटीपीसी) के कर्मचारियों ने कहा है कि वे, वेतन आयोग के सुझावों में विसंगतियों के विरोध में 17 दिसम्बर को एक दिवसीय हड़ताल पर जाएंगे।

एनईएफआई के अध्यक्ष राकेश पांडे ने कहा, ‘एनटीपीसी एग्जीक्यूटिव फेडरेशन आफ इंडिया' की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में आन्दोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय किया गया।

16 November, 2008

PSU कर्मचारियों के भत्तों और बोनस पर भी कैंची

लागत खर्च में बेहिसाब बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था पर मंदी के बादल छाने की वजह से सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ कंपनियां (Public Sector Undertakings) कर्मचारियों के भत्तों और प्रदर्शन पर आधारित बोनस घटाने की योजना बना रही हैं। कुछ सरकारी कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों में उनके मुनाफे में भारी कमी देखने को मिली है। इसलिए ऐसी कुछ कंपनियां कपड़ा धुलाई, क्लब मेम्बरशिप, समाचार पत्र और पत्रिका, मनोरंजन, अनहेल्दी लोकेलिटी एलाउंस, कैश हैंडलिंग, शिक्षा और काम के दौरान प्रदर्शन पर आधारित अतिरिक्त राशि जैसे भत्तों में कटौती करना चाहती हैं।

यह कदम ऐसे वक्त आया है जब निजी सेक्टर की उनकी प्रतिस्पर्धी कंपनियां पहले से ही ऐसे उपाय कर रही हैं। इनमें कलर प्रिंटर का ज्यादा इस्तेमाल न करना, चौबीसों घंटे एयरकंडीशनर न चलाने और कर्मचारियों को लंच कूपन मुहैया कराने पर रोक लगाना शामिल है। सरकारी कंपनियों का मानना है कि कैश हैंडलिंग एलाउंस जैसे भत्तों का कोई मतलब नहीं है और इससे कंपनी पर बोझ बढ़ता है।

पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (डीपीई) विभाग के एक अधिकारी के अनुसार 'निश्चित रूप से प्रदर्शन वेतन के तौर पर मिलने वाले बोनस में कटौती देखने को मिल सकती है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ कंपनियों के नतीजे अच्छे नहीं आए हैं। इकनॉमिक टाइम्स में धीरज तिवारी/ सुभाष नारायण की रिपोर्ट है कि सरकारी तेल कंपनियों के लिए हालात और खराब हो सकते हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा मार खाई है। हालांकि, वे भत्ते देना जारी रखना चाहते हैं या नहीं, यह संबंधित कंपनियों और उनके प्रशासनिक मंत्रालयों पर निर्भर करता है।' लागत में कमी लाने की इस प्रक्रिया को इस्तेमाल करने में मुनाफा बनाने वाली कंपनियां भी पीछे नहीं हैं जो बाजारों में नकदी के संकट की वजह से प्रदर्शन आधारित बोनस काटने का मंसूबा रखते हैं। इन कंपनियों की योजना अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा रिजर्व में लगाने की है जिनमें विदेशी परियोजना रिजर्व और आम रिजर्व शामिल है।

भत्तों के तौर पर दी जाने वाली रकम में काफी गिरावट आएगी। फिलहाल, कंपनी की ओर से बांटे जाने वाला मुनाफे का 5 फीसदी हिस्सा है प्रदर्शन आधारित बोनस के तौर पर दिया जा सकता है। इंडियन ऑयल (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) समेत तीनों तेल कंपनियों का संयुक्त नुकसान 2008-09 की पहली तिमाही में 14,000 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। मौजूदा नियमों के मुताबिक सरकारी कंपनियों में दूसरे भत्ते, मूल वेतन के 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकते।

08 November, 2008

नौकरी के लिए गर्मजोशी से हाथ भी मिलाइए

साक्षात्कार में में टाई के रंग, अच्छी वेषभूषा और मुस्कान से ही काम नहीं चलेगा, इसके लिये गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाना भी जरूरी है। एक अंतरराष्ट्रीय दल ने शोध के बाद यह खुलासा किया है। अध्ययन में पाया गया कि सुस्ती के साथ हाथ मिलाने के बजाय रोज़गारादाता उन लोगों को तवज्जो देते हैं जो गर्मजोशी से हाथ मिलाते हैं। नजर मिलाकर बात करना और अधिक फायदेमंद है। डेली मेल में छपी रिपोर्ट में कहा गया कि जिंदादिली से हाथ मिलाने वाले अधिक सामाजिक, दोस्ताना और प्रभावित करने वाले माने जाते हैं जबकि ढीले-ढाले ढंग से पेश आने वालों को अंतर्मुखी, शर्मीला और स्नायुतंत्र से संबंधित समस्या से ग्रस्त माना जाता है।

शोध करने वाले दल के नेता जॉर्ज स्टीवर्ट ने कहा, 'हमने पाया कि हाथ कैसे मिलाते हैं, इससे ही पहला प्रभाव बाकी इंटरव्यू पर पड़ता है।' दल ने कुछ विशेषज्ञों का सहारा लिया जिन्होंने आवेदनकर्ताओं के इंटरव्यू से पहले उनके साथ हाथ मिलाया और उसकी गर्मजोशी और अवधि को नोट किया गया। बाद में उसका मिलान नतीजों से किया गया।

नई नौकरी पाने में टाई का भी अहम रोल होता है

अगली बार जब आप साक्षात्कार के लिए जाएं तो यह सुनिश्चित कर लें कि आपने अच्छी टाई पहनी हो। एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि नई नौकरी पाने में टाई के रंग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि टाई का रंग और उसकी डिजाइन कुछ खास तरह के लोगों से संबंधित होती है। उदाहरण के लिए बैगनी, हरी या गुलाबी रंग की टाई पहनना नई नौकरी के लिए अच्छा नहीं है।

उनके अनुसार बैगनी रंग की टाई घमंड एवं तड़क-भड़क का सूचक है और साक्षात्कार से पहले ही उम्मीदवार को खारिज किया जा सकता है। हरे रंग की टाई का भी बुरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि इससे पता चलता है कि पहनने वाला आदमी लालची, ईर्ष्यालु एवं दुर्भाग्यशाली है। और गुलाबी रंग की टाई को वार्डरोब में सबसे पीछे रखना चाहिए, क्योंकि भावुक प्रेमी इसे ज्यादा पसंद करते हैं। तब शुभ टाई कौन सी रहेगी।

शोध के अनुसार पीली, लाल और कत्थई रंग बेहतर होगा। इन रंगों की टाइयां पहनने वालों को क्रमश: दमदार, शाक्तिशाली और सौम्य प्रवृत्ति वाला माना जाता है।

04 November, 2008

उड़ीसा में छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों को हरी झंडी

छठे वेतन कमीशन की सिफारिश के अनुसार उड़ीसा के सरकारी कर्मचारियों को वेतन प्रदान करने के लिए सरकार ने हरी झण्डी दे दी है। वित्ता मंत्री प्रफुल्ल चन्द्र घड़ेई ने संकेत देने के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों को छठे वेतन कमीशन की सिफारिश के अनुसार वेतन प्रदान करने हेतु सरकार द्वारा फिटमेंट कमेटी गठित करने की बात कही है। फिटमेंट कमेटी छठे वेतन कमीशन की सिफारिश, कर्मचारियों की मांग और आर्थिक बोझ सम्बन्धित अनुध्यान कर आगामी तीन महीने के अन्दर सरकार को रिपोर्ट देगी।

फिटमेंट कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य में इस पर निर्णय लिया जाएगा। इस हेतु आगामी बजट में वित्त व्यवस्था की जाने की बात मंत्री श्री घड़ेई ने कही है। गौरतलब है कि छठे वेतन कमीशन की सिफारिश लागू करने पर सरकार को अधिक 700 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। इस दौरान विकास कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित फिटमेंट कमेटी पिछले 23 तारीख से सरकारी कर्मचारियों के विभिन्न संघों की ओर से सुनवाई शुरू कर दी है। यह आगामी चार नवंबर तक चालू रहेगी। फिटमेंट कमेटी के सामने संघ की ओर से वेतन कमीशन की सिफारिश कार्यकारी करने के लिए अपने विचार रखे जाएंगे। फिटमेंट कमेटी द्वारा सरकार को दी जाने वाली रिपोर्ट पर कर्मचारियों के नए वेतन सम्बन्धित निर्णय लिया जाएगा।

