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27 February, 2009

केंद्रीय कर्मचारियों का DA 6 फीसदी बढ़ा

लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 फरवरी को, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारियों के महंगाई भत्ते (DA) में छह फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। केंद्र के इस फैसले से केंद्रीय खजाने पर 6,020 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अनुपस्थिति में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि महंगाई भत्ते (DA) में की गई वृद्धि एक जनवरी 2009 से प्रभावी होगी। इसका भुगतान एक मार्च से किया जाएगा।

चिदंबरम के मुताबिक अगले वित्त वर्ष 2009-10 में 5149 करोड़ रुपये और जनवरी से लेकर कुल 15 महीनों के लिए 6020 करोड़ रुपये का बोझ आएगा। देश में करीब 40 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 30 लाख पेंशनधारी हैं।

11 February, 2009

रिजर्व बैंक के कर्मचारी 20 फरवरी को देश भर में एक दिन की हड़ताल पर

नई पेंशन योजना को बहाल करने समेत अपनी तमाम मांगों को लेकर रिजर्व बैंक के कर्मचारी 20 फरवरी को देश भर में एक दिन की हड़ताल पर करेंगे। सीजीएम से लेकर चौथे दर्जे के कर्मचारियों के काम न करने से इस दिन केंद्रीय बैंक द्वारा किए जाने वाले भुगतानों पर असर पड़ेगा।

अखिल भारतीय रिजर्व बैंक कर्मचारी संघ के सचिव के के शर्मा ने इस हड़ताल की मुख्य वजह वित्ता मंत्रालय की ओर से केंद्रीय बैंक द्वारा जारी एक आंतरिक सर्कुलर को बताया है। इसमें नवंबर 1997 से पूर्व सेवानिवृत्ति पाने वालों से नई पेंशन योजना को वापस लेने की बात कही गई है। सर्कुलर में आरबीआई के रिटायर हो चुके कर्मचारियों की पेंशन में भारी कमी की घोषणा की गई है। पिछले साल अक्टूबर में भी केंद्रीय बैंक के कर्मचारियों ने इसी मुद्दे पर देशव्यापी हड़ताल की थी।

20 August, 2008

छत्तीसगढ़ के ढ़ाई लाख अधिकारी-कर्मचारी करेंगे हड़ताल

छत्तीसगढ़ में छठवें वेतन आयोग की अनुशंसा लागू करने की मांग को लेकर राज्य के करीब ढ़ाई लाख कर्मचारी 21 अगस्त को हड़ताल करेंगे। छत्तीसगढ़ प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष ने बताया है कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में राज्य के सभी कर्मचारी, अधिकारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से केन्द्रीय कर्मचारियों की भांति राज्य के कर्मचारियों को छठवें वेतन भत्ते स्वीकृत करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में 21 अगस्त 2008 को प्रदेशव्यापी एक दिवसीय हड़ताल रखी गई है जिसमें मंत्रालय से लेकर विकासखंड स्तर तक सभी कार्यालय तथा शैक्षणिक संस्थाएं बंद रहेंगे।

16 July, 2008

पंजाब सरकार के कर्मियों व पेंशनरों का डीए छह फीसदी बढ़ा

पंजाब सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को प्रारम्भिक वेतन और डीपी पर महंगाई भत्ता 41 प्रतिशत से बढ़ाकर 47 प्रतिशत कर दिया है। इसका भुगतान पहली जनवरी, 2008 से किया जाएगा। एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि पहली जनवरी, 2008 से 31 जुलाई, 2008 तक का बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता कर्मचारियों के जीपीएफ में जमा कर दिया जाएगा जबकि पहली अगस्त, 2008 से महंगाई भत्तो की किश्त नकद दी जाएगी।

पेंशनरों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता पहली जनवरी, 2008 से नकद दिया जाएगा। पहली जनवरी, 2004 को या इसके बाद कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम के तहत नौकरी में आए कर्मचारी, जिनका टायर-2 योजना के तहत खाता नहीं खुला, उन कर्मचारियों के नाम पर विभाग पंजाब राज्य के डाकखानों से राष्ट्रीय बचत सर्टिफिकेट/किसान विकास पत्रों की खरीद करेगा। इस संबंधी सभी विभागाध्यक्षों, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, जिला व सेशन जजों तथा राज्य के डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश भेज दिए गए हैं।

