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25 September, 2008

सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतनमान पर राव समिति की रिपोर्ट मंजूर नहीं

 सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन पर सिफारिश देने के लिए गठित समिति के सुझावों पर हाल-फिलहाल में फैसला होने की संभावना टलती नजर आ रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के सर्वोच्च संगठन स्कोप (Standing Conference of Public Enterprises) ने ही समिति की सिफारिशों को कठघरे में ला दिया है। स्कोप ने कहा है कि न्यायाधीश एमजे राव की अध्यक्षता वाली समिति ने सभी वर्गो के कर्मचारियों और अधिकारियों को एक ही आधार पर वेतन वृद्धि का सुझाव दिया है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

स्कोप ने कहा है कि वैसे तो राव समिति की सिफारिशों को लागू करने से पीएसयू कर्मियों के वेतन में वृद्धि होगी,लेकिन वक्त की मांग को देखते हुए यह वृद्धि उपयोगी नहीं कही जा सकती है। मुद्दे को आगे ले जाते हुए स्कोप ने अपने सभी सदस्यों से सुझाव मंगवाए हैं। इन सुझावों के आधार पर संगठन लोक उपक्रम विभाग और भारी उद्योग मंत्रालय के साथ वेतन संशोधन पर नए सिरे बातचीत शुरू करने की योजना बना रहा है। स्कोप के मुताबिक आज के दौर में आय,कर्मचारियों की संख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर ही वेतन वृद्धि कर देना पर्याप्त नहीं है। स्कोप इस बारे में सभी नवरत्न कंपनियों को 'ए प्लस' श्रेणी में रखने के पक्ष में है ताकि इनको अपने बेहतरीन कर्मचारियों को निजी क्षेत्रों के हाथों में चले जाने से रोकने में सहूलियत हो।

स्कोप का कहना है कि यह अर्थव्यवस्था के हित में है कि अच्छा प्रदर्शन करने वाली सरकारी कंपनियों और निजी क्षेत्र के वेतनमान में बहुत ज्यादा अंतर नहीं हो। राव समिति की सिफारिशों को लागू करने के बावजूद अंतर बना रहेगा। स्कोप का सुझाव है कि सरकार की वेतन वृद्धि की नीति इस प्रकार की होनी चाहिए कि व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर हमेशा ही इसमें बढ़ोतरी की संभावना बनी रहे। साथ ही सरकारी कंपनियों के प्रबंधन को यह अधिकार होना चाहिए कि वह वेतनमान में परिस्थितियों के मुताबिक संशोधन कर सके।

थोड़ी और जानकारी यहाँ

18 August, 2008

उत्तर प्रदेश में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के 14 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन को छठे केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरुप पुनरीक्षित करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि इसके तहत राज्य के सभी कर्मचारियों को पुनरीक्षित वेतनमानों का लाभ एक जनवरी 2006 से दिया जाएगा। इससे पूर्व उन्होंने यह घोषणा विधानसभा में भी की थी। पुनरीक्षित वेतनमानों के अनुरुप कर्मचारियों को नकद भुगतान 1 दिसम्बर 2008 से किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों और शिक्षकों के पुनरीक्षित वेतनमानों के राज्य सरकार ने भारतीय सेवा के प्रशासनिक अवकाश प्राप्त अधिकारी जगमोहन लाल बजाज की अगुवाई में एक समिति गठित की है। राज्य नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आलोक रंजन और वित्त सचिव बी।एन. दीक्षित इस समिति के सदस्य तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव अजय अग्रवाल सदस्य सचिव होंगे। समिति अपनी रिपोर्ट तीन माह में देगी। इस कदम से राजकोष पर 5179 करोड रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा जिसमें से 3789 करोड रुपए वेतन के मद में तथा 1400 करोड रुपए पेंशन मद में खर्च होगा।

17 June, 2008

अगस्त में कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन !?

छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने 11 अप्रैल को कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों के एक समूह का गठन किया था। इस कमेटी को जल्दी से जल्दी अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था। छठे वेतन आयोग की सदस्य सचिव सुषमा नाथ ही इस कमेटी की सदस्य सचिव हैं।

राष्ट्रीय सहारा के अनुसार रिपोर्ट में थोड़ा बहुत फेरबदल है। जिन लोगों को अपने पद के पे-बैंड से दिक्कत थी उन्हें मामूली सा सुधार दिया गया है। लेकिन जिस तरह की वृद्धि कर्मचारियों के संगठन मांग रहे थे वह उन्हें नहीं मिली है। सैनिकों का मिलिट्री अलाउंस बढ़ाकर 2000 रूपए किया जा रहा है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कम से कम 10 हजार रूपए तनख्वाह मांग रहे थे। कमेटी ने उनकी मांग तो नहीं मानी लेकिन सीसीए और एकाध भत्ता और देकर उन्हें दूसरे तरीके से लाभ दे दिया है। सेंट्रल सेकट्रियेट सर्विस (सीएसएस) के कर्मचारी वेतन आयोग की रिपोर्ट से आक्रोश में थे। उन्होंने धरना-प्रदर्शन भी किया लेकिन उनके हाथ भी एकाध पे-बैंड में परिवर्तन के अलावा कुछ नहीं लगने वाला। सूत्रों के अनुसार कमेटी की रिपोर्ट तैयार है। इसे संभवत: इसी महीने की 20 तारीख को वित्तमंत्री को सौंप दिया जाएगा। उसके बाद यदि आवश्यक हुआ तो ग्रुप आफ मिनिस्टर का गठन किया जाएगा अन्यथा जुलाई महीने से ही पे-कमीशन की रिपोर्ट लागू कर दी जाएगी ताकि अगस्त में कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन मिल सके।

12 April, 2008

वेतन आयोग सिफारिशों की छानबीन

कर्मचारियों के एक वर्ग के असंतोष को देखते हुए सरकार ने आज छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की छानबीन के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की एक समिति गठित करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में समिति के गठन को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट सचिव के।एम. चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली सचिवों की अधिकार संपन्न समिति छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की छानबीन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी, जिसके बाद मंत्रिमंडल अंतिम निर्णय लेगा। न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण की अध्यक्षता वाले छठे वेतन आयोग ने गत 24 मार्च को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

सचिवों की समिति तय करेगी कि वेतन आयोग की सिफारिशों को किस तरह लागू किया जाए। समिति आयोग की सिफारिशों की पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी जिसके बाद मामला फिर मंत्रिमंडल के समक्ष आएगा। सरकार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू करना चाहेगी।

26 February, 2008

वेतन आयोग की रिपोर्ट ४ अप्रैल तक

सरकार ने मंगलवार को कहा कि छठा वेतन आयोग चार अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट दे देगा।

राज्यसभा में लिखित जवाब में वित्त राज्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि आयोग को अपने गठन के 18 माह के भीतर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर उसे सौंप देना है। यह अवधि चार अप्रैल को पूरी हो रही है। आयोग की सिफारिशों को लागू करने के मसले पर बंसल ने कहा कि जब तक आयोग की रिपोर्ट आ नहीं जाती तब तक उसपर अमल की अवधि के बारे में नहीं बताया जा सकता। मीडिया में आई उन खबरों पर जिनमें वेतन में भारी बढ़ोतरी की भविष्यवाणी की गई है, बंसल ने कहा कि आयोग को अपनी रिपोर्ट को अभी अंतिम रूप देना बाकी है। इसलिए इस तरह की खबरें सिर्फ कयास की कहे जाएंगे।

बंसल ने कहा कि आयोग अपनी सिफारिशें लागू होने तक किसी प्रकार की अंतरिम राहत की जरूरत और पात्रता पर भी विचार कर रहा है। गौरतलब है कि छठा वेतन आयोग अक्टूबर-2006 में गठित किया गया था। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के वेतन के ढांचे में व्यापक परिवर्तन करना है।