ASSOCHAM ने छंटनी पर रिपोर्ट वापस ली

सरकार और उद्योग जगत के कई हिस्सों से एक साथ नकारे जाने के बाद प्रमुख उद्योग चैंबर ASSOCHAM ने अपनी उस विवादास्पद रिपोर्ट को वापस ले लिया है, जिसमें 10 दिनों के भीतर 25 फीसदी नौकरियों में छंटनी की बात कही गई थी। एसोचैम ने अपनी रिपोर्ट वापस लेते हुए यह भी कहा है कि कुछ क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। एसोचैम की रिपोर्ट पर जबरदस्त राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई थी।

दो दिन पहले एसोचैम की तरफ से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया था कि सीमेंट, स्टील, आईटी, बीपीओ सहित सात प्रमुख क्षेत्रों में अगले 10 दिनों के भीतर 25 फीसदी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

01 November, 2008

अविवाहित सरकारीकर्मी के आश्रित को अनुकंपा पर नौकरी

बिहार में अब अविवाहित सरकारी कर्मियों की सेवा काल में मौत होने पर उनके आश्रितों को भी अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल सकेगी। अब तक ऐसा प्रावधान नहीं था। 30 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। इसके अतिरिक्त सरकारी कर्मियों की गुमशुदगी की स्थिति में अब सात वर्ष की जगह दो वर्ष की अवधि में ही उनके एक आश्रित को नौकरी मिल सकेगी। कैबिनेट की बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी कैबिनेट के प्रधान सचिव गिरीश शंकर ने मीडिया को दी।

उन्होंने बताया कि सेवाकाल में अविवाहित कर्मियों की मौत होने पर समूह-ग व घ के पदों पर उनके भाई, विधवा, मां या छोटी बहन को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल सकेगी। इसी तरह अगर कोई सरकारी कर्मी गुम हो जाता है तो अब दो वर्ष के भीतर उसके परिजन को उसकी जगह नौकरी मिल जाएगी। पहले इसके लिए सात वर्षों तक इंतजार किया जाता था। दो वर्ष बाद संबंधित कर्मी की जगह नौकरी कर रहे उसके आश्रित की नौकरी उस वक्त स्वत: समाप्त हो जाएगी जब गुम सरकारी कर्मी अचानक लौट आए।

31 October, 2008

रेलवे अधिकारी नहीं पहन सकेंगे टी-शर्ट

रेलवे बोर्ड ने रेल कर्मचारियों और अधिकारियों के ड्यूटी के दौरान टी-शर्ट पहनने पर पाबंदी लगा दी है। आदेश में कहा गया है कि ड्यूटी के दौरान आधी और पूरी बाजू की शर्ट पैंट के अंदर होनी चाहिए। फिलहाल ड्यूटी पर अपनी असली वर्दी पहनकर पहुंचें।

रेलवे बोर्ड की ओर से जारी आदेश को डिवीजन के विभिन्न ब्रांच अधिकारियों को पत्र जारी कर आदेश की पालना करने को कहा गया है। इसके अलावा यदि कोई हेडक्वार्टर या रेलवे बोर्ड का अधिकारी इंस्पेक्शन करने आता है तो अधिकारी पूरी बाजू की कमीज पहनकर ड्यूटी पर पहुंचें। उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार हेडक्वार्टर अधिकारियों के निरीक्षण दौरान देखा गया कि कई रेलकर्मी व अधिकारी बगैर कॉलर की टी-शर्ट पहनकर ड्यूटी पर तैनात थे, जिससे आम जनता रेल कर्मचारी और अधिकारी को नहीं पहचान सकती। लाइन, स्टेशन व अन्य स्टॉफ अपनी असली वर्दी में ड्यूटी पर तैनात होना चाहिए। इसीलिए रेलवे बोर्ड ने यह आदेश जारी कर ड्यूटी के दौरान टी-शर्ट पहनने पर पाबंदी लगा दी है।

इधर, कई रेलकर्मियों का कहना है कि कर्मचारी अपनी असली वर्दी की बजाय खुद अपनी ओर से बाजार से बढ़िया कपड़ा लेकर वर्दी सिलाते हैं। ऐसी वर्दी पहनने वाला कर्मचारी अधिकारी लगता है। वहीं, रेल अधिकारी का कहना है कि कर्मचारी और अधिकारी अपनी 'प्रॉपर' वर्दी पहनें। गर्मी में कई कर्मचारी ब्रांडेड कंपनियों की बगैर कॉलर की टी-शर्ट पहनकर नौकरी करने दफ्तर पहुंचते हैं, जो नियम के विपरीत है।

30 October, 2008

अगले दस दिन में आपकी नौकरी जा सकती है!

देश के प्रमुख वाणिज्य उघोग मंडल ASSOCHAM ने एक आकलन किया है कि सीमेंट, इस्पात, निर्माण, अचल संपत्ति, उड्डयन, सूचना आधारित और वित्त सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों को सतर्क होना चाहिए क्योंकि आने वाले चंद दिनों में इन क्षेत्रों में बडे़ पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी किए जाने की संभावना है। एसोचैम ने अनुमान व्यक्त किया है कि संभवत: इस क्षेत्र में 25 से 30 प्रतिशत कर्मचारी हटाए जाएंगे।

संगठन का कहना है कि आर्थिक वित्त संकट के दौर में सिकुड़ते मार्जिन को देखते हुए इन क्षेत्रों की कंपनियां लागत को कम करने के उपायों के तहत अगले दस दिन में नौकरियों पर कैंची चला सकती है। एसोचैम ने कहा है कि पिछले दो तिमाही से विस्तार की गति थमी है। देश के सकल घरेलू उत्पाद की बृद्धि दर पिछले चार साल में आठ प्रतिशत से नीचे आने की संभावना है। वित्त संकट को देखते हुए ऊंची ब्याज दरों के कारण मांग प्रभावित हुई है।
रिजर्व बैंक ने 24 अक्टूबर को जारी चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही की मौद्रिक एवं ऋण नीति की समीझा में देश की विकास दर के अनुमान को पहले के आठ प्रतिशत की तुलना में 2008-09 में घटाकर 7.5 से 8 प्रतिशत कर दिया है। समाप्त वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद में नौ प्रतिशत की जोरदार वृद्धि हुई थी।

एसोचैम ने कहा है नियोक्ता के पास अपनी कंपनी रणनीति के तहत परिचालन को बनाए रखने के लिए इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। घटते मार्जिन में कंपनियां पहले ही लागत कम करने के लिए पहले ही कई कदम उठा चुकी है। टाटा स्टील हाल ही में अनुबंध में रखे गए अपने सैकड़ों कर्मचारियों को हटा चुका है। इससे पहले निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी जेट एअरवेज ने 1900 कर्मचारियों को हटाने के फैसले से काफी बवाल मचा था और इसके बाद कंपनी को अपना यह फैसला वापस लेना पड़ा था। पिछले सप्ताह रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनी पार्श्वनाथ ने भी पिछले सप्ताह कहा है कि वह अपने कर्मचारियों की संख्या को तर्क संगत बनाएगी।

27 October, 2008

हरियाणा के बिजली कर्मचारियों को 8.33 फीसदी बोनस

हरियाणा के बिजली कर्मचारियों को मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने दीपावली के तोहफे के तौर पर 8.33 फीसदी बोनस देने का ऐलान किया है। कर्मचारियों को बोनस के लिए 3.88 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। बोनस का लाभ उन कर्मचारियों को दिया जाएगा, जिनका वेतन 10 हजार रुपए महीने से ज्यादा नहीं है।

