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24 June, 2009

कोल इंडिया में अब अधिकतम 10 लाख रुपए तक ग्रेच्युटी

कोल इंडिया के कर्मचारियों और अधिकारियों को 3.50 लाख की जगह अब अधिकतम 10 लाख रुपए तक ग्रेच्युटी मिलेगी। इससे पहले यह सीमा साढ़े तीन लाख तक की थी। इससे कोल इंडिया के 4.50 लाख और एसईसीएल के करीब 80 हजार कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।

कोल इंडिया के अफसरों की तनख्वाह बढ़ाने के महीने भर बाद ही कर्मचारियों और अधिकारियों को दूसरी सौगात मिली है कि ग्रेच्युटी की राशि करीब तीन गुना बढ़ा दी गई है। पूर्व में रिटायरमेंट या अन्य किसी कारण से सेवामुक्त होने पर कर्मचारियों को उनकी उपस्थिति के आधार पर अधिकतम साढ़े तीन लाख रुपए तक ग्रेच्युटी दी जाती थी। राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता-8 के अंतर्गत अब यह राशि अधिकतम 10 लाख तक मिलेगी।

कोल इंडिया से इस आशय के बारे में आदेश, प्रबंधन को मिल गए हैं। भविष्य में जो भी कर्मचारी या अधिकारी सेवामुक्त या फिर सेवानिवृत्त होंगे, उन्हें ग्रेच्युटी एक्ट के प्रावधानों को पूरा करने पर नए नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी की राशि मिलेगी। उल्लेखनीय है कि कोल इंडिया ने अफसरों की तनख्वाह 30 फीसदी तक बढ़ाने का आदेश माह भर पूर्व जारी किया था।

उन्हें 1 जनवरी 2007 से एरियर्स दिया जाएगा। इसके बाद यह फैसला उनके लिए दूसरी सौगात होगा।

05 January, 2009

कोयला कर्मचारियों की मौजाँ ही मौजाँ

कोयला कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन अब 9345 रुपए होगा, पहले यह 5500 रुपए था। नया साल उनके लिए 24 प्रतिशत वेतन वृद्धि की सौगात लेकर आया है। लगभग दोगुने की वृद्धि हो गई है। पुराने कर्मियों को इसका और अधिक लाभ मिलेगा। जिसका जितना वेतन है उसमें 24 प्रतिशत की वृद्धि हो जाएगी। वेतन में मूल वेतन, व्हीडीए, एसडीए अटेंडेस बोनस की राशि शामिल रहती है। इसे जोड़कर जो ग्रॉस आएगा, उसमें 24 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।

यह ऐतिहासिक निर्णय हैदराबाद में कोल इंडिया चेयरमेन पार्थो भट्टाचार्य व जेबीसीसीआई में शामिल पांचों श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों के बीच बनी सहमति पर हुआ। इस निर्णय के बाद श्रमिक संगठनों ने 5 जनवरी से प्रस्तावित हड़ताल वापस ले ली है। कोयला कर्मचारियों के वेतन समझौते की अवधि को लेकर खड़ा हुआ विवाद दूर होते ही प्रबंधन व श्रमिक संगठनों ने वेतन वृद्धि पर निर्णय लिया। पूर्व में वेतन समझौता पांच तथा दस वर्ष की अवधि के लिए किए जाने पर मत भिन्नता थी। जेबीसीसीआई में शामिल श्रमिक संगठन एटक, सीटू, इंटक, बीएमएस व एचएमएस के पदाधिकारियों में वेतन समझौता पांच वर्ष किए जाने का निर्णय लिया।

हैदराबाद में वेतन निर्धारण के लिए 2 जनवरी से तीन दिवसीय बैठक शुरू हुई। 2 जनवरी के पहले दिन आम सहमति नहीं बनी। 3 जनवरी को वेतन निर्धारण पर ही चर्चा केंद्रित रही। जिसका परिणाम यह सामने आया कि 30 जून 2006 को जिस कर्मचारी की जितनी तनख्वाह थी, उसमें 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। नए कर्मचारियों का न्यूनतम वेज 9344-64 रुपए निर्धारित किया गया है। पहले होता यह था कि नए पुराने कर्मियों को वृद्धि का एक साथ लाभ मिलता था, दोनों में कोई अंतर नहीं रह जाता था। इस बार दोनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था लागू हो जाएगी।

