रेलवे बोर्ड ने रेल कर्मचारियों और अधिकारियों के ड्यूटी के दौरान टी-शर्ट पहनने पर पाबंदी लगा दी है। आदेश में कहा गया है कि ड्यूटी के दौरान आधी और पूरी बाजू की शर्ट पैंट के अंदर होनी चाहिए। फिलहाल ड्यूटी पर अपनी असली वर्दी पहनकर पहुंचें।
रेलवे बोर्ड की ओर से जारी आदेश को डिवीजन के विभिन्न ब्रांच अधिकारियों को पत्र जारी कर आदेश की पालना करने को कहा गया है। इसके अलावा यदि कोई हेडक्वार्टर या रेलवे बोर्ड का अधिकारी इंस्पेक्शन करने आता है तो अधिकारी पूरी बाजू की कमीज पहनकर ड्यूटी पर पहुंचें। उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार हेडक्वार्टर अधिकारियों के निरीक्षण दौरान देखा गया कि कई रेलकर्मी व अधिकारी बगैर कॉलर की टी-शर्ट पहनकर ड्यूटी पर तैनात थे, जिससे आम जनता रेल कर्मचारी और अधिकारी को नहीं पहचान सकती। लाइन, स्टेशन व अन्य स्टॉफ अपनी असली वर्दी में ड्यूटी पर तैनात होना चाहिए। इसीलिए रेलवे बोर्ड ने यह आदेश जारी कर ड्यूटी के दौरान टी-शर्ट पहनने पर पाबंदी लगा दी है।
इधर, कई रेलकर्मियों का कहना है कि कर्मचारी अपनी असली वर्दी की बजाय खुद अपनी ओर से बाजार से बढ़िया कपड़ा लेकर वर्दी सिलाते हैं। ऐसी वर्दी पहनने वाला कर्मचारी अधिकारी लगता है। वहीं, रेल अधिकारी का कहना है कि कर्मचारी और अधिकारी अपनी 'प्रॉपर' वर्दी पहनें। गर्मी में कई कर्मचारी ब्रांडेड कंपनियों की बगैर कॉलर की टी-शर्ट पहनकर नौकरी करने दफ्तर पहुंचते हैं, जो नियम के विपरीत है।
31 October, 2008
30 October, 2008
अगले दस दिन में आपकी नौकरी जा सकती है!
देश के प्रमुख वाणिज्य उघोग मंडल ASSOCHAM ने एक आकलन किया है कि सीमेंट, इस्पात, निर्माण, अचल संपत्ति, उड्डयन, सूचना आधारित और वित्त सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों को सतर्क होना चाहिए क्योंकि आने वाले चंद दिनों में इन क्षेत्रों में बडे़ पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी किए जाने की संभावना है। एसोचैम ने अनुमान व्यक्त किया है कि संभवत: इस क्षेत्र में 25 से 30 प्रतिशत कर्मचारी हटाए जाएंगे।संगठन का कहना है कि आर्थिक वित्त संकट के दौर में सिकुड़ते मार्जिन को देखते हुए इन क्षेत्रों की कंपनियां लागत को कम करने के उपायों के तहत अगले दस दिन में नौकरियों पर कैंची चला सकती है। एसोचैम ने कहा है कि पिछले दो तिमाही से विस्तार की गति थमी है। देश के सकल घरेलू उत्पाद की बृद्धि दर पिछले चार साल में आठ प्रतिशत से नीचे आने की संभावना है। वित्त संकट को देखते हुए ऊंची ब्याज दरों के कारण मांग प्रभावित हुई है।
रिजर्व बैंक ने 24 अक्टूबर को जारी चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही की मौद्रिक एवं ऋण नीति की समीझा में देश की विकास दर के अनुमान को पहले के आठ प्रतिशत की तुलना में 2008-09 में घटाकर 7.5 से 8 प्रतिशत कर दिया है। समाप्त वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद में नौ प्रतिशत की जोरदार वृद्धि हुई थी।
एसोचैम ने कहा है नियोक्ता के पास अपनी कंपनी रणनीति के तहत परिचालन को बनाए रखने के लिए इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। घटते मार्जिन में कंपनियां पहले ही लागत कम करने के लिए पहले ही कई कदम उठा चुकी है। टाटा स्टील हाल ही में अनुबंध में रखे गए अपने सैकड़ों कर्मचारियों को हटा चुका है। इससे पहले निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी जेट एअरवेज ने 1900 कर्मचारियों को हटाने के फैसले से काफी बवाल मचा था और इसके बाद कंपनी को अपना यह फैसला वापस लेना पड़ा था। पिछले सप्ताह रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनी पार्श्वनाथ ने भी पिछले सप्ताह कहा है कि वह अपने कर्मचारियों की संख्या को तर्क संगत बनाएगी।
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27 October, 2008
हरियाणा के बिजली कर्मचारियों को 8.33 फीसदी बोनस