श्री हुड्डा का कहना है, दीपावाली उपहार के रूप में बिजली कर्मचारियों को 525 रुपए की राशि नकद दी जाएगी। कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए हुड्डा ने घोषणा की कि राज्य के बिजली उपक्रमों के कर्मचारियों को रिटायर होने पर अब एक के बजाय दो हजार रुपए का उपहार दिया जाएगा।

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू करने के लिए हुड्डा ने बिजली उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी गठित करने की जानकारी देते हुए कहा, यह कमेटी उन्हें दिए जाने वाले विभिन्न भत्तों को देखेगी। हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन अपने कर्मचारियों के लिए पहले ही उत्पादन प्रोत्साहन योजना घोषित कर चुका है। इसके लिए 4.18 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

राजस्थान के कर्मचारियों को दीपावली के अवसर पर बोनस की अनुमति

केन्द्रीय चुनाव आयोग ने राजस्थान के राज्य कर्मचारियों को दीपावली के अवसर पर बोनस बांटे जाने की अनुमति दे दी है। आयोग से 25 अक्टूबर को ही इस संबंध में राज्य निर्वाचन विभाग को सूचना मिली। निर्वाचन विभाग ने बोनस बांटने के संबंध में सभी संबंधित विभागों को सूचित कर दिया है। इससे राज्य सरकार के करीब 4.50 लाख कर्मचारियों को बोनस मिल सकेगा। राजस्थान रोडवेज, हाउसिंग बोर्ड और स्पिनफैड सहित कई विभाग पहले ही कर्मचारियों को बोनस देने का फैसला कर चुके हैं। ये भी केन्द्रीय चुनाव आयोग की हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे थे।

राज्य सरकार ने 5 दिन पहले ही वित्त विभाग के माध्यम से चुनाव आयोग को बोनस का प्रस्ताव बनाकर भिजवाया था। सरकार का तर्क था कि कर्मचारियों को हर साल बोनस दिया जाता रहा है, इसलिए इस बार भी कर्मचारियों को बोनस बांटा जाना है, इसलिए बोनस बांटने में आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं है। इससे पहले सरकार ने राज्य कर्मचारियों को केन्द्रीय छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत अधिकतम 3500 रुपए बोनस देने का फैसला किया था। वित्त विभाग के अनुसार 30 दिन के हिसाब से कर्मचारियों को करीब 3387 रुपए का बोनस मिलेगा। वित्त विभाग का कहना है कि कर्मचारियों को सोमवार से बोनस का भुगतान शुरू हो जाएगा। इस संबंध में वित्त विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। ज्यादातर विभागों में बोनस के बिल पहले से ही तैयार कर लिए गए हैं।

24 October, 2008

टाटा मोटर्स ने और 400 कर्मचारियों को हटाया

दुनिया भर में छाए वित्तीय संकट के कारण जारी छंटनी के दौर के बीच देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने उत्पादन में गिरावट के चलते अपने और चार सौ अस्थायी कर्मियों को 23 अक्टूबर से काम से हटा दिया। इससे पूर्व कंपनी ने 20 अक्टूबर को भी अपने लगभग तीन सौ कर्मियों को काम से हटा दिया था। टाटा मोटर्स के जमशेदपुर स्थित भारी वाहन संयंत्र के इन अस्थायी कर्मियों को बुधवार को नोटिस देकर बृहस्पतिवार से काम पर न आने को कहा गया है। संयंत्र के श्रमिक संगठन टेल्को वर्कर्स यूनियन के महासचिव चंद्रभान प्रसाद ने लगभग तीन सौ अस्थायी कर्मियों को बृहस्पतिवार से काम पर न आने का नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि ये कर्मी विभिन्न विभागों से जुड़े थे।

इस बीच संयंत्र के प्रवक्ता कैप्टन पी जे सिंह ने भी अस्थायी कर्मियों को फिलहाल काम पर नहीं आने का नोटिस दिए जाने की पुष्टि की हालांकि उन्होंने कहा कि वह यह नहीं बता सकते कि यह संख्या तीन सौ है या उससे कुछ कम। उन्होंने कहा कि विभिन्न कारणों से उत्पादन में आई गिरावट के कारण यह कदम उठाया जा रहा है।

ज्ञातव्य है कि इससे पूर्व गत 20 अक्टूबर को भी जमशेदपुर संयंत्र के ट्रक डिवीजन लगभग एक सौ तथा कैब एंड क्वायल डिवीजन के दो सौ अस्थायी कर्मियों को काम से हटा दिया गया था। समझा जाता है कि वैश्विक मंदी के कारण उत्पादन में लगातार हो रही गिरावट के कारण यह कदम उठाया गया है। हर साल बरसात के बाद उत्पादन और मांग बढ़ने पर कंपनी और अस्थायी कर्मियों को काम पर बुलाती थी। पर इस बार पहले से कार्यरत लगभग पौने दो हजार अस्थायी कर्मियों में से भी लगभग छह सौ को हटाया जा रहा है। संयंत्र के कुल अस्थायी कर्मियों की संख्या साढ़े तीन हजार तक है।

22 October, 2008

उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों को बोनस देने का शासनादेश जारी

उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों को बोनस देने का शासनादेश जारी हो गया है। शासनादेश में कहा गया है कि समस्त पूर्णकालिक अराजपत्रित कर्मचारियों, राज्य निधि से सहायता प्राप्त शिक्षण, प्राविधिक संस्थाओं, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों के ऐसे कर्मचारियों, जिनके वेतन अधिकतम 10,500 रुपये तक हैं, को तदर्थ बोनस के रूप में 30 दिन की परिलब्धियों की स्वीकृत प्रदान की गयी है। वेतनमान 6500-10500 तक के पद पर कार्यरत ऐसे अराजपत्रित कर्मचारियों को, जिन्हें उक्त वेतनमान से उच्चतर वेतनमान व्यैक्तिक प्रोन्नति, अगला वेतनमान के रूप में अनुमन्य हुआ है और उसके स्टेटस में परिवर्तन नहीं हुआ है को भी तदर्थ बोनस अनुमन्य होगा।

ऐसे कर्मचारी जिन्होंने 1-1-96 से लागू पुनरीक्षित वेतनमानों के बजाय पूर्ववर्ती वेतनमान में ही बने रहने का विकल्प दिया हो, के सम्बंध में भी वेतनमान का अधिकतम 3500 रुपये तक माना जायेगा। शासनादेश में कहा गया है कि तदर्थ बोनस की अधिकतम देय धनराशि 3500 रुपये प्रतिमाह की परिलब्धियां पाने वाले कर्मचारियों के लिए स्वीकार्य राशि तक सीमित रहेगी अर्थात जिन कर्मचारियों की परिलब्धियां 3500 रुपये से अधिक थीं, उनके लिए तदर्थ बोनस का आगणन इस प्रकार किया जाएगा मानो उनकी परिलब्धियां 3500 रुपये हों।

बोनस उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्होंने 31 मार्च 08 तक निरंतर एक वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।

20 October, 2008

अफसरों-कर्मियों की आय में अंतर बढ़ा

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के International Institute for Labor Studies की एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि मजबूत आर्थिक विकास से करोड़ों नई नौकरियों के सृजित होने के बावजूद दुनिया भर में आय विसंगति की खाई 1990 के दशक के बाद से लगातार बढ़ी है। । इंस्टीट्यूट के निदेशक रेमंड टोरस ने कहा कि रिपोर्ट का निष्कर्ष यही है कि धनी और निर्धनतम घरों में अंत 1990 के दशक से ही बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अगर दीर्घकालिक ढांचागत सुधार नहीं अपनाए जाते हैं तो मौजूदा वैश्विक वित्तीय संकट, स्थिति को बदतर ही करेगा।

