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13 May, 2008

कर्मचारियों को गोपनीय रिपोर्ट के बारे में बताना जरूरी

सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण तथा दूरगामी फैसले में उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार, १२ मई को कहा कि अधिकारियों द्वारा, अपने कर्मचारियों को वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) के बारे में अवश्य सूचित करना चाहिए ताकि वह उसके खिलाफ सक्षम अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत कर सके। न्यायमूर्ति एचके सेमा और न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू की पीठ ने देव दत्त की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि कोई भी नियम अथवा सरकारी निर्देश अधिनियम 14 या संविधान के किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं कर सकता क्योंकि संविधान सर्वोपरि है। देव दत्त की याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति काटजू ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 26 नवम्बर 2001 के उस फैसले को दरकिनार कर दिया जिसमें उसने याचिकाकर्ता की याचिका को अस्वीकार करते हुए उसे सीमा सड़क इंजीनियरिंग सेवा में अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति देना अस्वीकार कर दिया था।

पीठ ने कहा कि यह फैसला देते हुए कोर्ट प्राकृतिक न्याय के नए सिद्धांत का विकास कर रहा है। उन्होंने कहा-‘‘पारदर्शिता के लिए जरूरी है कि सैन्यकर्मियों को छोड़कर सरकारी कर्मचारियों के एसीआर को तर्कसंगत अवधि के भीतर उन्हें अवश्य बता देना चाहिए और ऐसा फैसला देकर हमने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का विकास कर रहे हैं।’’ फैसले में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि किसी सरकारी कर्मचारी की वार्षिक रिपोर्ट में प्रतिकूल प्रविष्टि होने पर ही उसे सूचित किया जाए बल्कि उसे हर उस प्रविष्टि की जानकारी दी जानी चाहिए चाहे वह खराब, सामान्य अथवा बहुत अच्छी हो ताकि सक्षम अधिकारी के समक्ष वह अपना पक्ष रख सके। ऐसा नहीं होने पर यह निष्पक्षता की नीति का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रविष्टि करने वाले से ऊंचे अधिकारी को ही कर्मचारी के एसीआर पर आगे की सुनवाई करनी चाहिए।

दत्त की याचिका स्वीकार कर लिये जाने से उन्हें अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति मिल जाएगी। हालांकि उनके अवकाश ग्रहण कर लेने के कारण उन्हें पेंशन बढ़ोतरी का लाभ के साथ ही बकाए राशि का आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि दत्त को 22 फरवरी 1988 को कार्यकारी अभियंता के पद पर पदोन्नत किया गया था और उन्हें 21 फरवरी 1993 को अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति किया जाना था। लेकिन इस पद पर पदोन्नति पाने के लिए उनके वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में बहुत अच्छी प्रविष्टि होनी चाहिए थी जबकि उनकी रिपोर्ट में एक अच्छी रिपोर्ट दर्ज होने के कारण उन्हें पदोन्नत नहीं किया गया।