बंदरगाह कर्मचारी हड़ताल पर

आज, 16 जुलाई से देश के ग्यारह बंदरगाह के कर्मचारी हड़ताल पर जाने वाले हैं। इससे पहले कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों और परिवहन और नौपरिवहन मंत्री टी।आर बालू के बीच बातचीत हुई लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला।

इन कर्मचारियों की मांग है कि उनके वेतन में 13.5 फीसदी की बढ़ोतरी हो, उनका बोनस बढ़ाया जाए और इसके साथ ही उनको 50 फीसदी महंगाई भत्ता भी दिया जाए। इसके अलावा बची हुई नौकरियों को जल्द से जल्द लोगों को देने की मांग भी की जा रही है।

23 April, 2008

LTC में अब टूर पैकेज शामिल

गर्मियों की छुट्टियों में सैर सपाटे का मौसम शुरू होने से ठीक पूर्व केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को तोहफा दिया है। केन्द्र के नए दिशानिर्देशों के तहत अब सरकारी कर्मचारियों के लिए यात्रा अवकाश रियायत (Leave Travel Concession) में टूर पैकेजों को भी शामिल किया गया है इसके तहत केन्द्रीय कर्मचारी सरकारी एजेंसियों द्वारा तैयार किए जाने वाले टूर पैकेज ले सकेंगे और इस मद में व्यय हुई राशी को LTC के तहत क्लेम कर सकेंगे अभी तक यह सुविधा उन्हें हासिल नहीं थीं

गर्मियों में स्कूलों में छुट्टियाँ होने के कारण ज्यादातर कर्मचारी मई-जून में एलटीसी की सुविधा लेते हैं। जिसके चलते 30-40 फीसदी कर्मचारी गर्मियों में छुट्टियों पर चले जाते हैं। यह नई सुविधा जोड़े जाने से प्रतिशत और बढ़ेगा। केंद्र की इस पहल का लाभ राज्यों को भी मिलेगा। मूलत: राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के लिए केंद्र के अनुरूप नियम बनाती हैं। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी एक ताजा आदेश के अनुसार केंद्रीय कर्मचारी भारतीय पर्यटन विकास निगम (Indian Tourist Development Corporation) , राज्य पर्यटन विकास निगम (State Tourist Development Corporation) तथा भारतीय रेलवे कैटरिंग तथा पर्यटन विकास निगम (Indian Railway Catering and Tourist Development Corporation) द्वारा तैयार किए जाने वाले टूर पैकेजों को भी एलटीसी में शामिल करने की सहमति प्रदान की है। कर्मचारियों से कहा गया है कि वे इन संस्थानों के टूर पैकेज लेकर एलटीसी पर जा सकते हैं लेकिन क्लेम लेते वक्त उन्हें टूर पर जाने का आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

पिछले कुछ समय से सरकार कर्मचारियों के सैर सपाटे का विशेष ध्यान रख रही है। इसके तहत कर्मचारियों को एलटीसी में हवाई यात्रा की सुविधा भी प्रदान की जा चुकी है। निचले स्तर के कर्मचारी जो रेल में प्रथम श्रेणी की यात्रा के हकदार नहीं हैं, उन्हें यह सुविधा दी गई है कि वे प्रथम श्रेणी से यात्रा कर सकते हैं, बशर्ते की स्वीकृत किराए से बाकी राशि वह खुद वहन करें। इसके साथ ही पूर्व में कर्मचारियों को पीएफ की राशि से तीर्थाटन करने की अनुमति दी जा चुकी है। लेकिन इस सब प्रक्रिया में एक ही गड़बड़ यह होती है कि ज्यादातर कर्मचारी एलटीसी का पैकेज गर्मियों की दो महीनों की छुट्टियों के दौरान लेते हैं जिस कारण 30-40 फीसदी कर्मचारियों के एकाएक छुट्टी पर जाने से सरकारी कामकाज प्रभावित होता है।

22 April, 2008

प्रधानमंत्री, उचित वेतनमान के पक्ष में

वेतन आयोग की सिफारिशों पर सरकारी कर्मियों की चिंताओं को दूर करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रशासनिक और रक्षा सेवाओं के लिए उचित वेतनमान का पक्ष लिया। हाल ही में वेतन आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रशासनिक सेवाओं के कुछ वर्गो ने रिपोर्ट की सिफारिशों पर अपनी चिंताएं जाहिर की थी।