संगठन (आईएलओ) द्वारा जारी इस अध्ययन में कहा गया है कि मौजूदा वित्तीय एवं आर्थिक संकट का अधिकतर बोझ उन करोड़ों लोगों का उठाना पड़ेगा जिन्हें पिछले आर्थिक विकास का लाभ नहीं मिला था। इसमें कहा गया है कि 1990 के दशक से 2007 के बीच अर्थव्यवस्थाओंके विस्तार से वैश्विक रोजगार में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई। लेकिन इसके साथ ही आय में अंतर भी बढ़ा है। अध्ययन के अनुसार अत्यधिक आय विसंगति को उच्च अपराध दर, निम्न जीवन प्रत्याशा से जोड़ा जा सकता है। इसमें कहा गया है कि पहले ही अनेक देशों में यह धारणा है कि वैश्वीकरण आबादी के अधिकतर हिस्से के लाभ के लिए काम नहीं कर रहा है।

रिपोर्ट में आय में बढ़ते अंतर को शीर्ष कार्यकारियों तथा आम कर्मचारी के वेतन में अंतर से भी जोड़ा गया है। उदाहरण के रूप में 2007 में अमेरिका की 15 शीर्ष कंपनियों के CEO की आय, आम कर्मचारी की तुलना में 520 गुना अधिक रही।

SBI के कर्मचारियों ने 20 अक्टूबर से होने वाली हड़ताल वापस ली

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने 20 अक्टूबर से देश भर में होने वाली हड़ताल वापस ले ली है। ऐसा उन्होंने स्टेट बैंक प्रबंधन की अपील पर किया है।

स्टेट बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के जनरल सेक्रटरी जीडी नडफ ने इस फैसले की जानकारी दी। कर्मचारी यूनियनों ने हड़ताल पेंशन स्कीम में सुधार, पुराने समझौतों को लागू करने और स्टेट बैंक में दूसरे बैंकों को मिलाए जाने के खिलाफ बुलाई थी।

19 October, 2008

आचार संहिता के चलते बढ़े वेतन, भत्ते नहीं मिलेंगे

पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर देश में पांच लाख कालेज शिक्षकों को दीपावली पर बढ़े हुए वेतन और भत्ते नहीं मिल सकेंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने 17 अक्टूबर को कहा कि चुनाव की घोषणा के साथ आचार संहिता के लागू हो जाने के कारण इसे अंजाम देने में मुश्किलें आ रही हैं।

दैनिक हिन्दुस्तान में राजिव रंजन नाग के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समिति की सिफारिशें मान लिये जाने के बावजूद सरकार इसे 4 दिसंबर (चुनाव संपन्न होने तक) तक लागू नहीं कर सकेगी। अगले महीने पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, इनमें राजधानी दिल्ली के अलावा राजस्थान, मिजोरम, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ शामिल हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा गठित प्रोफेसर जी.के. चढ्डा कमेटी ने पिछले दिनों कालेज शिक्षकों के वेतन-भत्ते में 70 फीसदी की वृद्धि और अकादमिक सुविधाओं की सिफारिश की थी। इसका लाभ केंद्रीय व राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों के पांच लाख से अधिक शिक्षकों को मिल सकेगा।

मंत्रालय सूत्रों ने कहा कि जून 2006 में उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी छात्रों को 27 फीसदी आरक्षण की घोषणा के कारण फजीहत झेल चुके अर्जुन सिंह इसकी पुनरावृत्ति नहीं चाहते हैं। तब तमिलनाडु, केरल, असम, पश्चिम बंगाल और पांडिचेरी में विधान सभा चुनाव के दौरान आरक्षण की घोषणा पर चुनाव आयोग ने गंभीर आपत्ति जताते हुए केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह को आयोग के दफ्तर में बुलाकर सफाई देने का निर्देश दिया था।

किंगफिशर के प्रशिक्षु पायलटों का वेतन घटेगा

विश्व पर छाई मंदी का असर देश के उड्डयन क्षेत्र पर साफ दिखाई दे रहा है। पहले जेट एयरवेज तो अब किंगफिशर की बारी है। निजी विमानन कंपनी किंगफिशर ने शनिवार को घोषणा की कि वह 50 प्रशिक्षु सह-पायलटों के वेतन में कटौती करेगी।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "देश के उड्डयन क्षेत्र में अस्थायित्व की वजह से कंपनी ने 50 प्रशिक्षु सह-पायलटों के वेतन में कटौती का फैसला किया है। वे कंपनी में कार्य करते रहेंगे और उन्हें अन्य सभी सुविधाएं मिलती रहेंगी। "

गौरतलब है कि इससे पहले जेट एयरवेज़ ने अपने 800 कर्मचारियों को काम से निकाला दिया था और बाद में राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें वापस रख लिया । इंडियन एयरलाईन ने भी घाटे को कम करने के लिए अपने 15,000 कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने की बात कही थी। इससे पहले 15 अक्टूबर को कंपनी के चेयरमैन विजय माल्या ने कहा था कि उनकी कंपनी किसी भी कर्मचारी को काम से नहीं हटाएगी।

रिजर्व बैंक में 21 अक्टूबर को सामूहिक अवकाश

भारतीय रिजर्वं बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पेंशन के मुददे पर 21 अक्टूबर को सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है। उधर रिजर्व बैंक ने अधिकारियों और कर्मचारियों के इस कदम को अवैध बताया है क्योंकि इसकी पहले सूचना नहीं दी गयी है। युनाइटेड फोरम आफ रिजर्व बैंक आफिसर्स एंड एम्प्लाइजेज ने अपने सदस्यों से 21 अक्टूबर को सामूहिक अवकाश पर जाने का आह्वान किया है। आरबीआई प्रति पांच वर्ष के बाद अपने अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतनमान संशोधित किया जाता है। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि पेंशन के मामले में ऐसा नहीं है।

इस बीच रिजर्व बैंक ने कहा है कि कर्मचारियों के इस कदम से सामान्य कामकाज बाधित होगा। बैंक ने आम जनता को सलाह दी है कि अपने काम 20 अक्टूबर तक निपटा ले।

कर्मचारियों को लगा झटका ,नहीं मिलेगा एरियर

राजस्थान में छठा वेतन आयोग लागू होने से पैदा हुई वेतन विसंगतियों के बाद राज्य कर्मचारियों को दूसरा बड़ा झटका लगा है। सरकार ने उन्हे मिलने वाले पिछले बीस महीने के एरियर में मकान किराया भत्ता (एचआरए) का एरियर नहीं देने का ऐलान किया है। इसका असर सबसे ज्यादा उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो 5000 से 8000, 5500 से 90000 और 6500 से कम 10,500 की वेतन श्रृंखला में थे। राजस्थान में इनकी संख्या लगभग 4।50 लाख है।

छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद फिक्सेशन, एरियर और अन्य विषयों के संबंध में राज्य कर्मचारियों की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण में वित्त विभाग ने यह खुलासा किया है। वित्त विभाग के प्रमुख सचिव सुभाष गर्ग का कहना है कि वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद दिए जाने वाले एरियर के रूप में कभी भी मकान किराया भत्ता (एचआरए) देने की परंपरा नही रही है। इसलिए राज्य कर्मचारियों को इस बार भी मकान किराया भत्ते का एरियर नहीं दिया जाएगा, लेकिन मौजूदा नए वेतन पर यह एरियर नियमानुसार मिलेगा।

एचआरए के पुराने आदेशों के बारे में गर्ग का कहना है कि हो सकता है उस समय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद मकान किराया भत्ता देर से दिया हो, इसलिए बाद में आदेश जारी किए गए हों। सरकार के इस फैसले के राज्य कर्मचारियों में भारी निराशा है। कर्मचारियों का कहना है कि पाचवें वेतन आयोग के समय तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार ने तो केवल 12 महीने का ही एचआरए का एरियर नहीं दिया था, लेकिन इस सरकार ने पूरे 20 महीने के एरियर को ही नहीं दिया है। इधर, छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से वेतन विसंगतियों को लेकर बनी कर्मचारी एकता समिति ने केंद्र के समान वेतनमान देने को लेकर संघर्ष करने की रणनीति बनाई है। समिति के केंद्र के समान वेतनमान देने को लेकर संघर्ष करने की रणनीति बनाई है।