कर्मचारियों का आठवां वेतन समझौता 30 जून 2006 से लंबित है। अभी सुविधाएं सातवें के अनुरूप मिल रही है। आठवें के लिए 15 प्रतिशत अंतिम राहत दी जा रही है। कोल इंडिया में कर्मचारियों की संख्या 4 लाख है जिसमें से एसईसीएल सिरमौर कंपनी है। उसके 83 हजार कर्मचारी इस वेतन समझौते से लाभान्वित होंगे।

19 April, 2008

कोल इंडिया ने अंतरिम राहत का आदेश दिया

कोल इंडिया ने कामगारों को अंतरिम राहत (आइआर) पेमेंट करने संबंधी आदेश भेज दिया है। कंपनी के डीपी आर मोहन दास ने सभी कंपनियों के सीएमडी को इस बाबत पत्र भेजा है। इसमें 30 जून 06 के बेसिक पर 15 प्रतिशत की दर से भुगतान करने को कहा गया है। मई में होने वाले अप्रैल के पेमेंट से इसे दिया जायेगा।

इस राशि को सैलरी सीट में अलग से दर्शाने का निर्देश भी दिया गया है। जुलाई 06 से मार्च 08 तक के एरियर का भुगतान दो किस्त में करने को कहा गया है। पहला दुर्गा पूजा से पहले एवं दूसरा 31 जनवरी 09 तक। भुगतान की तिथि बाद में घोषित करने की बात कही गयी है। दी जाने वाली राशि पर दो फीसदी की दर से सीएमपीएफ-पीएफ काटने की बात भी कही गयी है। ग्रेच्युटी और लीव बेनीफीट एवं अन्य वैधानिक कटौती भी की जायेगी। इस राशि पर अन्य भत्तों की गणना नहीं होगी। यह राशि एनसीडब्ल्यूए-8 के फाइनल एग्रीमेंट के बाद एडजस्ट भी की जायेगी। उक्त आदेश के आलोक में सीसीएल के डीजीएम धु्रव कुमार ने सभी सीजीएम, जीएम एवं संबंधित अधिकारी को सूचित कर दिया है।

कोयला कामगारों के वेतन समझौते की अवधि भी बढ़ती गयी। शुरू में यह चार साल की अवधि के लिए ही होता था। शुरुआती तीन समझौतों तक यह जारी रहा। इसके बाद श्रमिक प्रतिनिधि की सहमति से प्रबंधन ने इसकी अवधि बढ़ाकर साढ़े चार वर्ष कर दी। तुरंत बाद इसकी अवधि बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गयी। सातवें वेतन समझौते से प्रबंधन दस साल का एग्रीमेंट करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि श्रमिक प्रतिनिधि इस पर सहमत नहीं हो रहे हैं। प्रतिनिधियों का कहना है कि कम अवधि का वेतन समझौता कामगार हित में होता है। इस बार प्रबंधन के साथ कुछ कामगार भी दस साल का वेतन समझौता चाह रहे हैं। हालांकि श्रमिक संगठन पांच साल के समझौते का अल्टीमेटम भी दे चुके हैं।

21 March, 2008

कोल इंडिया बनाएगी प्रोन्नति स्कीम

कोल इंडिया अधिकारियों की प्रोन्नति के लिए एक विशेष स्कीम बनाएगी। इसी के तहत सभी अधिकारियों को प्रोन्नति दी जाएगी। यह आश्वासन कोल इंडिया के अध्यक्ष पार्थो भट्टाचार्य ने बुधवार, १९ मार्च को कोलकाता में मिलने गए कोल माइंस आफिसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के प्रतिनिधिमंडल को दिया। प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान कई मांगें रखी।

प्रोन्नति के सवाल पर श्री भट्टचार्य ने कहा कि इस मुद्दे पर शीघ्र ही एक विशेष स्कीम बनाई जाएगी। उसी के तहत अधिकारियों को प्रोन्नति दी जाएगी। कोलकाता से लौटे एसोसिएशन के केंद्रीय महासचिव केपी सिंह ने बताया कि अब ई वन से लेकर ई पांच तक के अधिकारियों का डीपीसी अप्रैल में तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद उन्हें प्रोन्नति दे दी जाएगी। प्रतिनिधिमंडल ने कोल इंडिया अध्यक्ष से कहा कि ई तीन में पांच तथा ई पांच में सात वर्षो से कार्यरत अधिकारियों को तत्काल प्रोन्नति दी जाए, जिससे प्रोन्नति में जो ठहराव आया है, वह दूर हो जाए। इस मुद्दे पर भी कोल इंडिया अध्यक्ष ने शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया। श्री सिंह ने बताया कि सीएमडी मीट में कलस्टर प्रोन्नति को हरी झंडी दे दी गई है। पहले इस पर रोक लगाई गई थी। इससे कई अधिकारियों की प्रोन्नति का रास्ता साफ हो जाएगा।