लोक सेवा दिवस के मौके पर नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सोमवार, २१ अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि मैं चाहूंगा कि प्रशासनिक और रक्षा सेवाओं को उचित तरीके रिवार्ड मिले। उन्होंने कहा कि मेरा यह भी मानना है कि जब तक हम अपनी जनता के बेहतर हित में कुशलतापूर्वक काम करते रहेंगे, करदाता हममें किसी को भी बेहतर पारिश्रमिक देने में अनिच्छा नहीं दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मियों की शिकायतों को सुनने और उन्हें दूर करने के लिए सरकार द्वारा पहले ही एक प्रणाली शुरू की जा चुकी है।

गौरतलब है कि वेतन आयोग की सिफारिशों की आलोचना को देखते हुए सरकार ने कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय आधिकारिक समिति के गठन की पिछले सप्ताह घोषणा की थी। सिंह ने काम में सुधार के साथ कार्य की शर्तो में सुधार की वकालत करते हुए कहा सरकार अपने सभी कर्मचारियों के कल्याण के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि साथ ही मैं लोक सेवकों से उच्च स्तर के अनुशासन और मर्यादा की अपेक्षा करूंगा।

05 February, 2008

दिख सकती है वेतन बढ़ने की झलक

इस माह के अंत में पेश होने वाले बजट में केंद्रीय कर्मचारियों की पगार में बढ़ोतरी को लेकर अहम संकेत मिल सकते हैं। मार्च-अप्रैल में सौंपी जाने वाली आयोग की सिफारिशों में कर्मियों की वेतन वृद्धि की संभावना के मद्देनजर वित्त मंत्री चिदंबरम अपने बजट भाषण में उनके लिए आर्थिक प्रावधान की घोषणा कर सकते हैं। आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे लाखों कर्मियों की निगाहें वित्तमंत्री के बजट भाषण पर टिकी रहेंगी। बजट दस्तावेजों में दबी इन जानकारियों से केंद्रीय सेवाओं में लगे करीब 33 लाख कर्मचारियों की वेतन वृद्धि को लेकर अनुमान लगाया जा सकेगा।

दैनिक जागरण की खबर है कि वित्त वर्ष के लिए तैयार किए जा रहे बजट में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आर्थिक प्रावधान को भी शुमार किया जाना तय है। इसके लिए वित्तमंत्री ने तमाम संबद्ध अधिकारियों, जिनमें श्रम मंत्रालय व योजना आयोग के आला अधिकारी शामिल हैं, के साथ पिछले दिनों कई दौर की बैठकें भी की हैं। इन बैठकों के दौरान हासिल हुई जानकारियों के आधार पर वित्तीय प्रावधान को अंतिम रूप देने में वित्त मंत्रालय के अधिकारी जुट गए हैं।

भले ही छठे वेतन आयोग का पिटारा मार्च-अप्रैल में खुलने वाला हो लेकिन कर्मचारियों को अपनी तनख्वाह में बढ़ोतरी के संकेत बजट में ही मिल जाएंगे, बल्कि बजट दस्तावेज में दर्शाए गए प्रावधान से वेतन वृद्धि के अनुपात का अंदाजा लगाने में भी सहूलियत होगी। इस बीच श्रम मंत्रालय में वेतन अयोग की सिफारिशों को लेकर कयास का बाजार भी गरम है। चर्चा यह चल पड़ी है कि वेतन आयोग अब अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द दे सकता है। माना जा रहा है कि आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दे चुका है। केवल उसे सरकार को सौंपने की औपचारिकता पूरी करनी बाकी है।