16 October, 2008

सैन्य बलों को संशोधित वेतन के बारे सप्ताह भर और इंतजार करना होगा

सैन्य बलों को संशोधित वेतन के बारे में खुशखबरी के लिए सप्ताह भर और इंतजार करना होगा।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आज हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सैन्य बलों का मुद्दा नहीं आया। बैठक में वित्त मंत्री पी चिदम्बरम दिल्ली से बाहर होने के कारण हिस्सा नहीं ले सके जो सैन्य बलों की वेतन विसंगतियों के समाधान के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति में शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने 25 सितम्बर को विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में यह समिति गठित की थी जिसमें रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी भी शामिल हैं। समझा जाता है कि एंटनी सैन्य बलों द्वारा उठाई गई चारों मांगों को स्वीकार किए जाने के लिए जोरदार पैरवी कर चुके हैं। आधिकारिक सूत्रों ने संकेत दिया कि अब सैन्यकर्मियों को वेतन की खुशखबरी दीवाली से तीन-चार दिन पहले सुनाई जाने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि कल से संसद का सत्र शुरू हो रहा है और 28 अक्टूबर को दीवाली से पहले केबिनेट की नियमित बैठक 23 अक्टूबर को होनी है।

सैन्य बलों की सभी मांगे मानने हेतु केबिनेट की मंजूरी आज!?

सैन्य बलों को दिवाली का तोहफा देते हुए छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट से उपजी चारों विसंगतियों को दूर करने की सम्भावनाओं के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल में आज इस आशय का प्रस्ताव पारित होने जा रहा है। सैन्य बलों ने जिन मामलों को सरकार के सामने उठाया था। मोटे तौर पर उन सभी का समाधान मुखर्जी समिति करने जा रही है। सूत्रों के अनुसार समिति ने सैन्य प्रमुखों की सभी मांगों का इस ढंग से समाधान करने का निर्णय लिया है कि उसके बाद कोई शिकायत बाकी नहीं रह जाए।

वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने संबंधी प्रस्ताव केबिनेट ने पारित किया था और उसमें तब्दीली भी अब केबिनेट ही कर सकती है। संसद का सत्र 17 अक्टूबर को शुरू होने से एक दिन पहले आज होने वाली केबिनेट की नियमित बैठक में सैन्य बलों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के बारे में निर्णय लिया जाएगा।

सैन्य प्रमुखों का ज्ञापन मिलने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गत 25 सितम्बर को विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी जिसमें वित्त मंत्री पी चिदम्बरम के अलावा रक्षा मंत्री ए के एंटनी भी शामिल हैं। इस समिति की पहली बैठक 14 अक्टूबर को हुई, जिसमें लेफ्टीनेंट कर्नलों को वेतन बैंड चार में रखने, आफिसर से नीचे के रैंक के कर्मियों की पेंशन वेटेज 70 प्रतिशत तक बहाल करने लेफ्टिनेंट जनरलों को उच्चतर प्रशासनिक ग्रेड में रखने तथा असैन्य एवं अर्ध सैनिक बलों के साथ वेतन तुलनात्मक वेतन रखने की मांग पर विचार किया गया।

'वार्ता' की ख़बर है कि आसन्न आम चुनाव को देखते हुए राजनीतिक नेतृत्व 14 लाख सैन्यकर्मियों के नाराज होने की कोई गुंजाइश नहीं छोडना चाहता क्योंकि उनके प्रति व्यापक पैमाने पर जनता की सहानुभूति है। वायु सेना दिवस सैन्यकर्मियों के लिए राजनीतिक नेतृत्व के साथ खुलकर बातचीत करने का बढिया मौका लेकर आया था जिसमें वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल फली होमी मेजर के निवास पर आयोजित मिलन समारोह में प्रधानमंत्री. वित्त मंत्री और रझा मंत्री के साथ तीनों सेनाओं के प्रमुखों की अनौपचारिक बातचीत हुई। इस समारोह के बाद तीनों प्रमुखों के चेहरे पर संतोष और खुशी की झलक थी।

10 October, 2008

अब ट्यूशन नहीं पढ़ा सकेंगे सरकारी शिक्षक

अब सरकारी शिक्षक न तो ट्यूशन पढ़ा सकेंगे और न ही निजी स्कूलों में पार्ट टाइम काम कर सकेंगे। 8 अक्टूबर की शाम मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह के निवास पर हुई मंत्री समूह की बैठक में ‘बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार- विधेयक 2008’ के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। यह बिल संसद के अगले सत्र में पारित किया जाएगा।

प्रस्तावित विधेयक में अन्य बातों के अलावा कुछ खास बातें भी हैं। विधेयक के अध्याय तीन की धारा 28 के मुताबिक कोई भी शिक्षक ट्यूशन नहीं दे सकता और न ही अपने को किसी निजी स्कूल के साथ बांध सकता है। शिक्षक की नौकरी डॉक्टर की तरह 24 घंटे की तरह मानी जाएगी। अभी शिक्षक स्कूलों में कम और अपने घरों या ट्यूटोरियल में ज्यादा पढ़ा रहे हैं। कुछ शिक्षक निजी स्कूलों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए कानूनी प्रावधान किया जा रहा है।

07 October, 2008

चुनाव में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों का बीमा होगा

चुनाव आयोग ने छत्तीसगढ़ में इस वर्ष के अन्त में होने वाले विधानसभा चुनावों में निर्वाचन डयूटी में लगाये जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों का पांच लाख रूपये का बीमा करवाने का निर्णय लिया है। उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आर।डी.दीवान ने पत्रकारों को आज यह बताया कि निर्वाचन डयूटी के दौरान अगर किसी अधिकारी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो उसके आश्रितों को पांच लाख रूपये की बीमे की राशि मुआवजे के रूप में मिलेगी जबकि स्थायी अपंगता की स्थिति में तीन लाख रूपये एवं अस्थायी अपंगता की स्थिति में एक लाख रूपये मिलेंगे।

उन्होंने बताया कि बीमा की अवधि चुनाव ड्यूटी शुरू होने तथा मतदान केन्द्रों से वापस आने के बीच होगी। बीमा कवर मतदान केन्द्र के लिये मशीनों को लेकर रवाना होने तथा मतदान के बाद उसे जमा करने के बीच माना जायेगा जो कि अधिकतम तीन दिन हो सकता है। भौगोलिक रूप से दुर्गम इलाकों के लिये यह अवधि ज्यादा हो सकती है।

दरअसल छत्तीसगढ़ के बस्तर एवं सरगुजा इलाके नक्सल प्रभावित हैं। डेढ़ दर्जन से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में नक्सलियों का काफी ज्यादा बोलबाला है। चुनाव पार्टियों पर हमले भी करते रहे है। इन इलाकों में संभावित खतरों के मद्देनजर बीमा काफी जरूरी माना जाता रहा है।

06 October, 2008

आफिस से नियमित गायब रहने वाले व्यक्तियों की असमय मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है!?