हरियाणा के बिजली कर्मचारियों को मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने दीपावली के तोहफे के तौर पर 8.33 फीसदी बोनस देने का ऐलान किया है। कर्मचारियों को बोनस के लिए 3.88 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। बोनस का लाभ उन कर्मचारियों को दिया जाएगा, जिनका वेतन 10 हजार रुपए महीने से ज्यादा नहीं है।
श्री हुड्डा का कहना है, दीपावाली उपहार के रूप में बिजली कर्मचारियों को 525 रुपए की राशि नकद दी जाएगी। कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए हुड्डा ने घोषणा की कि राज्य के बिजली उपक्रमों के कर्मचारियों को रिटायर होने पर अब एक के बजाय दो हजार रुपए का उपहार दिया जाएगा।
छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू करने के लिए हुड्डा ने बिजली उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी गठित करने की जानकारी देते हुए कहा, यह कमेटी उन्हें दिए जाने वाले विभिन्न भत्तों को देखेगी। हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन अपने कर्मचारियों के लिए पहले ही उत्पादन प्रोत्साहन योजना घोषित कर चुका है। इसके लिए 4.18 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
श्री हुड्डा का कहना है, दीपावाली उपहार के रूप में बिजली कर्मचारियों को 525 रुपए की राशि नकद दी जाएगी। कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए हुड्डा ने घोषणा की कि राज्य के बिजली उपक्रमों के कर्मचारियों को रिटायर होने पर अब एक के बजाय दो हजार रुपए का उपहार दिया जाएगा।
छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू करने के लिए हुड्डा ने बिजली उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी गठित करने की जानकारी देते हुए कहा, यह कमेटी उन्हें दिए जाने वाले विभिन्न भत्तों को देखेगी। हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन अपने कर्मचारियों के लिए पहले ही उत्पादन प्रोत्साहन योजना घोषित कर चुका है। इसके लिए 4.18 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
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राजस्थान के कर्मचारियों को दीपावली के अवसर पर बोनस की अनुमति
केन्द्रीय चुनाव आयोग ने राजस्थान के राज्य कर्मचारियों को दीपावली के अवसर पर बोनस बांटे जाने की अनुमति दे दी है। आयोग से 25 अक्टूबर को ही इस संबंध में राज्य निर्वाचन विभाग को सूचना मिली। निर्वाचन विभाग ने बोनस बांटने के संबंध में सभी संबंधित विभागों को सूचित कर दिया है। इससे राज्य सरकार के करीब 4.50 लाख कर्मचारियों को बोनस मिल सकेगा। राजस्थान रोडवेज, हाउसिंग बोर्ड और स्पिनफैड सहित कई विभाग पहले ही कर्मचारियों को बोनस देने का फैसला कर चुके हैं। ये भी केन्द्रीय चुनाव आयोग की हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे थे।
राज्य सरकार ने 5 दिन पहले ही वित्त विभाग के माध्यम से चुनाव आयोग को बोनस का प्रस्ताव बनाकर भिजवाया था। सरकार का तर्क था कि कर्मचारियों को हर साल बोनस दिया जाता रहा है, इसलिए इस बार भी कर्मचारियों को बोनस बांटा जाना है, इसलिए बोनस बांटने में आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं है। इससे पहले सरकार ने राज्य कर्मचारियों को केन्द्रीय छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत अधिकतम 3500 रुपए बोनस देने का फैसला किया था। वित्त विभाग के अनुसार 30 दिन के हिसाब से कर्मचारियों को करीब 3387 रुपए का बोनस मिलेगा। वित्त विभाग का कहना है कि कर्मचारियों को सोमवार से बोनस का भुगतान शुरू हो जाएगा। इस संबंध में वित्त विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। ज्यादातर विभागों में बोनस के बिल पहले से ही तैयार कर लिए गए हैं।
