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30 March, 2009

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) में कर्मचारियों का वेतन बढ़ा

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) के करीब 4 लाख कर्मचारियों को सरकार ने एक बार फिर से सौगात दी है। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के करीब 4 लाख कर्मचारियों की सैलरी और भत्ते बढ़ाने का फैसला आज लिया। प्रधानमंत्री की अगुआई में 30 मार्च को हुई कैबिनेट मीटिंग में यह फैसला लिया गया। नए पे पैकेज में इन कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउअंस में भी बढ़ोतरी की गई है। साथ ही बेहतर रिटायरमेंट बेनिफिट भी दिया गया है। सरकार ने यह फैसला होम मिनिस्टर पी चिदंबरम की अगुआई में गठित मंत्रियों की समिति की सिफारिशों के आधार पर किया है।

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए होम मिनिस्टर पी चिदंबरम ने बताया कि पे स्ट्रक्चर का रीविजन हर कंपनी के हिसाब से अलग-अलग होगा।

शेष जानकारियां अगली पोस्ट में

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र में वेतन बढ़ोत्तरी को आज मंजूरी मिल जायेग़ी!

अगर सब कुछ ठीक रहा तो चुनाव के इस मौसम में भी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (Central Public Sector Enterprises) के अधिकारियों की बल्ले-बल्ले हो सकती है। अमूमन चुनाव के दौरान आचार संहिता के चलते सरकार कोई बड़ा फैसला लेने से बचती है पर इस बार उसने चुनाव आयोग से सीपीएसई के अधिकारियों का वेतन बढ़ाने की अनुमति ले ली है। वेतन में बढ़ोतरी को मंजूरी देते हुए चुनाव आयोग ने सरकार को सलाह दी है कि वह से इसे प्रचार का मुद्दा नहीं बनाए।

वेतन संशोधन समिति ने नवंबर,08 में इस बढ़ोतरी का सुझाव दिया था। गृह मंत्री पी. चिदंबरम की अध्यक्षता वाले मंत्रिसमूह (GoM) ने इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद समिति के सुझाव मानने के संकेत दिए हैं। कैबिनेट द्वारा इस प्रस्ताव पर 30 मार्च को विचार किए जाने की संभावना है। menari

18 November, 2008

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के अधिकारियों की हड़ताल टली

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के अधिकारियों ने 17 नवम्बर से प्रस्तावित अपनी हड़ताल को एक हफ्ते के लिए टाल दिया है। अधिकारियों ने अधिक वेतनमान की मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी। तेल क्षेत्र अधिकारी एसोसिएशन (OSOA) के अध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि वेतनमान पर कैबिनेट की बैठक में विचार-विमर्श को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है। कैबिनेट 20 नवंबर को इस मसले पर विचार करेगी। इससे पहले ओएसओए ने कहा था कि एक जनवरी 2007 से वेतनमान में संशोधन नहीं किए जाने की वजह से सार्वजनिक क्षेत्र की 14 कंपनियों के 50000 अधिकारी कल हड़ताल पर जाएंगे।

पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने व्यापक तौर पर राष्ट्रीय हित की बात ध्यान में रखकर कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने का फैसला वापस लेने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि उनका मंत्रालय अधिक वेतनमान का समर्थन करता है और इस सिलसिले में उसने सार्वजनिक उद्यम विभाग को इस बारे में सुझाव दिया है। अमित कुमार ने कहा कि कैबिनेट की बैठक के बाद ही एसोसिएशन अपने भावी रणनीति की घोषणा करेगा।

25 September, 2008

सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतनमान पर राव समिति की रिपोर्ट मंजूर नहीं

 सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन पर सिफारिश देने के लिए गठित समिति के सुझावों पर हाल-फिलहाल में फैसला होने की संभावना टलती नजर आ रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के सर्वोच्च संगठन स्कोप (Standing Conference of Public Enterprises) ने ही समिति की सिफारिशों को कठघरे में ला दिया है। स्कोप ने कहा है कि न्यायाधीश एमजे राव की अध्यक्षता वाली समिति ने सभी वर्गो के कर्मचारियों और अधिकारियों को एक ही आधार पर वेतन वृद्धि का सुझाव दिया है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

