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03 September, 2008

सशस्त्र बल छठे केंद्रीय वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के इच्छुक नहीं

सशस्त्र बलों ने रक्षा मंत्री एके एंटनी को सूचित कर दिया है कि उनके दर्जे की बहाली और वेतन ढांचे में समानता लाने के लिये ‘विसंगतियों’ को हटाये बिना वे छठे केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) की रिपोर्ट ‘लागू करने के प्रति इच्छुक नहीं’ हैं। रक्षा मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों के अनुसार सैन्य प्रमुखों की समिति (सीआ॓एससी) के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री एके एंटनी और शीर्ष अधिकारियों के समक्ष विसंगतियों के बारे में एक प्रस्तुतीकरण दिया क्योंकि इन्हें अधिकारियों के लिए आई सीपीसी रिपोर्ट की अधिसूचना में रखा गया है। हालांकि अधिकारियों के अधीनस्थ कर्मियों के लिए वेतनमान में बढ़ोत्तरी पर संतोष जताया गया है।

समाचारों में कहा गया है कि प्रस्तुतीकरण देखने के बाद
रक्षा मंत्री एके एंटनी ने सशस्त्र बलों को भरोसा दिलाया है कि वह ‘विसंगितयों’ को सरकार के समक्ष रखेंगे और उन्हें दूर करने के लिए विचार करेंगे। सीआ॓एससी के अध्यक्ष और नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरेश मेहता की रक्षा मंत्री एके एंटनी के साथ गत शुक्रवार शाम हुई बैठक के चलते यह प्रस्तुतीकरण दिया गया। ‘विसंगतियां’ दूर नहीं होने के कारण सरकारी आदेश पर रोक चाहने के लिए सीपीसी की रिपोर्ट अधिसूचित किये जाने के कुछ ही घंटे पहले मेहता ने एंटनी से मुलाकात की थी।

01 September, 2008

संशोधित वेतन ढांचा लागू होते ही बच्चों के शिक्षा भत्तों में होगी बढ़ोत्तरी

बच्चों की पढ़ाई पर भारी खर्च का बोझ उठाते केंद्र सरकार कर्मचारियों को संशोधित वेतन ढांचा लागू होते ही काफी राहत मिल जाएगी। संशोधित वेतन ढांचा 1 सितम्बर से लागू होने जा रहा है। जहां एक ओर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन औसतन 21 फीसदी तक बढ़ जाएंगे, वहीं बच्चों का शिक्षा भत्ता और भी ज्यादा बढ़ जाएगा। संशोधित वेतन ढांचे पर अधिसूचना जारी हो चुकी है। जारी अधिसूचना के मुताबिक केंद्र सरकार के कर्मचारी चिल्ड्रेन एजुकेशन एलाउंस के तहत प्रति माह हर बच्चे पर खर्च की गई अधिकतम 1000 रुपये की राशि ले सकेंगे। हालांकि यह अधिकतम दो बच्चों तक सीमित है। इसके अलावा प्रत्येक बच्चे पर हास्टल सब्सिडी की सीमा मौजूदा 300 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दी गई है।

अधिसूचना में कहा गया है कि इसके अलावा संशोधित वेतन ढांचे पर महंगाई भत्ता मूल वेतन का 50 फीसदी होते ही उक्त पुनर्भुगतान स्वत: ही 25 फीसदी तक बढ़ जाएंगे। मान लें कि एक कर्मचारी को 1000 रुपये मिल रहा है तो उसे प्रति बच्चा हर महीने 1250 रुपये मिलेगा और महंगाई भत्ता मूल वेतन का 50 फीसदी होते ही हास्टल सब्सिडी बढ़कर 3750 रुपये पहुंच जाएगी। संशोधित वेतन ढांचा 1 सितम्बर से लागू हो जाएगा जिसका मतलब है कि कर्मचारियों को सितंबर से बढ़ा हुआ वेतन मिलना शुरू हो जाएगा।