राज्य सरकार ने 5 दिन पहले ही वित्त विभाग के माध्यम से चुनाव आयोग को बोनस का प्रस्ताव बनाकर भिजवाया था। सरकार का तर्क था कि कर्मचारियों को हर साल बोनस दिया जाता रहा है, इसलिए इस बार भी कर्मचारियों को बोनस बांटा जाना है, इसलिए बोनस बांटने में आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं है। इससे पहले सरकार ने राज्य कर्मचारियों को केन्द्रीय छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत अधिकतम 3500 रुपए बोनस देने का फैसला किया था। वित्त विभाग के अनुसार 30 दिन के हिसाब से कर्मचारियों को करीब 3387 रुपए का बोनस मिलेगा। वित्त विभाग का कहना है कि कर्मचारियों को सोमवार से बोनस का भुगतान शुरू हो जाएगा। इस संबंध में वित्त विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। ज्यादातर विभागों में बोनस के बिल पहले से ही तैयार कर लिए गए हैं।
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24 October, 2008
टाटा मोटर्स ने और 400 कर्मचारियों को हटाया
दुनिया भर में छाए वित्तीय संकट के कारण जारी छंटनी के दौर के बीच देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने उत्पादन में गिरावट के चलते अपने और चार सौ अस्थायी कर्मियों को 23 अक्टूबर से काम से हटा दिया। इससे पूर्व कंपनी ने 20 अक्टूबर को भी अपने लगभग तीन सौ कर्मियों को काम से हटा दिया था। टाटा मोटर्स के जमशेदपुर स्थित भारी वाहन संयंत्र के इन अस्थायी कर्मियों को बुधवार को नोटिस देकर बृहस्पतिवार से काम पर न आने को कहा गया है। संयंत्र के श्रमिक संगठन टेल्को वर्कर्स यूनियन के महासचिव चंद्रभान प्रसाद ने लगभग तीन सौ अस्थायी कर्मियों को बृहस्पतिवार से काम पर न आने का नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि ये कर्मी विभिन्न विभागों से जुड़े थे।इस बीच संयंत्र के प्रवक्ता कैप्टन पी जे सिंह ने भी अस्थायी कर्मियों को फिलहाल काम पर नहीं आने का नोटिस दिए जाने की पुष्टि की हालांकि उन्होंने कहा कि वह यह नहीं बता सकते कि यह संख्या तीन सौ है या उससे कुछ कम। उन्होंने कहा कि विभिन्न कारणों से उत्पादन में आई गिरावट के कारण यह कदम उठाया जा रहा है।
ज्ञातव्य है कि इससे पूर्व गत 20 अक्टूबर को भी जमशेदपुर संयंत्र के ट्रक डिवीजन लगभग एक सौ तथा कैब एंड क्वायल डिवीजन के दो सौ अस्थायी कर्मियों को काम से हटा दिया गया था। समझा जाता है कि वैश्विक मंदी के कारण उत्पादन में लगातार हो रही गिरावट के कारण यह कदम उठाया गया है। हर साल बरसात के बाद उत्पादन और मांग बढ़ने पर कंपनी और अस्थायी कर्मियों को काम पर बुलाती थी। पर इस बार पहले से कार्यरत लगभग पौने दो हजार अस्थायी कर्मियों में से भी लगभग छह सौ को हटाया जा रहा है। संयंत्र के कुल अस्थायी कर्मियों की संख्या साढ़े तीन हजार तक है।
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22 October, 2008
उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों को बोनस देने का शासनादेश जारी
उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों को बोनस देने का शासनादेश जारी हो गया है। शासनादेश में कहा गया है कि समस्त पूर्णकालिक अराजपत्रित कर्मचारियों, राज्य निधि से सहायता प्राप्त शिक्षण, प्राविधिक संस्थाओं, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों के ऐसे कर्मचारियों, जिनके वेतन अधिकतम 10,500 रुपये तक हैं, को तदर्थ बोनस के रूप में 30 दिन की परिलब्धियों की स्वीकृत प्रदान की गयी है। वेतनमान 6500-10500 तक के पद पर कार्यरत ऐसे अराजपत्रित कर्मचारियों को, जिन्हें उक्त वेतनमान से उच्चतर वेतनमान व्यैक्तिक प्रोन्नति, अगला वेतनमान के रूप में अनुमन्य हुआ है और उसके स्टेटस में परिवर्तन नहीं हुआ है को भी तदर्थ बोनस अनुमन्य होगा।
ऐसे कर्मचारी जिन्होंने 1-1-96 से लागू पुनरीक्षित वेतनमानों के बजाय पूर्ववर्ती वेतनमान में ही बने रहने का विकल्प दिया हो, के सम्बंध में भी वेतनमान का अधिकतम 3500 रुपये तक माना जायेगा। शासनादेश में कहा गया है कि तदर्थ बोनस की अधिकतम देय धनराशि 3500 रुपये प्रतिमाह की परिलब्धियां पाने वाले कर्मचारियों के लिए स्वीकार्य राशि तक सीमित रहेगी अर्थात जिन कर्मचारियों की परिलब्धियां 3500 रुपये से अधिक थीं, उनके लिए तदर्थ बोनस का आगणन इस प्रकार किया जाएगा मानो उनकी परिलब्धियां 3500 रुपये हों।
