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01 October, 2008

Arrears का पूरा टैक्स एक साथ नहीं

केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद मिलने वाले बकाया की कुल रकम पर एक साथ टैक्स नहीं देना होगा। चालू कारोबारी साल में उन्हें बकाया की जो रकम मिलेगी, उस पर इस साल टैक्स लगेगा। फिर अगले कारोबारी साल में एरियर की जो रकम मिलेगी, उस पर अगले कारोबारी साल में टैक्स लगेगा। 

उल्लेखनीय है कि सरकार ने पहले कहा था कर्मचारियों को मिलने वाले एरियर की कुल रकम पर टैक्स इसी साल लगेगा। पर अब वित्त मंत्रालय ने एक परिपत्र जारी कर नई बात कही है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते वक्त सरकार ने कहा था कि कर्मचारियों को चालू कारोबारी साल में एरियर की कुल रकम का 40 परसेंट दिया जाएगा और बाकी 60 फीसदी रकम अगले कारोबारी साल में दिया जाएगा। 

04 September, 2008

नए वेतनमान के एरियर्स की कुल राशि पर, इसी साल ही टैक्स कट जायेगा!

केंद्र सरकार के जो कर्मचारी अगले महीने अपने एरियर का 40 प्रतिशत पाने की आस में हैं, उनके लिए बुरी खबर है। सरकार ने इस राशि के साथ ही इस साल के एरियर की पूरी रकम पर टैक्स लगाने का फैसला किया है। यानी कर्मचारियों को बाकी 60 प्रतिशत एरियर अगले साल (वर्तमान वित्त वर्ष) में मिलेगा, लेकिन उनका टैक्स फिलहाल कट जाएगा।

सरकार के इस फैसले से ज्यादातर कर्मचारियों के 40 प्रतिशत बकाया की राशि टैक्स में ही कट जाएगी। इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान वरिष्ठ नौकरशाहों को होगा, क्योंकि उन्हें टैक्स के साथ सरचार्ज भी अदा करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि सरचार्ज 10 लाख या इससे ज्यादा की आय पर लगता है।

अपडेट-1: नवभारत टाइम्स की ख़बर आयी है कि केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी के बाद उनकी बकाया (एरियर) राशि पर पूरा इनकम टैक्स काटने पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। प्रस्ताव है कि इसी साल पूरी बकाया राशि पर इनकम टैक्स लिया जाए। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के उच्चाधिकारी के अनुसार अभी इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है और अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। उम्मीद है कि अगले महीने तक इस पर निर्णय ले लिया जाएगा। इसके बाद सीबीडीटी नोटिस जारी करेगी।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार कोशिश यह की जा रही है कि बकाया राशि की पहली किस्त दीपावली से पहले केंदीय कर्मचारियों को दे दी जाए। दूसरी किस्त अप्रैल या मई में दी जाए। पूरी बकाया राशि पर इनकम टैक्स काटने पर यह समस्या सामने आ रही है कि इनकम टैक्स की दर औसतन 30 फीसदी की होगी। अगर बकाया राशि में 30 फीसदी का इनकम टैक्स काट दिया जाए, तो कर्मचारियों पहली किस्त में अनुमान से काफी कम राशि मिलेगी।

इनकम टैक्स विशेषज्ञ रघु मारवाह का कहना है आयकर कानून के तहत सरकार चाहे तो बकाया राशि पर पूरा इनकम टैक्स ले सकती है। बेशक यह राशि एक साल या चार साल बाद कर्मचारियों को दी जाए।

अपडेट-2: दैनिक भास्कर की ख़बर है - केंद्र ने बुधवार को स्पष्ट कहा है कि छठे वेतन आयोग के तहत इस वित्त वर्ष में मिलने वाले 40 फीसदी एरियर पर ही आयकर काटा जाएगा। एक वर्ग पूरे एरियर पर आयकर काटे जाने की बात कर रहा था। इसलिए एरियर पर आयकर को लेकर कर्मचारियों में संशय की स्थिति बन गई थी। सरकार द्वारा पिछले माह जारी अधिसूचना के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष में केंद्रीय कर्मचारियों को बकाया वेतन का 40 फीसदी भुगतान किया जाना है। बाकी राशि अगले वित्त वर्ष दी जाएगी।