29 January, 2008

वेतन हो सकता है तिगुना, केंद्रीय कर्मियों का

सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका दरकिनार करते हुए छठा वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों के लिए तीन गुना से भी ज्यादा वेतन वृद्धि की सिफारिश करने की तैयारी में है। इसी तरह उच्च पदों पर काबिज नौकरशाहों का आयोग खास ख्याल रखने वाला है। निचले स्तर के कर्मियों के पदनाम भी बदले जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक छठे वेतन आयोग के पिटारे से कर्मचारियों की तनख्वाह में सवा तीन गुना बढ़ोतरी की सिफारिश निकलने के पूरे आसार हैं। यह वृद्धि संयुक्त सचिव से नीचे के स्तर पर पदस्थ सभी केंद्रीय कर्मियों के वेतन के लिए लागू होगी।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, इसी तरह संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों को भी आयोग खुश करने में लगा है। आयोग नया वेतनमान जनवरी 2006 से लागू करने के पक्ष में है। वेतन आयोग की सिफारिशों पर अगर सरकार ने अमल किया तो संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी का मूल वेतन 60 हजार रुपये प्रतिमाह होगा। इसी तरह अतिरिक्त सचिव का मूल वेतन 70 हजार तक पहुंच जाएगा। आयोग की सिफारिश के मुताबिक सचिव स्तर के अधिकारी का मूल वेतन 75 हजार रुपये प्रतिमाह होने के आसार हैं। वहीं कैबिनेट सचिव का मासिक वेतन 80 हजार कर दिया जाएगा। इसके अलावा इन अधिकारियों के लिए मकान किराया भत्ता समेत अन्य तमाम सुविधाएं भी देने की सिफारिश आयोग ने की हैं। इनमें सीसीए और परिवहन की सुविधा शामिल हैं। इन पदों पर काबिज अधिकारियों के लिए एचआरए उनके मूल वेतन का 40 प्रतिशत से भी ज्यादा हो सकता है। इन पदों के लिए मौजूदा वेतनमानों के अनुसार संयुक्त सचिव से लेकर सचिव स्तर तक के पदों पर वेतन 40 हजार से 60 हजार तक है।

इसके अलावा वेतन आयोग केंद्र सरकार के तमाम विभागों में छोटे स्तर के कर्मचारियों के पदनाम बदलने की भी सिफारिश देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। निजी क्षेत्रों की तर्ज पर ऐसा प्रयोग करने का मूड आयोग ने बनाया है। सरकारी दफ्तरों को निजी क्षेत्र की तरह मुस्तैद करने पर जोर दे रहा वेतन आयोग चाहता है कि चपरासी पद पर बैठे व्यक्ति को लोग कार्यालय सहायक (आफिस असिस्टेंट) कहें। इसी तरह आयोग निम्न श्रेणी लिपिक (एलडीसी) पद का नाम बदल कर जूनियर एक्जीक्यूटिव और उच्च श्रेणी लिपिक (यूडीसी) पद नाम बदल कर एक्जीक्यूटिव रखने के पक्ष में है। आयोग की सोच है कि पदनाम बदलने से निश्चित रूप से कामकाज के ढंग पर कुछ सकारात्मक असर होगा।

22 January, 2008

कर्मचारी को मौखिक सबूतों पर हटाया जा सकता है

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि कोई नियोक्ता विश्वसनीय मौखिक सबूतों के आधार पर किसी कर्मचारी को दु‌र्व्यवहार का दोषी बताकर नौकरी से हटा सकता है।

न्यायालय की एक पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि यह जरूरी नहीं कि कंपनी की घरेलू जांच में भी वही मानक अपनाए जाएं जिनकी सिविल कोर्ट उम्मीद करता है।

न्यायालय ने अपने एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि किसी को दोषी ठहराने के लिए यदि सीधा कोई सबूत न हो तो परिस्थितिजन्य साक्ष्य और मौखिक सबूत पर्याप्त हैं। यह कहते हुए उसने दो कर्मियों की बर्खास्तगी को सही ठहराया।

कर्मचारी स्टीफन और उसके साथी को चोरी के आरोप में नौकरी से हटा दिया गया था। जांच अधिकारी के सामने प्रबंधन के कुछ गवाहों ने उनके खिलाफ बयान दिए। श्रम न्यायालय ने उनकी बर्खास्तगी को यह कहकर नाजायज ठहराया था कि जांच नियमानुसार नहीं की गई है लेकिन मद्रास उच्च न्यायालय ने इस निर्णय को यह कहते हुए पलट दिया कि प्रबंधन के गवाहों की गवाही विश्वसनीय है। तब इन कर्मचारियों ने इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की। उच्चतम न्यायालय ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी कि इन कर्मचारियों ने प्रबंधन के गवाहों के बयान को न तो आंतरिक जांच के समय और न ही दोबारा पुष्टि के समय चुनौती दी थी।