बात थोड़ा हैरान, थोड़ा परेशान करने वाली है लेकिन सावधान! अगर आप बीमारी के नाम पर आफिस से जल्दी-जल्दी छुटि्टयां ले रहे हैं तो सचेत हो जाएं, क्योंकि एक नए शोध से यह बात सामने आई है कि ऐसा करने वालों के दरवाजों पर समय से पहले, मौत खड़ी हो जाती है। एक ब्रिटिश जर्नल में यह शोध प्रकाशित हुआ है।

अनुसंधानकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि आफिस से नियमित गायब रहने वाले व्यक्तियों की असमय मृत्यु की संभावना 66 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। ऐसे कर्मचारी, जो मनोवैज्ञानिक परेशानियों की वजह से ऑफिस आने में असमर्थ रहते हैं, उनमें कैंसर से मौत का खतरा ढाई गुना तक बढ़ जाता है। ऐसे लोग जो संक्रामक बीमारियों के कारण आफिस नहीं आ पाते, अपने स्वस्थ सहयोगियों की अपेक्षा जल्दी मौत का शिकार हो जाते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया इन लोगों में यह खतरा चार गुना ज्यादा पाया जाता है। हालांकि मांसपेशियों से संबंधित बीमारियों से ग्रसित कर्मचारियों में ऐसा खतरा नहीं बढ़ता। लंदन के यूनिवर्सिटी कालेज की खोज में ब्रिटिश सिविल सर्विसेज के कर्मचारियों का परीक्षण किया गया।

इस खोज की प्रमुख रहीं जेनी हेड के मुताबिक मनोवैज्ञानिक बीमारियों और कैंसर जैसे रोग का कारण अवसाद से ग्रस्त लोगों का समय पर अपने डॉक्टर के पास न जाना हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि हमने इसके कारणों पर शोध नहीं किया, लेकिन ऐसा लगता है कि ऐसे लोगों में डॉक्टरी सलाह लेने की प्रवृत्ति कम पाई जाती है।'

बीबीसी पर आया यह मूल समाचार मौज़ूद है।

05 October, 2008

शिक्षक का वेतन IAS से अधिक होगा!

विश्वविद्यालयों और कॉलेज शिक्षकों के वेतनमान की समीक्षा के लिए बनी जी. के. चड्ढा समिति ने 3 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट यूजीसी के चेयरमैन प्रो. सुखदेव थोराट को सौंप दी। रिपोर्ट में टीचर कम्यूनिटी को एक 'शानदार तोहफा' देने की बात कहते हुए टीचरों के विभिन्न पदों के वेतनमान में डेढ़ गुने से भी अधिक की बढ़ोतरी का सुझाव रखा है। कमिटी ने रिपोर्ट की सिफारिशों को 1 जनवरी 2006 से लागू करने की बात कही है। मंहगाई भत्ते को छोड़कर अन्य सभी भत्तों को 1 सितंबर 2008 के आधार पर देने की सिफारिश की गई है। 

चड्ढा ने रिपोर्ट देने के बाद मीडिया से कहा कि अतिरिक्त योग्यता के आधार पर दिए जाने वाले इन्क्रीमेंट को जोड़ दिया जाए तो कुल बढ़ोतरी औसतन 75 प्रतिशत से भी अधिक है। भत्तों के साथ कुछ पदों के लिए यह वृद्धि 75 से 90 प्रतिशत के बीच है। समिति ने अलग से 1500 रुपये का 'ऐकडेमिक अलाउंस' देने की भी सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि टीचरों को हर स्तर पर सम्मानजनक वेतनमान देने की सिफारिश की गई है। 

देश भर के सभी कॉलेजों और राज्य विश्वविद्यालय के शिक्षकों को भी केंदीय विश्वविद्यालयों की ही तरह रिटायरमेंट आयु 65 साल करने और शिक्षकों को रिटायरमेंट के बाद भी रिक्तता के आधार पर कॉन्ट्रेक्ट पर 70 साल तक दोबारा रखे जाने की सिफारिश की गई है। नवभारत टाइम्स खबर देता है कि थोराट यह रिपोर्ट 7 अक्टूबर को होने जा रही कमिशन की बैठक में रखेंगे। कमिशन के अनुमोदन के बाद वह इसे मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह को सौंपेंगे। 

नए स्केल में असिस्टेंट प्रोफेसर का स्केल 8000-275-13500 से बढ़कर 15600-39100 हो जाएगा। जबकि प्रोफेसर का स्केल 37400 से 67,000 हो जाएगा। 

01 October, 2008

Arrears का पूरा टैक्स एक साथ नहीं

केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद मिलने वाले बकाया की कुल रकम पर एक साथ टैक्स नहीं देना होगा। चालू कारोबारी साल में उन्हें बकाया की जो रकम मिलेगी, उस पर इस साल टैक्स लगेगा। फिर अगले कारोबारी साल में एरियर की जो रकम मिलेगी, उस पर अगले कारोबारी साल में टैक्स लगेगा। 

उल्लेखनीय है कि सरकार ने पहले कहा था कर्मचारियों को मिलने वाले एरियर की कुल रकम पर टैक्स इसी साल लगेगा। पर अब वित्त मंत्रालय ने एक परिपत्र जारी कर नई बात कही है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते वक्त सरकार ने कहा था कि कर्मचारियों को चालू कारोबारी साल में एरियर की कुल रकम का 40 परसेंट दिया जाएगा और बाकी 60 फीसदी रकम अगले कारोबारी साल में दिया जाएगा। 

30 September, 2008

रेल कर्मियों को इस साल 72 दिन का बोनस

रेल कर्मियों को इस साल 72 दिन का बोनस मिलेगा। रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सोमवार को इस आशय की घोषणा की।

27 September, 2008

वेतन विसंगतियों पर IPS भी खफा

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से भी ज्यादा पगार देने के सरकार के फैसले के बावजूद वेतन विसंगतियों को लेकर शिकायतें थम नहीं रही हैं। अब भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की शिकायत यह है कि उनके वेतनमान निर्धारण में केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले की अवहेलना की गई है। आईपीएस अधिकारियों के मुताबिक कैबिनेट के फैसले की तोड़-मरोड़ कर व्याख्या की गई है। IPS के कुछ वेतनमान इस तरह से प्रस्तुत किए गए हैं, जिनका वेतन आयोग और कैबिनेट के फैसले में कोई उल्लेख नहीं है। लिहाजा आईपीएस संघ इस पर खासा नाराज है। केंद्र सरकार को अपनी शिकायत भेज कर उसने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तक की मांग कर डाली है। 

शिकायत पत्र में आईपीएस अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि इस सिलसिले में आयोग की सिफारिशों की व्याख्या कुछ इस तरह से की गई है कि आईएएस और आईएफएस अधिकारियों को वेतन वृद्धि का लाभ कैबिनेट के फैसले से ज्यादा ही मिलेगा। इससे दूसरी सेवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। यानी सिफारिशें लागू होने के बाद जहां दूसरी सेवाओं के अधिकारियों का मौजूदा मूल वेतन 15,100 रुपये प्रति माह से 47,230 रुपये मासिक हो रहा है, वहीं सिफारिश की गलत व्याख्या की वजह से आईएएस का यही मूल वेतन 48,390 रुपये प्रति माह पहुंच रहा है। मांग पत्र में कहा गया है कि आईएएस और आईएफएस को आईपीएस से ऊपर रखने को लेकर आयोग की सिफारिश का फायदा उठाते हुए यह कदम उठाया गया है। गौरतलब है कि वेतन आयोग ने आईएएस और आईएफएस के वर्चस्व को कायम रखने के लिए उनके वेतन बैंड में दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि का प्रावधान किया था। 

आईपीएस अधिकारियों का तर्क है कि अगर वरिष्ठ वेतनमान (एसटीएस) और कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (जेएजी) स्तरों पर IAS वर्ग को दो वेतन वृद्धि देनी भी है तो यह बढ़ोतरी उन्हें एसटीएस (6600 रुपये) के लिए पदोन्नति देते समय कर देनी चाहिए। लेकिन 7600 रुपये के वेतन ग्रेड के लिए उनकी पदोन्नति के समय उन्हें दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि देने से उन्हें इस स्तर पर चार वेतन वृद्धि हासिल हो जाएंगी जो कैबिनेट के फैसले के खिलाफ है। आईपीएस का आरोप है कि इससे निदेशक के पद पर आसीन आईएएस को पुलिस महानिदेशक से ज्यादा वेतन मिलने लगेगा, जबकि दोनों सुपर टाइम स्केल में आते हैं।
(जागरण से साभार)

नए वेतनमान स्वीकाने से फौज का इनकार!?

