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22 April, 2009

मौजां ही मौजां: पंजाब कर्मियों का वेतन 27 फीसदी बढ़ेगा

वेतन आयोग के अध्यक्ष एसके टुटेजा ने पंजाब के कर्मचारियों के वेतन में औसतन 27 फीसदी बढ़ोतरी और सेवानिवृत्ति की उम्र 58 से 60 वर्ष करने की सिफारिश की है। उन्होंने 20 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव आरआई सिंह को सौंप दी। लोकसभा चुनाव के बाद यह सिफारिशें लागू होंगी। इसका फायदा हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को भी मिलेगा। हिमाचल में पंजाब का पैटर्न ही लागू होता है। पंजाब के मुख्य सचिव सिंह ने इन सिफारिशों को लागू करने के लिए कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट कैबिनेट को देगी। नया वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू होगा। आयोग ने वेतन और पेंशन के एरियर का बकाया 4800 करोड़ रुपए देने की भी सिफारिश की गई। यह भी 1 जनवरी 2006 से देय होगा। केंद्र सरकार की तर्ज पर डीए मिलेगा। इसका फायदा यह होगा कि भत्ते दोगुना हो जाएंगे।

आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, वेटनरी, पीसीएमएस और दंत चिकित्सकों को बेसिक पे का 25 फीसदी एनपीए मिलेगा। क्लास वन अफसर को 30 फीसदी डेपुटेशन भत्ता मिलेगा। नेत्रहीन और विकलांग कर्मचारियों के परिवहन भत्ते में 450 रुपए बढ़ोतरी करने की सिफारिश है। जिन कर्मचारियों के दो बच्चे हैं उनको 500 रुपए प्रति माह भत्ता और मेडिकल भत्ता 250 से 500 रुपए कर दिया गया है। हर कर्मचारी को 100 से 500 रुपए तक मोबाइल फोन भत्ता मिलेगा।

अति संवेदनशील पदों पर नियुक्त कर्मचारियों को जोखिम भत्ता के स्थान पर जोखिम बीमा से कवर किया जाएगा। यह पांच से 15 लाख रुपए तक होगा। इसका प्रीमियम राज्य सरकार देगी। ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों को परिवार दो बच्चों तक सीमित रखने पर एक फीसदी अतिरिक्त वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है।

नौकरी के दौरान मृत्यु होने पर एक्सग्रेशिया एक लाख से बढ़ा कर तीन लाख रुपए करने की सिफारिश की गई है। अगर मृत्यु दंगों, आतंकी हमले या देश विरोधी तत्वों के हाथों होती है तो एक्सग्रेशिया 10 लाख रुपए मिलेगा। आश्रित को पेंशन दस साल तक बढ़ोतरी दर से मिलेगी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि एडवांस ऑफ ग्रांट बैंकों के जरिए दिया जाए। इस पर ब्याज दर दो फीसदी कम देना होगा।

80 से 100 साल तक होने पर रिटायर कर्मियों को या फिर उनके परिवारिक सदस्यों को मिलने वाली पेंशन उच्च स्तर की दर से मिलेगी। इसके साथ ही 65 से 75 वर्ष तक होने पर ओल्ड ऐज भत्ता पुराने स्तर पर मिलता रहेगा।

सभी मौजूदा व पेंशन प्राप्त कर्मियों के लिए इंश्योरेंस स्कीम का सुझाव दिया गया है। सचिवालय और निजी स्टाफ को आपस में मर्ज करने का भी सुझाव है। भविष्य में नई भर्ती एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट के तौर होगी। यह एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट व निजी स्टाफ का काम देखेगा। जिसकी योग्यता कम से कम ग्रेजूएशन एवं एक साल का कंप्यूटर का डिप्लोमा होगी।

अकाली दल ने ऐलान किया कि वह पे-कमीशन की सिफारिशों को जैसी है, वैसी ही लागू करेगा। इनमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।

सेवानिवृत्ति की उम्र 58 से 60 वर्ष करने की सिफारिश की गई है। शिक्षक, नर्स और कांस्टेबल से ऊपर के कर्मचारियों को अधिकतम पे स्केल मिलेगा। अगर कोई कर्मचारी इससे वंचित रहता है तो उसे अगला स्केल दिया जाएगा। उसका ग्रेड चेंज नही होगा।