बोनस उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्होंने 31 मार्च 08 तक निरंतर एक वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।
ऐसे कर्मचारी जिन्होंने 1-1-96 से लागू पुनरीक्षित वेतनमानों के बजाय पूर्ववर्ती वेतनमान में ही बने रहने का विकल्प दिया हो, के सम्बंध में भी वेतनमान का अधिकतम 3500 रुपये तक माना जायेगा। शासनादेश में कहा गया है कि तदर्थ बोनस की अधिकतम देय धनराशि 3500 रुपये प्रतिमाह की परिलब्धियां पाने वाले कर्मचारियों के लिए स्वीकार्य राशि तक सीमित रहेगी अर्थात जिन कर्मचारियों की परिलब्धियां 3500 रुपये से अधिक थीं, उनके लिए तदर्थ बोनस का आगणन इस प्रकार किया जाएगा मानो उनकी परिलब्धियां 3500 रुपये हों।
बोनस उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्होंने 31 मार्च 08 तक निरंतर एक वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।
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20 October, 2008
अफसरों-कर्मियों की आय में अंतर बढ़ा
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के International Institute for Labor Studies की एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि मजबूत आर्थिक विकास से करोड़ों नई नौकरियों के सृजित होने के बावजूद दुनिया भर में आय विसंगति की खाई 1990 के दशक के बाद से लगातार बढ़ी है। । इंस्टीट्यूट के निदेशक रेमंड टोरस ने कहा कि रिपोर्ट का निष्कर्ष यही है कि धनी और निर्धनतम घरों में अंत 1990 के दशक से ही बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अगर दीर्घकालिक ढांचागत सुधार नहीं अपनाए जाते हैं तो मौजूदा वैश्विक वित्तीय संकट, स्थिति को बदतर ही करेगा।
संगठन (आईएलओ) द्वारा जारी इस अध्ययन में कहा गया है कि मौजूदा वित्तीय एवं आर्थिक संकट का अधिकतर बोझ उन करोड़ों लोगों का उठाना पड़ेगा जिन्हें पिछले आर्थिक विकास का लाभ नहीं मिला था। इसमें कहा गया है कि 1990 के दशक से 2007 के बीच अर्थव्यवस्थाओंके विस्तार से वैश्विक रोजगार में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई। लेकिन इसके साथ ही आय में अंतर भी बढ़ा है। अध्ययन के अनुसार अत्यधिक आय विसंगति को उच्च अपराध दर, निम्न जीवन प्रत्याशा से जोड़ा जा सकता है। इसमें कहा गया है कि पहले ही अनेक देशों में यह धारणा है कि वैश्वीकरण आबादी के अधिकतर हिस्से के लाभ के लिए काम नहीं कर रहा है।
रिपोर्ट में आय में बढ़ते अंतर को शीर्ष कार्यकारियों तथा आम कर्मचारी के वेतन में अंतर से भी जोड़ा गया है। उदाहरण के रूप में 2007 में अमेरिका की 15 शीर्ष कंपनियों के CEO की आय, आम कर्मचारी की तुलना में 520 गुना अधिक रही।
संगठन (आईएलओ) द्वारा जारी इस अध्ययन में कहा गया है कि मौजूदा वित्तीय एवं आर्थिक संकट का अधिकतर बोझ उन करोड़ों लोगों का उठाना पड़ेगा जिन्हें पिछले आर्थिक विकास का लाभ नहीं मिला था। इसमें कहा गया है कि 1990 के दशक से 2007 के बीच अर्थव्यवस्थाओंके विस्तार से वैश्विक रोजगार में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई। लेकिन इसके साथ ही आय में अंतर भी बढ़ा है। अध्ययन के अनुसार अत्यधिक आय विसंगति को उच्च अपराध दर, निम्न जीवन प्रत्याशा से जोड़ा जा सकता है। इसमें कहा गया है कि पहले ही अनेक देशों में यह धारणा है कि वैश्वीकरण आबादी के अधिकतर हिस्से के लाभ के लिए काम नहीं कर रहा है।
रिपोर्ट में आय में बढ़ते अंतर को शीर्ष कार्यकारियों तथा आम कर्मचारी के वेतन में अंतर से भी जोड़ा गया है। उदाहरण के रूप में 2007 में अमेरिका की 15 शीर्ष कंपनियों के CEO की आय, आम कर्मचारी की तुलना में 520 गुना अधिक रही।
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