17 January, 2008

ऊंची उड़ान के लिए कर्मचारी का रखें ध्यान

अगर किसी कंपनी को बेस्ट परफॉरमेंस की हसरत हो, उसे अपने कर्मचारियों को अच्छे उपकरण, संसाधन और स्वायत्तता देने में परहेज नहीं करना चाहिए। इकानॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (ईआईयू) की स्टडी के नतीजे इसी तरफ इशारा कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाएं और कारोबार के प्रदर्शन के बीच सीधा संबंध है। रिपोर्ट के मुताबिक अपने कर्मचारियों को सुविधाएं देने वाले संस्थान का प्रदर्शन बेहतर होगा। नॉर्थ अमेरिका स्थित इकानॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के डायरेक्टर (रिसर्च) एन. हॉलोवे ने कहा - इस स्टडी से साफ है कि कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाओं और वित्तीय प्रदर्शन में सकारात्मक संबंध है। इसके तहत 1351 सीनियर इग्जेक्यूटिव का ऑनलाइन सर्वे किया गया। सर्वे में पाया गया कि कारोबार की सफलता और कर्मचारियों को मिलने वाले संसाधन के बीच सीधा संबंध है। इससे कर्मचारियों को सटीक फैसले लेने में मदद मिलती है और कारोबार नई ऊंचाईयों पर पहुंचता है।

स्टडी के मुताबिक, किसी भी संगठन के सबसे बड़े ऐसेट कर्मचारी होते हैं। लिहाजा कर्मचारियों के लिए कंपनी को टेक्नॉलजी आदि में निवेश करना चाहिए, ताकि उनकी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। साथ ही कर्मचारियों को प्रोत्साहित भी किया जाना चाहिए।

सांगठनिक ढांचे उपयुक्त टेक्नॉलजी और दूसरे संसाधनों के जरिए कर्मचारी ऐसे काम करते हैं, जिससे कंपनी को मुनाफा होता है। स्टडी में पाया गया कि आधी कंपनियां आईटी से लैस नहीं हैं। ऐसे में इसके समय से व प्रभावी तरीके से फैसला लेना मुमकिन नहीं है। मसलन सिर्फ 53 फीसदी कर्मचारियों ने कहा कि उनके पास जरूरी आईटी अप्लायंसेज हैं और जबकि 52 फीसदी ने कहा कि उनके पास सिर्फ और सिर्फ जरूरी जानकारियां हैं।

15 January, 2008

बॉस से इज्जत, कर्मचारी की खुशी

एशियाई देशों में करवाए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत और चीन के कर्मचारी बॉस द्वारा इज्जत दिए जाने को वेतन से बड़ा प्रेरक तत्व मानते हैं और ऐसा किए जाने की स्थिति में उनकी उत्पादक क्षमता बढ़ जाती है।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार ‘मरसर’ नामक कम्पनी ने भारत, चीन, जापान, सिंगापूर और दक्षिण कोरिया में करवाए गए एक सर्वेक्षण में पाया कि भारत के कर्मचारी वेतन से ज्यादा नौकरी से होनी वाली व्यक्तिगत उन्नति और भविष्य में करियर पर पड़ने वाले प्रभाव को महत्व देते हैं।

मरसर के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख राजन श्रीकांत के अनुसार, “सर्वेक्षण से यह साफ हो गया कि एशिया के कर्मचारी काम करने वाली जगहों पर इज्जत चाहते हैं।”

इसके उलट सिंगापूर और दक्षिण कोरिया में काम करने वालों के लिए वेतन ज्यादा मायने रखता है और जापान के कर्मचारियों के लिए यही सबसे बड़ा प्रेरक तत्व है।

श्रीकांत के अनुसार नियोक्ता अगर कर्मचारियों की बात सुनें और उन्हें इस बात का एहसास दिलाएं कि संस्था उनकी भूमिका को तवज्जो देती है तो यह कर्मचारियों को नौकरी में बनाए रखने में सहायक साबित हो सकता है।

14 January, 2008

बस 90 दिन की सैलरी और नौकरी से छुट्टी !