इसके अलावा सभी क्षेत्रों के हाउस रेंट अलाउंस में पांच फीसदी बढ़ोतरी करते हुए सिटी कंपनसेटरी अलाउंस को खत्म करने की सिफारिश की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के भत्ते को पांच से बढ़ाकर छह फीसदी किया गया है। टीए और डीए की दरों में संशोधन किया गया है।

पूरी पेंशन के लिए 33 साल के सेवाकाल की शर्त पर नरमी दिखाते हुए 20 साल की सेवा के बाद लिए गए वेतन की औसतन 50 फीसदी राशि पेंशन के रूप में देने की सिफारिश की है। आयोग ने यह भी सिफारिश की कि भविष्य में सभी कर्मियों के वेतन में एक साथ तीन फीसदी बढ़ोतरी होगी।
(संदर्भ: सुखबीर सिंह बावजा, दैनिक भास्कर)

24 February, 2009

कर्मचारी पेंशन स्कीम में सरकारी योगदान बढ़ाने की सिफारिश नामंजूर

कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) 1995 में सरकार के योगदान बढ़ाने के एक प्रमुख संसदीय समिति की सिफारिश को सरकार ने नामंजूर कर दिया है। समिति ने सुझाव दिया था कि सरकारी योगदान में भारी बढ़त कर इसे कम से कम नियोक्ता के योगदान के आधा तक किया जाए।

ईपीएस 1995 ऐसी योजना है, जिसमें कर्मचारियों और नियोक्ता को योगदान करना पड़ता है। फिलहाल सेवानिवृत्ति के लिए बचत करने की जो व्यवस्था है, उसमें गैर-सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों को अपने वेतन का 12 फीसदी हिस्सा कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में जमा करना पड़ता है। फंड में इसके बराबर राशि ही नियोक्ता भी जमा करता है। हालांकि नियोक्ता की यह 12 फीसदी राशि दो हिस्सों में विभाजित होती है। इस राशि में से 8.33 फीसदी हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (अधिकतम 540 रुपए प्रति माह) और शेष राशि ईपीएफ में चली जाती है। ईपीएस के तहत सदस्य यानी कर्मचारी से कोई योगदान नहीं लिया जाता। सरकार कर्मचारी के पेंशन फंड में 1.16 फीसदी राशि देती है।

इकोनोमिक टाइम्स में आयी ख़बर कहती है कि श्रम मामलों पर गठित संसद की स्थायी समिति ने इस बात पर गौर किया कि पिछले 14 साल से पेंशन योजना में न तो नियोक्ता का योगदान बढ़ रहा है, न ही सरकार का। अपनी 39वीं रिपोर्ट में समिति ने साफ तौर पर यह सुझाव दिया है कि योगदान के फॉर्मूले में समय-समय पर संशोधन होना चाहिए और सरकार का योगदान नियोक्ता का कम से कम आधा तो होना ही चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब यह जानने का प्रयास किया गया कि ईपीएस में योगदान के मामले में सरकार संशोधन करने में विफल क्यों रही तो मंत्रालय के अधिकारियों का कहना था कि सरकारी योगदान बढ़ाने फिलहाल उन्हें कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। इसकी जगह मंत्रालय का तर्क था कि प्रतिशत योगदान में संशोधन होने के बावजूद पेंशन योजना में सरकार का योगदान बढ़ रहा है।

ईपीएस 1995 पर विपरीत असर पड़ने की संभावना से ही सरकार ने ईपीएफ योजना के तहत कवर होने वाले वेतन की सीमा 6,500 रुपए में कोई संशोधन नहीं किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'ईपीएफ के वेतन की सीमा बढ़ाने से ईपीएस योजना पर गहरा असर पड़ सकता है। इस तरह जब तक पेंशन योजना के प्रभाव को पूरी तरह से संभाला नहीं जा सकता, वेतन सीमा बढ़ाना उपयुक्त नहीं होगा।' अपने जवाब में सरकार ने कहा है, 'जून, 2001 से पेंशन पात्रता वेतन सीमा 5,000 रुपए से बढ़ाकर 6,500 रुपए करके सरकार ने पहले ही अपनी देनदारी करीब 10,000 करोड़ रुपए बढ़ा दी है और जब भी फिर उपयुक्त परिस्थिति आएगी वेतन की सीमा और बढ़ाई जा सकती है।'

कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952 के तीन सबऑर्डिनेट कानूनों में से एक ईपीएस भी है जो 16 नवंबर 1995 से लागू हुआ है। मंत्रालय के एक दूसरे संगठन कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) ने कर्मचारियों के बदलते स्तर को स्वीकारते हुए अपनी योजना के कवरेज की वेतन सीमा बढ़ाकर 10,000 रुपए कर दी है, लेकिन ईपीएफओ ने अभी तक ऐसा नहीं किया है।
(समाचार अंश: इकोनोमिक टाइम्स से साभार)

11 February, 2009

रिजर्व बैंक के कर्मचारी 20 फरवरी को देश भर में एक दिन की हड़ताल पर

नई पेंशन योजना को बहाल करने समेत अपनी तमाम मांगों को लेकर रिजर्व बैंक के कर्मचारी 20 फरवरी को देश भर में एक दिन की हड़ताल पर करेंगे। सीजीएम से लेकर चौथे दर्जे के कर्मचारियों के काम न करने से इस दिन केंद्रीय बैंक द्वारा किए जाने वाले भुगतानों पर असर पड़ेगा।

अखिल भारतीय रिजर्व बैंक कर्मचारी संघ के सचिव के के शर्मा ने इस हड़ताल की मुख्य वजह वित्ता मंत्रालय की ओर से केंद्रीय बैंक द्वारा जारी एक आंतरिक सर्कुलर को बताया है। इसमें नवंबर 1997 से पूर्व सेवानिवृत्ति पाने वालों से नई पेंशन योजना को वापस लेने की बात कही गई है। सर्कुलर में आरबीआई के रिटायर हो चुके कर्मचारियों की पेंशन में भारी कमी की घोषणा की गई है। पिछले साल अक्टूबर में भी केंद्रीय बैंक के कर्मचारियों ने इसी मुद्दे पर देशव्यापी हड़ताल की थी।

19 October, 2008

रिजर्व बैंक में 21 अक्टूबर को सामूहिक अवकाश

भारतीय रिजर्वं बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पेंशन के मुददे पर 21 अक्टूबर को सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है। उधर रिजर्व बैंक ने अधिकारियों और कर्मचारियों के इस कदम को अवैध बताया है क्योंकि इसकी पहले सूचना नहीं दी गयी है। युनाइटेड फोरम आफ रिजर्व बैंक आफिसर्स एंड एम्प्लाइजेज ने अपने सदस्यों से 21 अक्टूबर को सामूहिक अवकाश पर जाने का आह्वान किया है। आरबीआई प्रति पांच वर्ष के बाद अपने अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतनमान संशोधित किया जाता है। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि पेंशन के मामले में ऐसा नहीं है।

इस बीच रिजर्व बैंक ने कहा है कि कर्मचारियों के इस कदम से सामान्य कामकाज बाधित होगा। बैंक ने आम जनता को सलाह दी है कि अपने काम 20 अक्टूबर तक निपटा ले।

24 September, 2008

छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों और पेंशनरों को अंतरिम राहत का आदेश

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों को अंतरिम राहत देने के आदेश जारी कर दिए हैं। मीडिया सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने 18 सितम्बर 2008 के संकल्प के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनरों को एक सितम्बर 2008 से क्रमश: 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत अंतरिम राहत स्वीकृत करने के आदेश जारी कर दिए हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार कर्मचारियों को सितम्बर 2008 का वेतन जो अक्टूबर माह में देय होगा उसके साथ मूल वेतन और महंगाई वेतन की 20 प्रतिशत राशि अंतरिम राहत के रूप में दी जाएगी। यह अंतरिम राहत किसी भी सेवा लाभ अर्थात मकान किराया भत्ता, प्रतिपूर्ति भत्तों, वेतन निर्धारण, अवकाश नकदीकरण, पेंशन, ग्रेच्यूटी आदि की संगणना के लिए वेतन भत्ते या मजदूरी के रूप में नहीं गिनी जाएगी।