स्कोप ने कहा है कि वैसे तो राव समिति की सिफारिशों को लागू करने से पीएसयू कर्मियों के वेतन में वृद्धि होगी,लेकिन वक्त की मांग को देखते हुए यह वृद्धि उपयोगी नहीं कही जा सकती है। मुद्दे को आगे ले जाते हुए स्कोप ने अपने सभी सदस्यों से सुझाव मंगवाए हैं। इन सुझावों के आधार पर संगठन लोक उपक्रम विभाग और भारी उद्योग मंत्रालय के साथ वेतन संशोधन पर नए सिरे बातचीत शुरू करने की योजना बना रहा है। स्कोप के मुताबिक आज के दौर में आय,कर्मचारियों की संख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर ही वेतन वृद्धि कर देना पर्याप्त नहीं है। स्कोप इस बारे में सभी नवरत्न कंपनियों को 'ए प्लस' श्रेणी में रखने के पक्ष में है ताकि इनको अपने बेहतरीन कर्मचारियों को निजी क्षेत्रों के हाथों में चले जाने से रोकने में सहूलियत हो।

स्कोप का कहना है कि यह अर्थव्यवस्था के हित में है कि अच्छा प्रदर्शन करने वाली सरकारी कंपनियों और निजी क्षेत्र के वेतनमान में बहुत ज्यादा अंतर नहीं हो। राव समिति की सिफारिशों को लागू करने के बावजूद अंतर बना रहेगा। स्कोप का सुझाव है कि सरकार की वेतन वृद्धि की नीति इस प्रकार की होनी चाहिए कि व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर हमेशा ही इसमें बढ़ोतरी की संभावना बनी रहे। साथ ही सरकारी कंपनियों के प्रबंधन को यह अधिकार होना चाहिए कि वह वेतनमान में परिस्थितियों के मुताबिक संशोधन कर सके।

थोड़ी और जानकारी यहाँ

21 February, 2008

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से निराशा हाथ लगेगी?

निजी कंपनियों में दी जा रही मोटी पगार की ही तर्ज पर वेतन बढ़ने की उम्मीद लगाए केंद्रीय कर्मचारियों व अधिकारियों को छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से निराशा हाथ लग सकती है। अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटा आयोग तनख्वाह के मामले में निजी क्षेत्रों से होड़ लगाने के मूड में कतई नहीं है।

उच्च पदों पर काबिज अधिकारियों के सरकारी नौकरी से तौबा करने के सिलसिले के बावजूद आयोग की तरफ से इस तरह की कोई भी सिफारिश आने की संभावना नहीं है। हालांकि सरकारी नौकरी छोड़ निजी क्षेत्र में जा रहे अधिकारियों को रोकना आयोग के लिए कठिन चुनौती है। इसके लिए वेतन वृद्धि के संकेत भी उसने दिए हैं। लेकिन यह तय है कि निजी कंपनियों में मुंहमांगी पगार देने की पद्धति के सामने यह वेतन वृद्धि बौनी ही साबित होगी।

दैनिक जागरण के अनुसार आयोग नौकरशाहों के वेतन में सवा तीन गुना से ज्यादा बढ़ोतरी करने के मूड में आयोग कतई नहीं है। हालांकि कर्मचारियों व अधिकारियों की सुख सुविधाओं में कुछ बढ़ोतरी करके सरकारी सेवाओं को आकर्षक करने की कोशिश आयोग की जरूर की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों ने तो निजी क्षेत्र के बराबर वेतन वृद्धि की उम्मीद तो उसी दिन छोड़ दी थी जिस दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कारपोरेट जगत के नायकों से अपनी कंपनियों में दी जा रही मोटी तनख्वाहों पर पुनर्विचार करने को कहा था। वेतन आयोग के एक अधिकारी ने कहा, 'निजी कंपनियों में तो 25 साल के एक युवक को भी इतनी तनख्वाह मिल जाती है जितनी सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को कई साल की सेवाओं के बाद भी हासिल नहीं होती।' सार्वजनिक क्षेत्र की अपनी सीमाएं हैं। हालांकि आयोग की तरफ से दी गई प्रश्नावली के जरिये अफसरों ने अपनी पगार निजी क्षेत्रों के बराबर ही किए जाने की अपेक्षा जाहिर की है।