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26 June, 2008

नौकरी के दौरान तनाव,पुरुषों की तुलना में महिलायों को अधिक

कामकाजी पुरुषों व महिलाओं के बीच किए गए अध्ययन में पाया गया कि अवसाद के छह में से एक मामले का कारण नौकरी है। अध्ययन से पता चला है कि नौकरी के दौरान तनाव का सामना पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक करना पड़ता है। इसका कारण तुलनात्मक रूप से काम में उनका कम दक्ष होना है।

विक्टोरिया में काम करने वाले १,१०० कर्मचारियों पर २००३ में अध्ययन किया गया था जिससे यह आंकड़ा मिला था। नौकरी की बढ़ती मांग को देखते हुए कार्यालयों का माहौल तनावयुक्त होता जा रहा है। कामकाजी लोगों में कार्यस्थल पर तनाव के कारण अवसाद की सम्भावना बढ़ती जा रही है।

कार्यालय की ओर से तनाव के कारण मानसिक परेशानियों की गिरफ्त में आने वाले कर्मचारियों की मदद भी नहीं की जाती। यही कारण है कि ऐसे मामलों से जुड़ी जानकारी भी कम ही मिल पाती है। शोधकर्ता मेलबर्न विश्वविद्यालय के टोनी लामोन्टेग्न ने कहा, ॰कम दक्ष महिलाओं में काम का तनाव तुलनात्मक रूप से ज्यादा होता है।” वह कहते हैं, ॰स्पष्ट है कि लोग स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से ग्रस्त हैं और मानसिक बीमारी का एक महत्वपूर्ण कारण नौकरी है।” उनहोंने कहा, ॰हमें आशा है कि कार्यालय यदि अपने कर्मचारियों के साथ सहयोग करेंगे तो इस समस्या का बड़े पैमाने पर हल हो पाएगा। साथ ही कम दक्ष कर्मचारियों, खासकर महिला कर्मचारियों को इससे काफी मदद मिलेगी। इस अध्ययन से जुड़ी बातें पब्लिक हेल्थज् पत्रिका के नए अंक में विस्तार से दी गई है।

29 March, 2008

ज्यादा होगा काम, अगर अलग केबिन मिले!

आफिस में हर कर्मचारी को काम करने के लिए अलग-अलग केबिन दिया जाए तो इससे ज्यादा काम निकल सकता है। एक शोध से साबित हुआ है कि अकेले में व्यक्ति ज्यादा रफ्तार से और सटीक काम करता है। इसके उलट, समूह में काम करने से व्यक्ति की कार्यक्षमता घटती है।

कालग्रेरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि एक जैसे माहौल में कई लोगों के एक साथ काम करने से कार्यस्थल पर एक-दूसरे के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। इस शोध के मुताबिक अगर किसी कार्यक्षेत्र में कोई दो लोग अलग-अलग काम कर रहे हों तो भी उनके काम की क्षमता पर असर पड़ता है। डा. वेल्स ने कहा, 'कल्पना कीजिए कि आप काम कर रहे हों और ठीक आपके बगल में कोई दूसरा आदमी भी कुछ काम कर रहा हो। आप पाएंगे कि आपके काम की गति कम हुई है।' डा. वेल्स का कहना है कि दूसरे की मौजूदगी पहले व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। यह प्रभाव नकारात्मक होता है। इसका असर व्यक्ति की एकाग्रता भंग होने, काम की रफ्तार घटने और यहां तक कि काम से मन उचटने के रूप में सामने आ सकता है।