अंतरिम वेतन की राशि का समायोजन पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर्स से किया जाएगा। पेंशनरों को सितम्बर 2008 की पेंशन जो अक्टूबर में देय है उसमें मूल पेंशन और महंगाई पेंशन की 10 प्रतिशत राशि अंतरिम राहत में रूप में दी जाएगी।

16 September, 2008

सितम्बर के वेतन के साथ अंतरिम राहत

मध्य प्रदेश शासन के कर्मचारियों तथा अधिकारियों को छठवें वेतनमान के अंतर्गत बीस प्रतिशत अंतरिम राहत सितम्बर के वेतन के साथ जुड़कर मिलेगी। वित्त विभाग ने इस सम्बंध में सोमवार को आदेश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश में मूल वेतन तथा महंगाई वेतन की बीस प्रतिशत राशि अंतरिम राहत के रूप में दी जाएगी।

आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अंतरिम राहत की यह राशि न तो वेतन के रूप में समझी जाएगी और न ही भत्ते या मजदूरी के रूप में। यह राशि किसी भी सेवा लाभ अर्थात मकान किराया भत्ता, प्रतिपूर्ति भत्तों, वेतन नियमन, अवकाश नदगीकरण, पेंशन एवं ग्रेच्युटी आदि की संगणना करने के लिए नहीं गिनी जाएगी। अंतरिम राहत की राशि का समायोजन पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर से दिया जाएगा। यह राशि वेतन मद से विकलनीय होगी।

18 August, 2008

उत्तर प्रदेश में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के 14 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन को छठे केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरुप पुनरीक्षित करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि इसके तहत राज्य के सभी कर्मचारियों को पुनरीक्षित वेतनमानों का लाभ एक जनवरी 2006 से दिया जाएगा। इससे पूर्व उन्होंने यह घोषणा विधानसभा में भी की थी। पुनरीक्षित वेतनमानों के अनुरुप कर्मचारियों को नकद भुगतान 1 दिसम्बर 2008 से किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों और शिक्षकों के पुनरीक्षित वेतनमानों के राज्य सरकार ने भारतीय सेवा के प्रशासनिक अवकाश प्राप्त अधिकारी जगमोहन लाल बजाज की अगुवाई में एक समिति गठित की है। राज्य नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आलोक रंजन और वित्त सचिव बी।एन. दीक्षित इस समिति के सदस्य तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव अजय अग्रवाल सदस्य सचिव होंगे। समिति अपनी रिपोर्ट तीन माह में देगी। इस कदम से राजकोष पर 5179 करोड रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा जिसमें से 3789 करोड रुपए वेतन के मद में तथा 1400 करोड रुपए पेंशन मद में खर्च होगा।

04 August, 2008

फिर जिंदा हुया, रिटायरमेंट की उम्र 62 साल करने का प्रस्ताव

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का खाका तैयार कर रही सरकार के सचिवों की कमेटी ने, केंद्रीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से 62 वर्ष करने की सिफारिश की है। इस बारे में रिपोर्ट कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री को भेजी गई है। आगामी हफ्तों में केबिनेट में इस पर विचार हो सकता है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने ऐसी ही कोशिश पिछले साल भी की थी, लेकिन तब वाम दलों के विरोध की वजह से उसने हाथ पीछे खींच लिए थे। लेकिन अब वाम दलों द्वारा सरकार से नाता तोड़ने के बाद हरकत में आई सरकार रिटायर हो रहे कर्मचारियों को तोहफा देने की तैयारी में है। कुछ दिनों में बढ़े हुए वेतन सिफारिशों के चलते खजाने पर बढ़े बोझ को पूरा करने के लिए रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का रास्ता उपयुक्त समझा जा रहा है।

हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार सचिवों की समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि इससे आगामी दो वर्षों तक रिटायर हो रहे कर्मचारियों के पेंशन बोझ से सरकार बची रहेगी।

28 July, 2008

आठ लाख बैंक कर्मियों को पेंशन!?