सरकार श्रम कानूनों में सुधार के मूड में है। सरकार ऐसा फॉर्म्युला बना रही है, जिसके तहत कंपनियां अपने कर्मचारियों को पर्याप्त मुआवजा देने के बाद उनकी छुट्टी कर सकेंगी। मुआवजा 45 से 90 दिन तक की सैलरी के बराबर हो सकता है। श्रम मंत्रालय ने सीआईआई, फिक्की और एसोचैम जैसी इंडस्ट्री की प्रमुख प्रतिनिधि संस्थाओं से ऐसे मैक्सिमम कंपन्सेशन पैकेज बताने को कहा है, जो एम्प्लॉयर अपने कर्मचारियों को देने को तैयार हों।

श्रम राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ऑस्कर फर्नांडिस ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि भी इसके समर्थन में हैं लेकिन चाहते हैं कि किसी कर्मचारी को नौकरी से हटाने पर दिया जाना वाला कंपन्सेशन 90 दिन की सैलरी के बराबर हो। इंडस्ट्रियों की प्रतिनिधि संस्थाएं 45 दिन का मुआवजा देने को तैयार हैं। मैंने कंपन्सेशन बढ़ाने को कहा है।

फर्नांडिस ने कहा कि एक बार ये श्रम सुधार लागू हो जाएं तो उद्योगों की उत्पादन क्षमता काफी बढ़ जाएगी। असंगठित क्षेत्र के कामगारों को भी फायदा होगा। देश में काम करने वाले लोगों में से सिर्फ 8 फीसदी ही ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करते हैं। ये लोग भी महसूस करते हैं कि अगर अच्छा कंपन्सेशन पैकेज मिले तो नौकरी जाने पर भी घाटे में नहीं रहेंगे।

09 January, 2008

अब कर्मचारी देंगे बॉस की रिपोर्ट! सावधान

अब आप अपने बॉस की पीठ पीछे शिकायत करने की बजाय कुछ और भी कर सकेंगे। कर्मचारियों को भी यह हक होगा कि वे अपने बॉस के काम का मूल्यांकन कर सकें।

आमतौर पर दफ्तरों में हर साल जनवरी से अप्रैल महीने में कर्मचारियों के काम का मूल्यांकन किया जाता है। भारतीय कंपनियों में अब दोतरफा मूल्यांकन की पद्धति लागू किए जाने पर विचार चल रहा है। इसके तहत अब कर्मचारी भी यह बता सकेंगे उन पर रौब जमाने वाले बॉस का काम उन्हे कैसा लगता है।

'लायनब्रिज इंडिया' के उपाध्यक्ष और महाप्रबंधक रॉबिन लॉयड ने बताया कि ऐसा कर हम टीम को और मजबूत बनाना चाहते है। आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी 'एडोब' का मानना है कि जब कर्मचारी अच्छा काम नहीं करते है तो यह भी संभव है कि बॉस भी ढंग से काम नहीं कर रहा हो। कंपनी के मानव संसाधन विभाग (एचआर) की निदेशक अपर्णा बालाकुर ने कहा कि बॉस के बारे में कर्मचारियों की अलग-अलग राय हो सकती है। इस पद्धति से हमें उनके मूल्यांकन का रास्ता मिल जाएगा।

कुछ कंपनियों में तो एचआर के व्यक्ति की उपस्थिति में कर्मचारी और उनके बॉस के कामों का मूल्यांकन किया जाता है। उस दौरान यह भी चर्चा की जाती है कि बॉस की क्या-क्या कमियां है। सामान्यत: कंपनियों में बॉस के काम पर अपनी राय देने के लिए सर्वेक्षण किया जाता है, जिसमें कर्मचारियों से प्रश्नावली भरवाई जाती है। कई दफा हर कर्मचारी से अलग-अलग राय भी ली जाती है।

31 December, 2007

वापस लिया जा सकता है अस्थायी प्रमोशन

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने व्यवस्था दी है कि किसी कर्मचारी को अस्थायी पद पर दिया गया प्रमोशन बाद में वापस भी लिया जा सकता है। जस्टिस वीके बाली और जस्टिस एलके जोशी की बेंच ने यह व्यवस्था देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उस आदेश को खारिज करने से इनकार कर दिया, जिसमें एक कर्मचारी को पदावनत कर दिया गया था। बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता का प्रमोशन किसी खास काम के लिए अस्थायी तौर पर किया गया था। इसलिए इसे वापस लेना अवैध नहीं है।