13 August, 2008

सैन्यकर्मियों के लिए नि:शुल्क हवाई यात्रा

देश के कोने-कोने में तैनात सैन्यकर्मियों को उनके परिवारजनों से मिलने का मौका देने के लिए एक निजी एयरलाइंस ने उन्हें जीरो किराएपर हवाई यात्रा करने की योजना की घोषणा की है। वायु सेना अध्यक्ष एयरचीफ मार्शल फली होमी मेजर को ‘फ्रीडम टू फ्लाई’ स्कीम के तहत आज यहां पहला टिकट स्पाइसजेट ने भेंट किया जिसमें मूल किराया पूरी तरह माफ होगा और सैन्यकर्मियों को सिर्फ टैक्स और अन्य शुल्क देने होंगे। इस नायाब सुविधा का फायदा देश के फौजी पंद्रह अगस्त से उठा सकेंगे और स्पाइसजेट अपनी रोजाना चलने वाली 94 उड़ानों में हर उड़ान पर दस टिकट सशस्त्र बलों के लिए बुक रखेगी।

फ्रीडम टू फ्लाई का टिकट हासिल करते हुए एयरचीफ मार्शल मेजर ने कहा कि यह योजना देश में दूर दराज के इलाकों में तैनात उन फौजियों के लिए सुखद खबर है जो जल्दी से जल्दी अपने परिवारजनों से मिलने के इच्छुक होते हैं। स्पाइसजेट की इस योजना से देश में पंद्रह मंजिलों के सैन्यकर्मी लाभान्वित होंगे जहां ये एयरलाइंस अपनी उड़ाने चला रही है। स्पाइसजेट के निदेशक किशोर गुप्ता ने कहा कि इस योजना से जटिल शर्तें नहीं जोड़ी गयी हैं ताकि हर फौजी इस लाभ को आसानी से उठा सके। उड़ान से दो घंटे पहले भी सैन्यकर्मी अपना टिकट बुक करा सकता है। इस योजना में जवान और अफसर का भेदभाव नहीं रखा गया है।

20 November, 2007

भारतीय कर्मचारियों सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं

भारतीय कर्मचारी अपनी सैलरी पर एशिया में सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं। इंडियन एम्प्लॉईज की ग्रॉस सैलरी का 29.1 परसेंट हिस्सा टैक्स और सोशल सिक्युरिटी कॉन्स्ट्रिब्यूशन के रूप में सरकारी खजाने में चला जाता है। एशिया में सैलरी पर सबसे कम टैक्स सऊदी अरब में लगता है। वहां सिर्फ 5 परसेंट टैक्स लिया जाता है। वह भी इनकम टैक्स नहीं, सोशल सिक्युरिटी के रूप में। दुनिया में बेल्जियम में सबसे ज्यादा 50.5 परसेंट टैक्स काटा जाता है।

इंटरनैशनल एचआर कंसल्टेंसी फर्म मर्सर ने दुनिया के 32 देशों में इंडिविजुअल टैक्स की तुलना करके सोमवार को रिपोर्ट जारी की। इसके लिए पर्सनल टैक्स स्ट्रक्चर, ऐवरेज सैलरी और मैरिटल स्टेटस को प्रमुखता से आंका गया। सर्वे से पता चला कि कुंआरे कर्मचारियों के मुकाबले शादीशुदा कर्मचारी कम टैक्स देते हैं। लेकिन सभी देशों में यह स्थिति नहीं है। भारत, ब्राजील और तुर्की में शादीशुदा कर्मचारियों को उतना ही टैक्स देना पड़ता है, जितना कुंआरे कर्मचारियों को।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार दुनिया में कुंआरे कर्मचारियों से सबसे कम टैक्स लेने वालों में सऊदी अरब के बाद रूस (13 % ), हांगकांग (14.2 % ), ताइवान (14.6 % ) और सिंगापुर (16.4 % ) हैं। एशिया की लिस्ट में भारत का नंबर सबसे नीचे है यानी बाकी एशिया देशों के मुकाबले भारत में कर्मचारी ज्यादा टैक्स देते हैं। ग्लोबल लिस्ट में भारत के कुंआरे एम्प्लॉई 14वें नंबर पर, शादीशुदा (बिना बच्चे वाले) 20वें नंबर पर और दो बच्चे वाले शादीशुदा कर्मचारी 22वें नंबर पर हैं। हंगरी (30वां नंबर) में 48.5 % , डेनमार्क (31वां नंबर) में 48.6 % और बेल्जियम (32वां नंबर) में 50.5 % टैक्स और सामाजिक सुरक्षा योगदान ग्रॉस इनकम से वसूला जाता है।