देशभर के करीब आठ लाख बैंक कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए भारतीय बैंक संघ ने अपनी सहमति दे दी है। पेंशन तय करने के लिए मूल वेतन का निर्धारण होने के बाद इन सभी कर्मचारियों को पेंशन दी जाएगी। यह निर्णय पिछले सप्ताह मुंबई में हुई यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन और भारतीय बैंक संघ की बैठक में लिया गया है।

देश भर में करीब बारह लाख बैंक कर्मचारियों में करीब दस प्रतिशत अधिकारी हैं। करीब चार लाख कर्मचारियों और अधिकारियों को पेंशन सुविधा है, लेकिन बाकी आठ लाख कर्मचारी अभी भी इससे वंचित हैं। बैंकों की समस्याओं के निस्तारण के लिए सरकार द्वारा गठित भारतीय बैंक संघ ने यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस को पेंशन के लिए आश्वस्त किया है।

यूपी बैंक इम्पलाइज यूनियन के वाइस प्रेसीडेंट अनिल सोनकर के अनुसार, सात अगस्त को मुंबई में पेंशन देने के लिए मूल वेतन के निर्धारण सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। इसके बाद लगभग सभी बैंक कर्मचारियों को पेंशन सुविधा का लाभ मिल सकेगा। इसके पूर्व नवम्बर 1993 में पेंशन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लायी गई थी।

13 May, 2008

कर्मचारियों को गोपनीय रिपोर्ट के बारे में बताना जरूरी

सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण तथा दूरगामी फैसले में उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार, १२ मई को कहा कि अधिकारियों द्वारा, अपने कर्मचारियों को वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) के बारे में अवश्य सूचित करना चाहिए ताकि वह उसके खिलाफ सक्षम अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत कर सके। न्यायमूर्ति एचके सेमा और न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू की पीठ ने देव दत्त की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि कोई भी नियम अथवा सरकारी निर्देश अधिनियम 14 या संविधान के किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं कर सकता क्योंकि संविधान सर्वोपरि है। देव दत्त की याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति काटजू ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 26 नवम्बर 2001 के उस फैसले को दरकिनार कर दिया जिसमें उसने याचिकाकर्ता की याचिका को अस्वीकार करते हुए उसे सीमा सड़क इंजीनियरिंग सेवा में अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति देना अस्वीकार कर दिया था।

पीठ ने कहा कि यह फैसला देते हुए कोर्ट प्राकृतिक न्याय के नए सिद्धांत का विकास कर रहा है। उन्होंने कहा-‘‘पारदर्शिता के लिए जरूरी है कि सैन्यकर्मियों को छोड़कर सरकारी कर्मचारियों के एसीआर को तर्कसंगत अवधि के भीतर उन्हें अवश्य बता देना चाहिए और ऐसा फैसला देकर हमने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का विकास कर रहे हैं।’’ फैसले में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि किसी सरकारी कर्मचारी की वार्षिक रिपोर्ट में प्रतिकूल प्रविष्टि होने पर ही उसे सूचित किया जाए बल्कि उसे हर उस प्रविष्टि की जानकारी दी जानी चाहिए चाहे वह खराब, सामान्य अथवा बहुत अच्छी हो ताकि सक्षम अधिकारी के समक्ष वह अपना पक्ष रख सके। ऐसा नहीं होने पर यह निष्पक्षता की नीति का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रविष्टि करने वाले से ऊंचे अधिकारी को ही कर्मचारी के एसीआर पर आगे की सुनवाई करनी चाहिए।

दत्त की याचिका स्वीकार कर लिये जाने से उन्हें अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति मिल जाएगी। हालांकि उनके अवकाश ग्रहण कर लेने के कारण उन्हें पेंशन बढ़ोतरी का लाभ के साथ ही बकाए राशि का आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि दत्त को 22 फरवरी 1988 को कार्यकारी अभियंता के पद पर पदोन्नत किया गया था और उन्हें 21 फरवरी 1993 को अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति किया जाना था। लेकिन इस पद पर पदोन्नति पाने के लिए उनके वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में बहुत अच्छी प्रविष्टि होनी चाहिए थी जबकि उनकी रिपोर्ट में एक अच्छी रिपोर्ट दर्ज होने के कारण उन्हें पदोन्नत नहीं किया गया।

