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31 March, 2009

PSU कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का तोहफा

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का तोहफा दिया है। इससे तेल क्षेत्र समेत अन्य सभी नवरत्न कंपनियों के कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की 30 मार्च को यहां हुई एक बैठक में यह फैसला किया गया। इस फैसले से सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों के सकल वेतन में पहले जो बढ़ोतरी करने का फैसला किया गया था, उससे कम से कम 28 फीसदी ज्यादा वृद्धि अब होगी। 

श्री चिदंबरम ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस फैसले से सरकारी उपक्रमों (PSU) के चार लाख कर्मचारियों को सीधे फायदा होगा। खास तौर पर लाभ अर्जित करने वाले उपक्रमों के कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। कर्मचारियों के मूल वेतन में वृद्धि के साथ ही उनके आवासीय भत्ते और पेंशन भुगतान में भी वृद्धि होगी। महंगाई भत्ते का 50 फीसदी हिस्सा मूल वेतन में जोड़ने के फैसले को पहली जनवरी, 2007 से लागू माना जाएगा। 

सेवानिवृत्ति के बाद के भुगतान को जोड़ने के लिए मूल वेतन और महंगाई भत्ते के योग की 30 फीसदी सीमा को आधार माना जाएगा। भत्ते वगैरह के भुगतान की अवधि 26 नवंबर, 2008 से लागू मानी जाएगी। 

सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर समस्त वृद्धि का योग निकाला जाए तो 100 रुपये के मूल वेतन में 28 रुपये प्रति महीने की वृद्धि होती है। मालूम हो कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि पर सुझाव देने के लिए सरकार ने पहले जगन्नाथ राव समिति बनाई थी। राव समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार ने पीएसयू कर्मियों के वेतन में वृद्धि का फैसला किया था, लेकिन इस पर नवरत्न कंपनियों के कर्मचारी राजी नहीं थे। विरोध में तेल कंपनियों के अफसरों ने हड़ताल भी की। इसको देखते हुए चिंदबरम की अध्यक्षता में समिति बनाई गई। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय मुरली देवड़ा भी इसके सदस्य थे। कुछ हफ्ते पहले देवड़ा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह आग्रह किया था कि मसले पर शीघ्रता से फैसला किया जाए।

25 September, 2008

सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतनमान पर राव समिति की रिपोर्ट मंजूर नहीं

 सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन पर सिफारिश देने के लिए गठित समिति के सुझावों पर हाल-फिलहाल में फैसला होने की संभावना टलती नजर आ रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के सर्वोच्च संगठन स्कोप (Standing Conference of Public Enterprises) ने ही समिति की सिफारिशों को कठघरे में ला दिया है। स्कोप ने कहा है कि न्यायाधीश एमजे राव की अध्यक्षता वाली समिति ने सभी वर्गो के कर्मचारियों और अधिकारियों को एक ही आधार पर वेतन वृद्धि का सुझाव दिया है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

स्कोप ने कहा है कि वैसे तो राव समिति की सिफारिशों को लागू करने से पीएसयू कर्मियों के वेतन में वृद्धि होगी,लेकिन वक्त की मांग को देखते हुए यह वृद्धि उपयोगी नहीं कही जा सकती है। मुद्दे को आगे ले जाते हुए स्कोप ने अपने सभी सदस्यों से सुझाव मंगवाए हैं। इन सुझावों के आधार पर संगठन लोक उपक्रम विभाग और भारी उद्योग मंत्रालय के साथ वेतन संशोधन पर नए सिरे बातचीत शुरू करने की योजना बना रहा है। स्कोप के मुताबिक आज के दौर में आय,कर्मचारियों की संख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर ही वेतन वृद्धि कर देना पर्याप्त नहीं है। स्कोप इस बारे में सभी नवरत्न कंपनियों को 'ए प्लस' श्रेणी में रखने के पक्ष में है ताकि इनको अपने बेहतरीन कर्मचारियों को निजी क्षेत्रों के हाथों में चले जाने से रोकने में सहूलियत हो।

स्कोप का कहना है कि यह अर्थव्यवस्था के हित में है कि अच्छा प्रदर्शन करने वाली सरकारी कंपनियों और निजी क्षेत्र के वेतनमान में बहुत ज्यादा अंतर नहीं हो। राव समिति की सिफारिशों को लागू करने के बावजूद अंतर बना रहेगा। स्कोप का सुझाव है कि सरकार की वेतन वृद्धि की नीति इस प्रकार की होनी चाहिए कि व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर हमेशा ही इसमें बढ़ोतरी की संभावना बनी रहे। साथ ही सरकारी कंपनियों के प्रबंधन को यह अधिकार होना चाहिए कि वह वेतनमान में परिस्थितियों के मुताबिक संशोधन कर सके।

थोड़ी और जानकारी यहाँ

21 February, 2008

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से निराशा हाथ लगेगी?

निजी कंपनियों में दी जा रही मोटी पगार की ही तर्ज पर वेतन बढ़ने की उम्मीद लगाए केंद्रीय कर्मचारियों व अधिकारियों को छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से निराशा हाथ लग सकती है। अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटा आयोग तनख्वाह के मामले में निजी क्षेत्रों से होड़ लगाने के मूड में कतई नहीं है।

उच्च पदों पर काबिज अधिकारियों के सरकारी नौकरी से तौबा करने के सिलसिले के बावजूद आयोग की तरफ से इस तरह की कोई भी सिफारिश आने की संभावना नहीं है। हालांकि सरकारी नौकरी छोड़ निजी क्षेत्र में जा रहे अधिकारियों को रोकना आयोग के लिए कठिन चुनौती है। इसके लिए वेतन वृद्धि के संकेत भी उसने दिए हैं। लेकिन यह तय है कि निजी कंपनियों में मुंहमांगी पगार देने की पद्धति के सामने यह वेतन वृद्धि बौनी ही साबित होगी।

दैनिक जागरण के अनुसार आयोग नौकरशाहों के वेतन में सवा तीन गुना से ज्यादा बढ़ोतरी करने के मूड में आयोग कतई नहीं है। हालांकि कर्मचारियों व अधिकारियों की सुख सुविधाओं में कुछ बढ़ोतरी करके सरकारी सेवाओं को आकर्षक करने की कोशिश आयोग की जरूर की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों ने तो निजी क्षेत्र के बराबर वेतन वृद्धि की उम्मीद तो उसी दिन छोड़ दी थी जिस दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कारपोरेट जगत के नायकों से अपनी कंपनियों में दी जा रही मोटी तनख्वाहों पर पुनर्विचार करने को कहा था। वेतन आयोग के एक अधिकारी ने कहा, 'निजी कंपनियों में तो 25 साल के एक युवक को भी इतनी तनख्वाह मिल जाती है जितनी सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को कई साल की सेवाओं के बाद भी हासिल नहीं होती।' सार्वजनिक क्षेत्र की अपनी सीमाएं हैं। हालांकि आयोग की तरफ से दी गई प्रश्नावली के जरिये अफसरों ने अपनी पगार निजी क्षेत्रों के बराबर ही किए जाने की अपेक्षा जाहिर की है।