दी झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन ने कोल इंडिया अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की है कि कर्मचारियों को अंतरिम राहत नहीं चाहिए। अंतरिम राहत के स्थान पर एडहाक पेमेंट का भुगतान किया जाए। इसके अलावा कोयला उद्योग के अधिसंख्य कर्मचारी दस वर्षो के वेतन समझौते के पक्ष में हैं। इसलिए प्रबंधन दस वर्षो का वेतन समझौता करने के साथ ही कर्मचारियों का न्यूनतम वेतनमान 27 हजार रुपये करे। यदि ऐसा नहीं होता है तो कोयला कर्मचारियों के साथ अन्याय होगा।

10 March, 2008

कोल इंडिया में 50 फीसदी डीए, मूल वेतन में जुडा

कोल इंडिया ने कोयला कर्मियों को होली का तोहफा देते हुए 50 फीसदी डीए मर्जर को हरी झंडी दे दी है। इससे कोल इंडिया के सभी अधिकारी लाभान्वित होंगे। यही नहीं, अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लगने वाले परक्यूजिट टैक्स का भुगतान अब कोल इंडिया स्वयं करेगी। यह निर्णय शनिवार को कोल इंडिया के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बोर्ड ने चिकित्सा सुविधा के लिए बनाई गई स्कीम को भी अपनी मंजूरी दे दी है। बोर्ड ने इसे पहली जनवरी 2007 से लागू करने का निर्णय लिया है।

केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय ने गत 26 फरवरी को यह आदेश जारी किया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के अतंर्गत लाभ कमाने वाली कंपनियां अपने अधिकारियों को 50 फीसदी डीए मर्जर को लागू कर सकती हैं, लेकिन इसके लिए बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की मंजूरी लेनी होगी।

मंत्रालय ने यह शर्त भी जोड़ दी थी कि इसके लिए केंद्र सरकार कोई बजटरी सपोर्ट नहीं करेगी। मंत्रालय के आदेश जारी किए जाने के बाद कोल इंडिया के अधिकारी इसको लागू करने के लिए लगातार दबाव बना रहे थे। कोल माइंस आफिसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के केंद्रीय महासचिव केपी सिंह ने बताया कि कोल इंडिया ने इसे लागू कर अधिकारियों के हित में काफी अच्छा काम किया है। इसका लाभ अधिकारियों को सभी प्रकार की सुविधाओं में मिलेगा। बोर्ड ने इसे पहली जनवरी 2007 से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा परक्यूजिट टैक्स को लेकर भी कर्मचारी तथा अधिकारी लगातार कोल इंडिया पर दबाव बनाए हुए थे।

परक्यूजिट टैक्स कर्मियों के आवासों पर लगने वाला कर है, जिसे बोलचाल की भाषा मैं हाउस पर्क कहा जाता है। कोल इंडिया इसे स्वयं वहन करेगी। साथ ही अधिकारियों की चिकित्सा सुविधा में निर्णय लेते हुए बोर्ड ने कहा है कि अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद कंपनी पांच लाख रुपये तक चिकित्सा सुविधा प्रदान करेगी। इसके साथ ही सामान्य रूप से होने वाली बीमारियों में मिलने वाले पेंशन की समतुल्य राशि का वहन करेगी, लेकिन इसके लिए अधिकारियों को सेवानिवृत्त होने के बाद 40 हजार रुपये जमा करने होंगे। श्री सिंह ने बताया कि यह कोयला उद्योग के कर्मचारियों के लिए काफी लाभकारी है। सेवानिवृत्त होने के बाद अधिकारी किसी भी अस्पताल में इलाज करवा सकते हैं। इस सुविधा के लिए लंबे समय से लड़ाई लड़ी जा रही थी, लेकिन अब जाकर यह यह सपना साकार हुआ है।