09 May, 2008

अफसरों को, सेना रास नहीं आ रही

बढ़ते तनाव, प्राइवेट सेक्टर की अपेक्षा बेहद कम तनख्वाह और सुविधाओं के चलते अब अफसरों को सेना रास नहीं आ रही है। इसकी बानगी तब देखने को मिली जब रक्षा मंत्री ऐ.के. एंटनी ने राज्यसभा में सेना छोड़ रहे अधिकारियों का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 से 2007 के बीच कम से कम 2076 आर्मी अधिकारियों ने समय से पहले ही रिटायरमेंट ले लिया। इस दौरान रक्षा सेवा में नौकरी छोड़ने का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है।

वायुसेना में इस दौरान समय से पहले सेवानिवृत्तियों और इस्तीफों की संख्या 793 थी जबकि नौसेना में यह आंकड़ा 780 तक पहुंचा गया। राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ने ये बातें कहीं। उन्होंने बताया कि 2003 से 2007 के बीच 3474 आर्मी अधिकारियों ने समय से पहले रिटायरमेंट या इस्तीफे के लिए आवेदन किया था। इनमें से 2076 अधिकारियों को नौकरी छोड़ने की अनुमति दी गई। जबकि एयरफोर्स में कुल 1269 अधिकारियों ने नौकरी छोड़ने के लिए आवेदन किया था। वहीं, नेवी में नौकरी छोड़ने के इच्छुक अधिकारियों की संख्या 954 थी।

उन्होंने कहा कि रक्षा अधिकारियों ने नौकरी छोड़ने के पीछे कई कारण बताए हैं। बर्खास्तगी, बेहद संवेदनशील आधार, निम्न चिकित्सीय श्रेणी और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में असफल रहने के आधार पर सभी को नौकरी छोड़ने की अनुमति दी गई है। प्राइवेट सेक्टर में उच्च वेतनमान और अधिक सुविधाएं भी सैन्यकर्मियों के नौकरी छोड़ने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। सैन्य बलों में सेवा शर्तों को देखते हुए वेतनमान काफी कम है जबकि बदल रहे सामाजिक परिवेश और टूटते संयुक्त परिवार के कारण जवानों की मूलभूत आवश्यकताओं को लेकर समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में कम आयु में अवकाश प्राप्त करने और पेंशन पर शेष जीवन का गुजारा कठिन हो जाता है।

28 April, 2008

स्वैच्छिक सेवानिवृति स्वत: अधिकार नहीं कर्मचारी का

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी को केवल इस आधार पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने का अधिकार नहीं मिल जाता, क्योंकि इस योजना के तहत उसे पहले पेशकश की गई थी। इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की कोई योजना लाई जाती है तो यह कर्मचारी के लिए एक पेशकश होती है, लेकिन नियोक्ता के लिए यह बाध्यकारी नहीं है।

जस्टिस एसबी सिन्हा और वीएस सिरपुरकर की बेंच ने National Textile Corporation (एनटीसी) की याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, ‘कर्मचारी को सिर्फ इसलिए वीआरएस लेने का कानूनी हक नहीं मिल जाता कि उसे इसके एवज में कुछ अतिरिक्त वित्तीय लाभ हासिल होगा।’ कोर्ट ने यह भी कहा है कि वरस का दावा तभी किया जा सकता है, जब कर्मचारी सेवा में हो, न कि पेंशन पात्रता के बाद।

मामला यह था कि एनटीसी के कर्मचारी एमआर जाधव ने VRS योजना के तहत मई २००० में आवेदन किया था। एनटीसी ने वित्तीय समस्याओं का हवाला देते हुए सितंबर २००० में जाधव को स्वैच्छिक सेवालिवृति देने में असमर्थता जताई थी। जाधव ने २००१ में पेंशन पात्रता हासिल कर ली थी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जाधव के दावे को सही ठहराते हुए एनटीसी को उसे सेवानिवृति देने के निर्देश दिए थे। एनटीसी ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