कड़े अनुशासन में चलने वाली फौज ने वेतनमान में विसंगतियां दूर न होने के चलते नए वेतनमान को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सशस्त्र सेना के तीनों बलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए लेखा कार्यालय में संशोधित वेतन के मुताबिक बिल जमा नहीं कराए हैं। इसका साफ मतलब है कि उन्हें छठे वेतन आयोग व उसके बाद समीक्षा में तय किया गया वेतनमान स्वीकार्य नहीं है। 

रक्षा बलों के इस कड़े रुख से उनकी मांगें न माने जाने पर 'काली दीवाली' मनाने की धमकी पर अमल शुरू हो गया है। हालांकि मुख्य एतराज मध्यम स्तर के अधिकारियों के वेतन में विसंगति को लेकर है, पर इस मसले पर पूरी फौज एकजुट नजर आ रही है। मध्यम स्तर के अधिकारियों को सिविल व अ‌र्द्धसैनिक बलों के अधिकारियों से कम वेतनमान दिया गया है, जबकि पहले उनका वेतनमान इनसे अधिक होता था। सरकार ने गुरुवार को सैद्धांतिक तौर पर बलों की इस मांग को मान लिया था कि पिछली बार मिले वेतन के आधार पर जवानों की पेंशन में 70 फीसदी वृद्धि बहाल होगी, पर बाकी मांगों पर चुप्पी साध रखी है। 

छठे वेतन आयोग ने अपनी सिफारिश में जवानों को 50 फीसदी पेंशन लाभ के साथ ही उन्हें अ‌र्द्घसैनिक बलों व केंद्रीय पुलिस बल में शामिल होने का विकल्प दिया है। लेकिन असल में रिटायरमेंट के बाद दूसरी नौकरी के विकल्प पर मुहर नहीं लगाई गई है। इस आक्रोश को सामने रखने के लिए ही चीफ्स आफ स्टाफ कमेटी के प्रमुख व नौसेनाध्यक्ष एडमिरल सुरीश मेहता व थल सेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर ने गुरुवार को कैबिनेट सचिव के.एम. चंद्रशेखर से मुलाकात की थी। 

वित्त मंत्रालय बजट की कमी का रोना रो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री के एक अक्टूबर को अमेरिका से लौटने के बाद ही इस संबंध में कोई फैसला संभव होगा। रक्षा बलों के कड़े रुख से साफ है कि इस दीवाली पर 50 लाख सिविल व अन्य कर्मी, अधिकारी नए वेतनमान की खुशी मनांएगे, पर 13 लाख रक्षा कर्मी व अधिकारी पुराने वेतन के साथ ही विरोध जताएंगे। इधर पूर्व सैनिक मूवमेंट के प्रमुख रिटायर्ड मेजर जनरल सतबीर सिंह ने कहा कि इस जंग में पूर्व सैनिक भी अपने सेनाध्यक्षों के साथ हैं।

बोनस राशि कम देने पर श्रमिक संगठनों में उबाल

SAIL प्रबंधन द्वारा आईएसपी के स्थायी कर्मचारियों के लिए 6500 रुपये बोनस निर्धारित करने से बर्नपुर के यूनियनों में आया उबाल आंदोलन का रूप लेने लगा है। ISSCO में सक्रिय पांचों केन्द्रीय यूनियनों ने अपना विरोध जताते हुए शुक्रवार को SAIL, ISP प्रबंधन के मिहिर कुमार राउत को ज्ञापन सौंपा एवं मांग की कि जल्द से जल्द कर्मियों को 6500 रुपये की बजाय 7300 रुपये बोनस का भुगतान किया जाये।

मालूम हो कि पिछले वर्ष कर्मियों को 7000 रुपये का भुगतान किया गया था। लेकिन इस वर्ष 6500 रुपये बोनस निर्धारित करने से पांचों यूनियनों में खलबली मच गयी है। इतनी कम बोनस की राशि के निर्धारित होने से ही इंटक, एचएमएस, सीटू, एटक एवं बीएमएस के बैनर तले श्रमिकों ने आईएसपी के मुख्यालय में भारी संख्या में उपस्थित होकर आईएसपी के जीएम मिहिर कुमार राउत को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान मांग की गयी कि इस वर्ष की बोनस की राशि को बढ़ा कर 7300 किया जाय। इस संबंध में एचएमएस के बर्नपुर शाखा महासचिव मुमताज अहमद ने बताया कि विगत वर्ष कर्मचारियों की बोनस राशि 7000 थी। मगर उसे तीन किश्तों में दिया गया था। पहले 5400 रुपये उसके बाद उसी माह में ही 800 रुपये तथा दूसरे महीने में 800 रुपये दिये गये थे। मगर आईएसपी प्रबंधन के भूल के कारण सिर्फ 6200 रुपये का ही रिकार्ड SAIL के पास भेजा गया था। श्री अहमद ने कहा कि SAIL द्वारा इस वर्ष सभी इस्पात संयंत्र को 300 रुपये बढ़ा कर दिये गये है। श्री अहमद ने कहा कि हमारी मांगों के समर्थन में जो ज्ञापन सौंपा गया है। उसे प्रबंधन ने स्वीकार कर लिया है। इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठा कर लिया है और फिर से नया रिकार्ड भेजने का आश्वासन दिया है। ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान सीटू के महासचिव विमल दत्ता, इंटक के महासचिव हरजीत सिंह, बीएमएस के महासचिव रामहिलिस राय, एचएमएस के मुमताज अहमद, एटक के उत्पल सिन्हा ने भी मौजूद होकर कम बोनस की राशि का विरोध किया एवं इसे बढ़ाने की मांग की।

25 September, 2008

सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतनमान पर राव समिति की रिपोर्ट मंजूर नहीं

 सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन पर सिफारिश देने के लिए गठित समिति के सुझावों पर हाल-फिलहाल में फैसला होने की संभावना टलती नजर आ रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के सर्वोच्च संगठन स्कोप (Standing Conference of Public Enterprises) ने ही समिति की सिफारिशों को कठघरे में ला दिया है। स्कोप ने कहा है कि न्यायाधीश एमजे राव की अध्यक्षता वाली समिति ने सभी वर्गो के कर्मचारियों और अधिकारियों को एक ही आधार पर वेतन वृद्धि का सुझाव दिया है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

स्कोप ने कहा है कि वैसे तो राव समिति की सिफारिशों को लागू करने से पीएसयू कर्मियों के वेतन में वृद्धि होगी,लेकिन वक्त की मांग को देखते हुए यह वृद्धि उपयोगी नहीं कही जा सकती है। मुद्दे को आगे ले जाते हुए स्कोप ने अपने सभी सदस्यों से सुझाव मंगवाए हैं। इन सुझावों के आधार पर संगठन लोक उपक्रम विभाग और भारी उद्योग मंत्रालय के साथ वेतन संशोधन पर नए सिरे बातचीत शुरू करने की योजना बना रहा है। स्कोप के मुताबिक आज के दौर में आय,कर्मचारियों की संख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर ही वेतन वृद्धि कर देना पर्याप्त नहीं है। स्कोप इस बारे में सभी नवरत्न कंपनियों को 'ए प्लस' श्रेणी में रखने के पक्ष में है ताकि इनको अपने बेहतरीन कर्मचारियों को निजी क्षेत्रों के हाथों में चले जाने से रोकने में सहूलियत हो।

स्कोप का कहना है कि यह अर्थव्यवस्था के हित में है कि अच्छा प्रदर्शन करने वाली सरकारी कंपनियों और निजी क्षेत्र के वेतनमान में बहुत ज्यादा अंतर नहीं हो। राव समिति की सिफारिशों को लागू करने के बावजूद अंतर बना रहेगा। स्कोप का सुझाव है कि सरकार की वेतन वृद्धि की नीति इस प्रकार की होनी चाहिए कि व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर हमेशा ही इसमें बढ़ोतरी की संभावना बनी रहे। साथ ही सरकारी कंपनियों के प्रबंधन को यह अधिकार होना चाहिए कि वह वेतनमान में परिस्थितियों के मुताबिक संशोधन कर सके।

थोड़ी और जानकारी यहाँ

24 September, 2008

छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों और पेंशनरों को अंतरिम राहत का आदेश