मामला यह था कि निर्मला सिंह को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हिंदी निदेशालय में ‘यूनेस्को दूत’ के संपादन के लिए अस्थायी तौर पर सृजित सीनियर प्रूफ रीडर के पद पर प्रमोशन दिया गया था। यह पद खत्म होने के बाद 1 मई, 2002 को उन्हें वापस जूनियर प्रूफ रीडर बना दिया गया। उन्हें इस पद के अनुरूप कम वेतनमान भी दिया जाने लगा। निर्मला सिंह ने इसे कैट में चुनौती दी थी। बेंच ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता ने आदेश की वैधानिकता पर सवाल कभी नहीं उठाया। उन्होंने ठोस आधार के बिना इसे सिर्फ पलटने की गुजारिश की। पदावनति का आदेश 2002 में जारी किया गया था, जबकि इसके खिलाफ याचिका 2007 में दायर की गई। याचिकाकर्ता के पास इतने लंबे वक्त तक इंतजार करने की कोई वजह नहीं थी। याचिका सिर्फ इसलिए दाखिल की गई क्योंकि इसके बाद मंत्रालय के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती थी।

25 December, 2007

अस्थायी कर्मियों के आश्रितों को पेंशन नहीं

अस्थायी कर्मचारी के आश्रित परिवार पेंशन पाने के हकदार नहीं हैं। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण [कैट] ने एक रेल मजदूर की विधवा की याचिका पर यह फैसला सुनाया।

अधिकरण की सदस्य मीरा छिब्बर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कर्मचारी की विधवा को पेंशन देने का सवाल तब पैदा होता जबकि उसके पति को स्थायी कर दिया गया होता। अस्थायी कर्मचारी का दर्जा हासिल होने से परिजन पेंशन के हकदार नहीं हो सकते। यह फैसला कुन्नू राम की विधवा सुबालया देवी की याचिका पर सुनाया गया। उसने अनुरोध किया था कि रेलवे को उसकी पारिवारिक पेंशन जारी करने के निर्देश दिए जाएं।

सुबालया ने आरोप लगाया था कि कुन्नू से कनिष्ठ दो कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया जबकि उसे टेस्ट के लिए बुलाया ही नहीं गया। रेलवे ने इस याचिका का यह कहते हुए विरोध किया था कि दिहाड़ी मजदूरों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा उनकी वरीयता के क्रम में नहीं दिया जाता। यह दर्जा दिया जाना पदों की उपलब्धता, मजदूर की योग्यता और अर्हता पर निर्भर करता है।

19 December, 2007

चयन में दखल नहीं दे सकती हैं अदालतें

भारत की सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकारी अफसरों की प्रोन्नति की प्रक्रिया में अदालतों और न्यायाधिकरणों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

न्यायमूर्ति एके माथुर और न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू की पीठ ने कहा कि आकलन करने के लिए चयन समिति पर भरोसा किया जाना चाहिए और यह अपील करने का विषय नहीं है। न्यायालय ने कहा कि इस तरह का कोई आम नियम या सख्त दिशानिर्देश नहीं हो सकता है जिनका पालन चयन समितियां सालाना गोपनीय रिपोर्ट में अधिकारियों को वरीयता देते वक्त करें।

पीठ ने कहा कि एसीआर का निरीक्षण करने पर समिति इस नतीजे पर पहुंच सकती है कि कोई खास उम्मीदवार अच्छा है या बहुत अच्छा। ऐसे मामलों में अदालतों या न्यायाधिकरण को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

पीठ ने यह व्यवस्था कर्नाटक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दी। इन अधिकारियों ने उन्हें आईएएस संवर्ग देने के लिए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा अपनाई गई चयन प्रक्रिया को चुनौती दी थी। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने इससे पहले चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। न्यायाधिकरण की राय थी कि समिति ने कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए मनमाने तरीके से काम किया।

बहरहाल, यूपीएससी की याचिका पर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने चयन प्रक्रिया को जायज ठहरा दिया था जिसके बाद अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष याचिकाएं दाखिल की थीं।

18 December, 2007

सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल

केंद्रीय कर्मचारियों की जेब भारी करने के साथ-साथ छठा वेतन आयोग उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल करने की सिफारिश पर विचार कर रहा है। श्रम और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ सेवानिवृत्ति आयु में दो साल की बढ़ोतरी करने की राय आयोग के आला अधिकारी को देने की तैयारी में हैं। इस सलाह के पीछे उनकी दलील है कि इस तरह सरकार पेंशन बिल पर पड़ने वाला बोझ कम से कम दो साल के लिए टाल सकती है।