29 March, 2008

सरकारी नौकरी छोड़ने के फायदे

छठे वेतन आयोग की एक और सिफारिश सरकार के लिए मुसीबत बन सकती है। सेवा निवृत्ति से पहले नौकरी छोड़ना केंद्रीय कर्मचारियों के लिए फायदेमंद हो सकता है लेकिन, इससे सरकारी कम्पनियों में काम करने वाले कर्मचारी मुश्किल से ही बचेंगे। छठे वेतन आयोग का सुझाव है कि 15 साल से ज्यादा लेकिन 20 साल से कम की सेवा के बाद खुद सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों को आखिरी वेतन का 80 गुना सेवानिवृत्ति लाभ के तौर पर दिया जाए। साथ ही उन्हें ‘सेवा आनुतोषिक’ (सर्विस ग्रैच्युटी) और ‘मृत्यु और सेवानिवृत्ति आनुतोषिक’ (डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रैच्युटी) जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी।

इसके साथ ही 20 साल की सेवा पूरी करके नौकरी छोड़ने वालों को आखिरी तनख्वाह का 50 फीसदी पेंशन मिलेगा। पहले इसके लिए 33 साल नौकरी करने की शर्त थी। जानकारों का मानना है कि इन सुविधाओं के चलते मध्यस्तरीय सरकारी कर्मचारी नौकरियां छोड़ेंगे। कुछ जानकार ऐसे भी हैं जिनकी राय में अब प्रतिभाशाली सरकारी कर्मचारी निजी नौकरियों की तरफ भागेंगे।

इस बात की काफी संभावना है कि वीआरएस और पेंशन से जुड़े वेतन आयोग के सुझाव मान लिए जाएंगे क्योंकि इससे कर्मचारी भी खुश होंगे और सरकारी क्षेत्र से लोगों को कम करने का सरकार का मकसद भी पूरा होगा। वैसे भी वेतन आयोग ने सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाकर 62 साल करने की मांग खारिज कर दी है।

25 December, 2007

अस्थायी कर्मियों के आश्रितों को पेंशन नहीं

अस्थायी कर्मचारी के आश्रित परिवार पेंशन पाने के हकदार नहीं हैं। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण [कैट] ने एक रेल मजदूर की विधवा की याचिका पर यह फैसला सुनाया।

अधिकरण की सदस्य मीरा छिब्बर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कर्मचारी की विधवा को पेंशन देने का सवाल तब पैदा होता जबकि उसके पति को स्थायी कर दिया गया होता। अस्थायी कर्मचारी का दर्जा हासिल होने से परिजन पेंशन के हकदार नहीं हो सकते। यह फैसला कुन्नू राम की विधवा सुबालया देवी की याचिका पर सुनाया गया। उसने अनुरोध किया था कि रेलवे को उसकी पारिवारिक पेंशन जारी करने के निर्देश दिए जाएं।

सुबालया ने आरोप लगाया था कि कुन्नू से कनिष्ठ दो कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया जबकि उसे टेस्ट के लिए बुलाया ही नहीं गया। रेलवे ने इस याचिका का यह कहते हुए विरोध किया था कि दिहाड़ी मजदूरों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा उनकी वरीयता के क्रम में नहीं दिया जाता। यह दर्जा दिया जाना पदों की उपलब्धता, मजदूर की योग्यता और अर्हता पर निर्भर करता है।

18 December, 2007

सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल

केंद्रीय कर्मचारियों की जेब भारी करने के साथ-साथ छठा वेतन आयोग उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल करने की सिफारिश पर विचार कर रहा है। श्रम और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ सेवानिवृत्ति आयु में दो साल की बढ़ोतरी करने की राय आयोग के आला अधिकारी को देने की तैयारी में हैं। इस सलाह के पीछे उनकी दलील है कि इस तरह सरकार पेंशन बिल पर पड़ने वाला बोझ कम से कम दो साल के लिए टाल सकती है।

संभावित वेतन वृद्धि की वजह से सरकार पर पड़ने वाले बोझ से निपटने के तरीके तलाशने के तहत ही आयोग सेवानिवृत्ति से जुड़े पहलू पर विचार कर रहा है। इस सिलसिले में हिसाब-किताब लगा रहे विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सेवानिवृत्ति आयु में दो साल की बढ़ोतरी से सरकार को काफी राहत मिल सकती है। ऐसा नहीं करने से सरकार को 'दोहरे आर्थिक बोझ' से दो-चार होना पड़ेगा।