बकाया राशि का 40 फीसदी हिस्से का अगले महीने भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि यह संबंधित विभागों द्वारा बकाया राशि की गणना के लिए लगने वाले समय पर निर्भर करेगा।

30 August, 2008

छठे वेतन आयोग की अधिसूचना जारी

सरकार ने छठे वेतन आयोग की संशोधित सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए नये वेतनमान से संबधित अधिसूचना जारी कर दी है। इस प्रकार से अब 1 सितंबर से लगभग 50 लाख सरकारी कर्मचारियों को बढ़े हुए वेतनमान के तहत नया वेतनमान मिलेगा। इस नए वेतनमान में सेना के जवानों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। कुछ दिन पूर्व ही केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने छठे वेतन आयोग की संशोधित सिफारिशों पर अपनी मोहर लगा दी थी जिसके बाद 29 अगस्त को इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई।

भारत सरकार के असैन्य कर्मचारियों के वेतनमान और महंगाई भत्तें 1जनवरी 2006 से प्रभावी होगा। जबकि दूसरे अन्य प्रकार के संशोधित भत्ते 1 सितंबर 2008 से मान्य होगें । सरकार ने एरियर का भुगतान दो किस्तों में करने का फैसला किया है। कर्मचारियों को वित्त वर्ष 2008-09 में एरियर की पहली किस्त का भुगतान किया जाएगा जिसमें उनकों बकाये की 40 फीसदी राशि दे दी जाएगी। कर्मचारियों को वित्त वर्ष 2009- 10 में एरियर की दूसरी किस्त का भुगतान किया जाएगा जिसमें उनकों एरियर की 60 फीसदी राशि दे दी जाएगी।

05 August, 2008

पब्लिक सेक्टर के अधिकारियों पर, निजी क्षेत्र में जाने पर पाबंदी

सार्वजनिक क्षेत्र के निदेशकों और सीईओ समेत उच्च अधिकारियों के निजी क्षेत्र में तेजी से बढ़ते पलायन पर केंद्र सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है। अब इस्तीफा देकर या रिटायरमेंट के बाद निजी कंपनियों में जाने से पहले इन अधिकारियों को सरकार से मंजूरी लेनी पड़ेगी। इस संबंध में भारी इस्पात और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय की तरफ से अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके मुताबिक अगर किसी अधिकारी ने जाने का फैसला कर लिया है तो उन्हें संबंधित विभाग के साथ समझौते या बांड के अनुसार सरकार के नुकसान की भरपाई करनी होगी।

कंपनी से इस्तीफा देने या फिर सेवानिवृत्त होने वाले सीईओ सहित कंपनी के कार्यरत निदेशक एक साल के अंदर बिना सरकार की अनुमति के निजी कंपनी में नहीं जा सकते, चाहे वह देशी हो या विदेशी कंपनी। केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ परामर्श के बाद सेवा नियमों में इस बदलाव से 'बागियों' को फिर से सार्वजनिक क्षेत्र में अल्पकालिक और पूर्णकालिक निदेशक के पद आने पर भी रोक लग गई है। हालांकि अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि अगर किसी अधिकारी ने पिछले पांच साल तक नए नियोक्ता के साथ आधिकारिक तौर पर काम नहीं किया हो तो उसे ज्वाइनिंग की अनुमति मिल सकती है।

सरकार अनुमति देने से पहले यह भी देखेगी कि निजी क्षेत्र से उनको जो ऑफर दिया जा रहा है वह इंडस्ट्री की मौजूदा स्केल से बहुत अधिक न हो। साथ ही अगर आवेदन के 30 दिनों के अंदर सरकार से अनुमति नहीं मिलती तो वे निजी क्षेत्र में नई नौकरी ज्वाइन कर सकते हैं। सरकार ने यह फैसला वित्त, पेट्रोलियम और अन्य मंत्रालयों के अधिकारियों के निजी क्षेत्र में पलायन के रुख को देखते हुए लिया है। आरोप है कि ये लोग वहां जाकर अपने नए नियोक्ताओं के लिए लॉबिंग करने में जुटे हुए हैं।