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15 January, 2008

बॉस से इज्जत, कर्मचारी की खुशी

एशियाई देशों में करवाए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत और चीन के कर्मचारी बॉस द्वारा इज्जत दिए जाने को वेतन से बड़ा प्रेरक तत्व मानते हैं और ऐसा किए जाने की स्थिति में उनकी उत्पादक क्षमता बढ़ जाती है।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार ‘मरसर’ नामक कम्पनी ने भारत, चीन, जापान, सिंगापूर और दक्षिण कोरिया में करवाए गए एक सर्वेक्षण में पाया कि भारत के कर्मचारी वेतन से ज्यादा नौकरी से होनी वाली व्यक्तिगत उन्नति और भविष्य में करियर पर पड़ने वाले प्रभाव को महत्व देते हैं।

मरसर के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख राजन श्रीकांत के अनुसार, “सर्वेक्षण से यह साफ हो गया कि एशिया के कर्मचारी काम करने वाली जगहों पर इज्जत चाहते हैं।”

इसके उलट सिंगापूर और दक्षिण कोरिया में काम करने वालों के लिए वेतन ज्यादा मायने रखता है और जापान के कर्मचारियों के लिए यही सबसे बड़ा प्रेरक तत्व है।

श्रीकांत के अनुसार नियोक्ता अगर कर्मचारियों की बात सुनें और उन्हें इस बात का एहसास दिलाएं कि संस्था उनकी भूमिका को तवज्जो देती है तो यह कर्मचारियों को नौकरी में बनाए रखने में सहायक साबित हो सकता है।

09 January, 2008

अब कर्मचारी देंगे बॉस की रिपोर्ट! सावधान

अब आप अपने बॉस की पीठ पीछे शिकायत करने की बजाय कुछ और भी कर सकेंगे। कर्मचारियों को भी यह हक होगा कि वे अपने बॉस के काम का मूल्यांकन कर सकें।

आमतौर पर दफ्तरों में हर साल जनवरी से अप्रैल महीने में कर्मचारियों के काम का मूल्यांकन किया जाता है। भारतीय कंपनियों में अब दोतरफा मूल्यांकन की पद्धति लागू किए जाने पर विचार चल रहा है। इसके तहत अब कर्मचारी भी यह बता सकेंगे उन पर रौब जमाने वाले बॉस का काम उन्हे कैसा लगता है।

'लायनब्रिज इंडिया' के उपाध्यक्ष और महाप्रबंधक रॉबिन लॉयड ने बताया कि ऐसा कर हम टीम को और मजबूत बनाना चाहते है। आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी 'एडोब' का मानना है कि जब कर्मचारी अच्छा काम नहीं करते है तो यह भी संभव है कि बॉस भी ढंग से काम नहीं कर रहा हो। कंपनी के मानव संसाधन विभाग (एचआर) की निदेशक अपर्णा बालाकुर ने कहा कि बॉस के बारे में कर्मचारियों की अलग-अलग राय हो सकती है। इस पद्धति से हमें उनके मूल्यांकन का रास्ता मिल जाएगा।

कुछ कंपनियों में तो एचआर के व्यक्ति की उपस्थिति में कर्मचारी और उनके बॉस के कामों का मूल्यांकन किया जाता है। उस दौरान यह भी चर्चा की जाती है कि बॉस की क्या-क्या कमियां है। सामान्यत: कंपनियों में बॉस के काम पर अपनी राय देने के लिए सर्वेक्षण किया जाता है, जिसमें कर्मचारियों से प्रश्नावली भरवाई जाती है। कई दफा हर कर्मचारी से अलग-अलग राय भी ली जाती है।

08 December, 2007

नाकाबिल बॉस को अयोग्य एंप्लॉई ही अच्छे लगते हैं

न्यूयार्क में की गयी एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि जिस बॉस में योग्यता की कमी होती है, वह अयोग्य एंप्लॉई को तरजीह देता है। रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने जॉब को उचित ठहराने के लिए ऐसे बॉस कम योग्य एंप्लॉईज के बीच काम करना पसंद करते हैं।

इंटरनैशनल रिसर्चरों की एक टीम स्टडी के बाद इस नतीजे पर पहुंची। रिसर्चरों ने पाया कि जिन लोगों को लगता है कि मैं अपने जॉब के अनुसार योग्यता नहीं रखता, वे अयोग्य या कम सक्षम एंप्लॉईज से घिरे रहना चाहते हैं। साइंस डेली ने रिसर्चर रोजा के हवाले से अपनी रिपोर्ट में ऐसे बॉस की मानसिकता के बारे में बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक- कम योग्य एंप्लॉईज के बीच काम करने की इस प्रवृति के पीछे वजह यह होती है कि ऐसे लोग किसी मातहत को अपना प्रतियोगी बनने नहीं देना चाहते। टीम ने कुल मिलाकर यही पाया कि योग्य इग्जेक्युटिव ही सक्षम सहयोगियों के साथ काम करने को तरजीह देते हैं।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेनेडा और बेल्जियम की यूनिवर्सिटी ऑफ लोवैनिया के रिसर्चरों ने इस नतीजे पर पहुंचने से पहले 73 वॉलंटियर स्टूडेंट्स के एक ग्रुप का विश्लेषण किया। इनमें 18 से 25 साल से बीच की उम्र की महिलाएं बहुमत में (80 फीसदी से ज्यादा) थीं। स्टडी में शामिल लोगों को कुछ अधिकार दिए गए और उनका इस्तेमाल करने को कहा गया। उनसे कहा गया कि आप स्टूडेंट्स की कॉन्फ्रेंस में नुमाइंदगी करेंगे और वहां सीधे अपने मातहत के रूप में काम करने के लिए पार्टनर चुन सकते हैं।

इन स्टूडेंट्स को दो समूहों में बांट दिया गया था। आधे स्टूडेंट्स को बताया कि अपने काम के लिए उन्हें उचित अधिकार दिए गए हैं, जबकि बाकी आधे स्टूडेंट्स से कहा गया कि आपको अपना काम बिना किसी अधिकार के अंजाम देना है। इन सबके पास अपने मातहत के रूप में काफी सक्षम से लेकर कम योग्य कैंडिडेट को चुनने का विकल्प मौजूद था। जब मातहत चुनने की बारी आई, तो अधिकार प्राप्त स्टूडेंट्स और बिना अधिकार वाले स्टूडेंट्स के बीच साफ फर्क दिखा। बिना अधिकार वाले बॉसेज ने अधिकार प्राप्त बॉसेज की तुलना में बड़ी संख्या में अयोग्य मातहत चुने।