एक ओर आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद वेतन वृद्धि से पड़ने वाला वित्तीय भार तो होगा ही, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन व उससे जुड़े तमाम आर्थिक दावों की लंबी फेहरिस्त भी होगी। वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों के साथ चंद रोज पहले हुई चर्चा में इस मामले का बड़ी गंभीरता से आकलन किया गया। वित्त मंत्रालय मान रहा है कि भविष्य में पेंशन बिल के भुगतान पर होने वाला खर्च वेतन के चलते पड़ने वाले आर्थिक बोझ से किसी तरह कम नहीं होगा। इसके लिए विशेषज्ञ अपने आंकड़े भी वेतन आयोग तक पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि 2007-08 में केंद्रीय कर्मचारियों का पेंशन बिल वेतन बिल से ऊपर निकल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार 2006-07 में पेंशन और उससे जुड़ी अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने पर सरकार को 39,074 करोड़ रुपये का भार पड़ा था। वेतन संबंधी भुगतान से पड़ने वाला बोझ 40,047 करोड़ रुपये का था। अगर इन आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो मौजूदा वित्तीय वर्ष में पेंशन पर होने वाला खर्च निश्चित रूप से केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन के खर्च से आगे निकल जाएगा।

वेतन आयोग को बताया गया है कि रेल कर्मियों के मामले में यह तो हो ही रहा है। अब अगर इन विशेषज्ञों की दलीलें आयोग के गले उतरीं तो 60 साल पूरा करके सेवानिवृत्ति की दहलीज पर खड़े कर्मचारियों को दो साल और सेवाएं देनी होंगी।

04 December, 2007

सरकारी कर्मचारी की अविवाहित पुत्री को जीवनपर्यन्त पेंशन

केन्द्र सरकार ने किसी कर्मचारी की मौत पर उसकी अविवाहित पुत्रियों को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन के नियमों में ढील दी है। अब उम्र सीमा 25 साल से बढाकर जीवनपर्यन्त कर दी गयी है।

केन्द्र सरकार के कानून में अभी तक केवल 25 साल की उम्र तक अविवाहित बेटियों के लिये यह प्रावधान था।
एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि अगर वह 25 साल से पहले विवाह कर लेती है तो उसकी पारिवारिक पेंशन बंद हो जायेगी।

लेकिन संचार विभाग के दिवंगत कर्मचारी की 65 वर्षीय अविवाहित कमलजीत कौर के मामले ने सरकार को कानून की समीक्षा करने का मौका दिया। अब कानून यह होगा कि अगर सरकारी कर्मचारी की पुत्री विवाह नहीं करते तो वह जीवनपर्यन्त पेंशन की हकदार होगी।
भाषा

28 November, 2007

नई पेंशन का पैसा बाजार में लगेगा

नई पेंशन योजना में अंशदान कर रहे सरकारी कर्मचारियों के पेंशन कोष को अधिक फल देने वाला बनाने के लिए उसे शेयर बाजार में निवेश करने का इंतजार अगले वर्ष जून में समाप्त हो जाएगा। शुरू में इससे तीन लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ होगा।

पहली जनवरी 2004 से लागू इस योजना का करीब 2000 रुपए का कोष इस समय केंद्र सरकार के खाते में पड़ा है जिस पर कर्मचारियों को आठ प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज मिलता है जो बाजार में निवेश पर मिलने वाले संभावित प्रतिफल से कम बताई जा रही है।

नई पेंशन योजना के पैसे को बाजार में निवेश करने की व्यवस्था बनाने और कर्मचारियों के रिकॉर्ड रखने के लिए पीएफआरडीए ने राष्ट्रीय प्रतिभूति डिपाजिटरी लि. (एनएसडीएल) को केंद्रीय अभिलेख संरक्षक एजेंसी (सीआरए) के साथ कल एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

पीएफआरडीए मे अध्यक्ष डी स्वरूप और एनएसडीएल के प्रमुख सीबी भावे ने उम्मीद जताई की सीआरए पहली जून से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के कोष के संबंध में अपना काम शुरू कर सकती है। उन्होंने कहा कि उसके साथ ही उनके पेंशन कोष के निवेश के पूरे प्रबंध कर लिए जाने की उम्मीद है।