संभावित वेतन वृद्धि की वजह से सरकार पर पड़ने वाले बोझ से निपटने के तरीके तलाशने के तहत ही आयोग सेवानिवृत्ति से जुड़े पहलू पर विचार कर रहा है। इस सिलसिले में हिसाब-किताब लगा रहे विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सेवानिवृत्ति आयु में दो साल की बढ़ोतरी से सरकार को काफी राहत मिल सकती है। ऐसा नहीं करने से सरकार को 'दोहरे आर्थिक बोझ' से दो-चार होना पड़ेगा।

एक ओर आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद वेतन वृद्धि से पड़ने वाला वित्तीय भार तो होगा ही, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन व उससे जुड़े तमाम आर्थिक दावों की लंबी फेहरिस्त भी होगी। वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों के साथ चंद रोज पहले हुई चर्चा में इस मामले का बड़ी गंभीरता से आकलन किया गया। वित्त मंत्रालय मान रहा है कि भविष्य में पेंशन बिल के भुगतान पर होने वाला खर्च वेतन के चलते पड़ने वाले आर्थिक बोझ से किसी तरह कम नहीं होगा। इसके लिए विशेषज्ञ अपने आंकड़े भी वेतन आयोग तक पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि 2007-08 में केंद्रीय कर्मचारियों का पेंशन बिल वेतन बिल से ऊपर निकल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार 2006-07 में पेंशन और उससे जुड़ी अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने पर सरकार को 39,074 करोड़ रुपये का भार पड़ा था। वेतन संबंधी भुगतान से पड़ने वाला बोझ 40,047 करोड़ रुपये का था। अगर इन आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो मौजूदा वित्तीय वर्ष में पेंशन पर होने वाला खर्च निश्चित रूप से केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन के खर्च से आगे निकल जाएगा।

वेतन आयोग को बताया गया है कि रेल कर्मियों के मामले में यह तो हो ही रहा है। अब अगर इन विशेषज्ञों की दलीलें आयोग के गले उतरीं तो 60 साल पूरा करके सेवानिवृत्ति की दहलीज पर खड़े कर्मचारियों को दो साल और सेवाएं देनी होंगी।

17 December, 2007

हफ्ते में ज्यादा काम करते हैं 60 करोड़ लोग !

दुनिया भर में हर पांच में से एक श्रमिक या 60 करोड़ लोग अभी भी सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करते हैं जो मात्र उनके गुजारे भर के लिए होता है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन से यह बात सामने आई है कि दुनिया भर के श्रमिकों में से 22 प्रतिशत यानी 61.42 करोड़ श्रमिक अत्यधिक लंबे घंटों तक काम करते हैं। पचास से अधिक देशों में किए गए इस अध्ययन में दुनिया भर में श्रम अवधि से संबंधित मुद्दों-जैसे राष्ट्रीय कानून तथा नीतियां, श्रम के वास्तविक घंटों की प्रवृत्तियां, विभिन्न प्रकार के श्रमिकों तथा आर्थिक क्षेत्रों के विशेष अनुभव और श्रम अवधि पर भावी नीतियों के लिए इन सब के निहितार्थ का पुनरीक्षण किया गया है।

यह रिपोर्ट श्रम अवधि पर राष्ट्रीय कानूनों एवं नीतियों तथा वास्तविक श्रम घंटों पर पहला वैश्विक तुलनात्मक विश्लेषण है जो विकासशील तथा संक्रमणकालीन देशों पर केंद्रित है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की कार्य स्थितियां तथा रोजगार कार्यक्रम के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी और इस अध्ययन के सह लेखक जान सी मेसेंजर के अनुसार एक अच्छी बात यह है कि विकासशील और संक्रमणकालीन देशों में साधारण काम के घंटों को नियमित करने में प्रगति हुई है, लेकिन कुल मिलाकर अध्ययन निष्कर्ष विशेषकर अत्यंत लंबे श्रम के घंटों के बारे में निश्चित रूप से चिंताजनक है।

14 December, 2007

रेलवे कर्मचारियों को चिकित्सा भत्ता

रेलवे अस्पताल के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को अब चिकित्सा भत्ता दिया जाएगा।

कैबिनेट की एक बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने १४ दिसम्बर को बताया कि रेलवे के 30 बिस्तरों या उससे अधिक वाले सामान्य अस्पतालों और 10 या उससे अधिक बिस्तरों वाले रेलवे के विशेष अस्पतालों के कर्मचारियों को यह सुविधा दी जाएगी।

तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए यह भत्ता 700 रुपए प्रतिमाह और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए यह भत्ता 695 रुपए प्रति माह होगी।