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17 September, 2008

केंद्र सरकार ने महिला कर्मचारियों को दोहरा तोहफा दिया

केंद्र सरकार ने अपनी महिला कर्मचारियों को दोहरा तोहफा दिया है। महिलाओं की मैटरनिटी अवकाश तो बढ़ाया गया ही है , साथ ही बच्चों की देख-भाल करने के लिए दो साल की सवेतन अवकाश देने का फैसला भी किया है। यह नियम 1 सितंबर से लागू होगा।

कुछ ख़ास बातें हैं:
  • महिला कर्मचारियों को 2 बच्चों के लिए 135 दिनों की जगह 180 दिनों की मैटरनिटी अवकाश मिलेगा
  • बच्चों की देख-भाल के लिए पूरे सेवाकाल में कभी भी दो साल (730 दिन) की सवेतन अवकाश ले सकेंगी।
  • शिशु लालन-पालन अवकाश में कर्मचारी की वरिष्ठता भी प्रभावित नहीं होगी।
  • एक बच्चा हो तो भी ले सकते हैं दो साल की छुट्टी। खास बात यह कि ये छुट्टियां मैटरनिटी अवकाश से अलग होंगी।
  • इस तरह अगर दोनों छुट्टियां साथ ली जाएं, तो एक साथ ढाई साल तक बच्चों के साथ रह सकती हैं।
  • महिलाएं ये छुट्टियां बच्चों के 18 साल के होने तक कभी भी ले सकेंगी। वजह कोई भी हो सकती है, बच्चों के इम्तिहान हों या उनकी बीमारी।

13 May, 2008

कर्मचारियों को गोपनीय रिपोर्ट के बारे में बताना जरूरी

सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण तथा दूरगामी फैसले में उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार, १२ मई को कहा कि अधिकारियों द्वारा, अपने कर्मचारियों को वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) के बारे में अवश्य सूचित करना चाहिए ताकि वह उसके खिलाफ सक्षम अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत कर सके। न्यायमूर्ति एचके सेमा और न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू की पीठ ने देव दत्त की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि कोई भी नियम अथवा सरकारी निर्देश अधिनियम 14 या संविधान के किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं कर सकता क्योंकि संविधान सर्वोपरि है। देव दत्त की याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति काटजू ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 26 नवम्बर 2001 के उस फैसले को दरकिनार कर दिया जिसमें उसने याचिकाकर्ता की याचिका को अस्वीकार करते हुए उसे सीमा सड़क इंजीनियरिंग सेवा में अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति देना अस्वीकार कर दिया था।

पीठ ने कहा कि यह फैसला देते हुए कोर्ट प्राकृतिक न्याय के नए सिद्धांत का विकास कर रहा है। उन्होंने कहा-‘‘पारदर्शिता के लिए जरूरी है कि सैन्यकर्मियों को छोड़कर सरकारी कर्मचारियों के एसीआर को तर्कसंगत अवधि के भीतर उन्हें अवश्य बता देना चाहिए और ऐसा फैसला देकर हमने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का विकास कर रहे हैं।’’ फैसले में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि किसी सरकारी कर्मचारी की वार्षिक रिपोर्ट में प्रतिकूल प्रविष्टि होने पर ही उसे सूचित किया जाए बल्कि उसे हर उस प्रविष्टि की जानकारी दी जानी चाहिए चाहे वह खराब, सामान्य अथवा बहुत अच्छी हो ताकि सक्षम अधिकारी के समक्ष वह अपना पक्ष रख सके। ऐसा नहीं होने पर यह निष्पक्षता की नीति का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रविष्टि करने वाले से ऊंचे अधिकारी को ही कर्मचारी के एसीआर पर आगे की सुनवाई करनी चाहिए।

दत्त की याचिका स्वीकार कर लिये जाने से उन्हें अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति मिल जाएगी। हालांकि उनके अवकाश ग्रहण कर लेने के कारण उन्हें पेंशन बढ़ोतरी का लाभ के साथ ही बकाए राशि का आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि दत्त को 22 फरवरी 1988 को कार्यकारी अभियंता के पद पर पदोन्नत किया गया था और उन्हें 21 फरवरी 1993 को अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति किया जाना था। लेकिन इस पद पर पदोन्नति पाने के लिए उनके वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में बहुत अच्छी प्रविष्टि होनी चाहिए थी जबकि उनकी रिपोर्ट में एक अच्छी रिपोर्ट दर्ज होने के कारण उन्हें पदोन्नत नहीं किया गया।

23 February, 2008

घरेलू कामगारों के लिए भी न्यूनतम मजदूरी तय होगी

केंद्र सरकार घरों में काम करने वाले कामगारों व सहायकों को भी निर्धारित मजदूरी, चिकित्सा लाभ और अवकाश का अधिकार दिलाने की कवायद कर रही है। इसके लिए जल्दी ही कानून बनाया जाएगा। प्रस्तावित घरेलू कामगार पंजीयन (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम, 2008 का मसौदा राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने तैयार किया है। फिलहाल यह महिला व बाल विकास मंत्रालय के पास विचाराधीन है।

प्रस्तावित कानून के दायरे में सभी पार्ट टाइम व फुल टाइम घरेलू कामगार, उनकी सेवा लेने वाले और रोजगार एजेंसियां आएंगी।
ये हैं घरेलू कार्य : बागवानी, बच्चों को संभालना, खाना पकाना, घर की साफ-सफाई, कपड़े धोना, बीमार व वृद्धों की देखभाल करना आदि।
सेवा लेने वाले का दायित्व : कामगार के काम शुरू करने के एक माह के भीतर जिला बोर्ड में पंजीयन कराना।
यह करेगा जिला बोर्ड
: न्यूनतम मजदूरी तय करना, विवादों का निराकरण तथा कानून पालन के लिए छापे की कार्रवाई।
कामगार का दायित्व
: स्थान बदलने पर संबंधित बोर्ड को सूचना देकर काम की नई जगह की जानकारी देना।
कामगार को क्या मिलेगा
: पंजीयन कराने पर पहचान-पत्र और जिला बोर्ड द्वारा अपने फंड से दिए जाने वाले लाभ का हक। काम खत्म करने और अगले दिन शुरू करने के बीच विश्राम के लिए कम से कम दस घंटे का समय। चिकित्सा के लिए सालाना 200 रुपए।
साल में मजदूरी सहित 15 छुटिट्यां।
नियमानुसार न्यूनतम मजदूरी।

पालन न कराने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों के संचालकों को न्यूनतम तीन माह का कारावास। कामगारों की सेवा लेने वालों को 2,000 रुपए तक का जुर्माना।