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों को अंतरिम राहत देने के आदेश जारी कर दिए हैं। मीडिया सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने 18 सितम्बर 2008 के संकल्प के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनरों को एक सितम्बर 2008 से क्रमश: 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत अंतरिम राहत स्वीकृत करने के आदेश जारी कर दिए हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार कर्मचारियों को सितम्बर 2008 का वेतन जो अक्टूबर माह में देय होगा उसके साथ मूल वेतन और महंगाई वेतन की 20 प्रतिशत राशि अंतरिम राहत के रूप में दी जाएगी। यह अंतरिम राहत किसी भी सेवा लाभ अर्थात मकान किराया भत्ता, प्रतिपूर्ति भत्तों, वेतन निर्धारण, अवकाश नकदीकरण, पेंशन, ग्रेच्यूटी आदि की संगणना के लिए वेतन भत्ते या मजदूरी के रूप में नहीं गिनी जाएगी।

अंतरिम वेतन की राशि का समायोजन पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर्स से किया जाएगा। पेंशनरों को सितम्बर 2008 की पेंशन जो अक्टूबर में देय है उसमें मूल पेंशन और महंगाई पेंशन की 10 प्रतिशत राशि अंतरिम राहत में रूप में दी जाएगी।

17 September, 2008

केंद्र सरकार ने महिला कर्मचारियों को दोहरा तोहफा दिया

केंद्र सरकार ने अपनी महिला कर्मचारियों को दोहरा तोहफा दिया है। महिलाओं की मैटरनिटी अवकाश तो बढ़ाया गया ही है , साथ ही बच्चों की देख-भाल करने के लिए दो साल की सवेतन अवकाश देने का फैसला भी किया है। यह नियम 1 सितंबर से लागू होगा।

कुछ ख़ास बातें हैं:
  • महिला कर्मचारियों को 2 बच्चों के लिए 135 दिनों की जगह 180 दिनों की मैटरनिटी अवकाश मिलेगा
  • बच्चों की देख-भाल के लिए पूरे सेवाकाल में कभी भी दो साल (730 दिन) की सवेतन अवकाश ले सकेंगी।
  • शिशु लालन-पालन अवकाश में कर्मचारी की वरिष्ठता भी प्रभावित नहीं होगी।
  • एक बच्चा हो तो भी ले सकते हैं दो साल की छुट्टी। खास बात यह कि ये छुट्टियां मैटरनिटी अवकाश से अलग होंगी।
  • इस तरह अगर दोनों छुट्टियां साथ ली जाएं, तो एक साथ ढाई साल तक बच्चों के साथ रह सकती हैं।
  • महिलाएं ये छुट्टियां बच्चों के 18 साल के होने तक कभी भी ले सकेंगी। वजह कोई भी हो सकती है, बच्चों के इम्तिहान हों या उनकी बीमारी।

16 September, 2008

सितम्बर के वेतन के साथ अंतरिम राहत

मध्य प्रदेश शासन के कर्मचारियों तथा अधिकारियों को छठवें वेतनमान के अंतर्गत बीस प्रतिशत अंतरिम राहत सितम्बर के वेतन के साथ जुड़कर मिलेगी। वित्त विभाग ने इस सम्बंध में सोमवार को आदेश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश में मूल वेतन तथा महंगाई वेतन की बीस प्रतिशत राशि अंतरिम राहत के रूप में दी जाएगी।

आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अंतरिम राहत की यह राशि न तो वेतन के रूप में समझी जाएगी और न ही भत्ते या मजदूरी के रूप में। यह राशि किसी भी सेवा लाभ अर्थात मकान किराया भत्ता, प्रतिपूर्ति भत्तों, वेतन नियमन, अवकाश नदगीकरण, पेंशन एवं ग्रेच्युटी आदि की संगणना करने के लिए नहीं गिनी जाएगी। अंतरिम राहत की राशि का समायोजन पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर से दिया जाएगा। यह राशि वेतन मद से विकलनीय होगी।

13 September, 2008

एरियर पर आयकर में कमी संभव!

सरकारी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर यह है कि उनके एरियर पर आयकर बोझ हल्का हो सकता है। इसके लिए विभाग ने आयकर की धारा 89-1 का विकल्प चुनने का अधिकार दिया है। लेकिन यह फैसला किसी भी कर्मचारी के लिए अपनी इच्छा पर ही आधारित होगा।

वहीं दूसरी ओर चालू वित्त वर्ष के दौरान पूरे अथवा 40 फीसदी एरियर पर टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) को लेकर आयकर विभाग को वर्ष 1999 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी एक फैसला हाथ लगा है। इस फैसले के जरिए पूरे एरियर को टैक्स के दायरे में लाने का पक्ष लिया गया है। जहां तक एरियर के मामले में टैक्स बोझ हल्का करने की बात है, उसके लिए धारा 89-1 का विकल्प सामने है। इसके तहत चालू वित्त वर्ष सहित पिछले तीन वित्त वर्ष के दौरान बगैर एरियर और एरियर सहित आयकर बोझ निकाला जाएगा।

इन सभी सालों के लिए एरियर सहित टैक्स बोझ में एरियर रहित टैक्स बोझ को घटा दिया जाएगा। चालू वित्त वर्ष के दौरान हासिल अंतर में पिछले तीन सालों के अंतर को जोड़कर घटा दिया जाएगा। इससे प्राप्त राशि को चालू वित्त वर्ष में देय समग्र टैक्स में घटाया जाएगा। यही देय टैक्स होगा।

यह रास्ता इसलिए अपनाया जा रहा है क्योंकि बीते सालों में सरकारी नहीं अदा की गई देय राशि पर ब्याज लागू न किया जाए, अन्यथा इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय माना जाएगा। इस प्रकार की गणना से बहुत से कर्मचारी आयकर दर के ऊंचे स्लैब में जाने और अधिभार यानी सरचार्ज देने से बचने की संभावना बनेगी।

वहीं दूसरी ओर आयकर विभाग के हाथ सुप्रीम कोर्ट की ओर से 26 अक्टूबर, 1999 को जारी एक फैसला हाथ लगा है। इसके मुताबिक पेबल यानी देय राशि की व्याख्या आयकर कानून की मंशा के मुताबिक ही की गई है। मतलब यह एरियर चाहे वह किसी खास वर्ष में अदा किया गया हो अथवा नहीं, उसी खास वर्ष के दौरान ही कर दायरे में ही आएगा।
(दैनिक हिन्दुस्तान में विकास द्विवेदी की शब्दश: रिपोर्ट)

11 September, 2008

दिल्ली नगर निगम, छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर रहा

दिल्ली नगर निगम अपने अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए छठे वेतन आयोग की सिफारिशें पहली सितम्बर 2008 से लागू कर रहा है। स्थायी समिति के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने स्थायी समिति की बैठक में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम पूरे भारत में पहला ऐसा स्थानीय निकाय है जो छठे वेतन आयोग की सिफारिशें सबसे पहले लागू करने जा रहा है।

श्री गुप्ता ने बताया कि ये सिफारिशें एक जनवरी 2006 से लागू होगी लेकिन इस साल बकाया राशि का 40 फीसद ही दिया जाएगा। जबकि अगले साल बाकी रकम दी जाएगी।

10 September, 2008

फिलहाल 20 प्रतिशत अंतरिम राहत

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को एक सितम्बर से छठा वेतनमान देने का निर्णय मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। कर्मचारियों का वेतनमान जब तक फाइनल नहीं होगा तब तक उन्हें वेतन व महंगाई भत्तो का बीस फीसदी अंतरिम राहत दिया जाएगा। अंतरिम राहत सितम्बर का अक्टूबर माह में मिलने वाले वेतन में ही दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सम्पन्न राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारियों को छठा वेतनमान देने का मामला आनन फानन में एक्स एजेंडा के रूप में लाया गया। छठे वेतनमान के संबंध में राज्य सरकार की पूरी तैयारी न होने के कारण एक मुश्त बीस फीसदी अंतरिम राहत देने का निर्णय लिया गया।