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19 October, 2008

आचार संहिता के चलते बढ़े वेतन, भत्ते नहीं मिलेंगे

पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर देश में पांच लाख कालेज शिक्षकों को दीपावली पर बढ़े हुए वेतन और भत्ते नहीं मिल सकेंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने 17 अक्टूबर को कहा कि चुनाव की घोषणा के साथ आचार संहिता के लागू हो जाने के कारण इसे अंजाम देने में मुश्किलें आ रही हैं।

दैनिक हिन्दुस्तान में राजिव रंजन नाग के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समिति की सिफारिशें मान लिये जाने के बावजूद सरकार इसे 4 दिसंबर (चुनाव संपन्न होने तक) तक लागू नहीं कर सकेगी। अगले महीने पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, इनमें राजधानी दिल्ली के अलावा राजस्थान, मिजोरम, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ शामिल हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा गठित प्रोफेसर जी.के. चढ्डा कमेटी ने पिछले दिनों कालेज शिक्षकों के वेतन-भत्ते में 70 फीसदी की वृद्धि और अकादमिक सुविधाओं की सिफारिश की थी। इसका लाभ केंद्रीय व राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों के पांच लाख से अधिक शिक्षकों को मिल सकेगा।

मंत्रालय सूत्रों ने कहा कि जून 2006 में उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी छात्रों को 27 फीसदी आरक्षण की घोषणा के कारण फजीहत झेल चुके अर्जुन सिंह इसकी पुनरावृत्ति नहीं चाहते हैं। तब तमिलनाडु, केरल, असम, पश्चिम बंगाल और पांडिचेरी में विधान सभा चुनाव के दौरान आरक्षण की घोषणा पर चुनाव आयोग ने गंभीर आपत्ति जताते हुए केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह को आयोग के दफ्तर में बुलाकर सफाई देने का निर्देश दिया था।

20 August, 2008

छत्तीसगढ़ के ढ़ाई लाख अधिकारी-कर्मचारी करेंगे हड़ताल

छत्तीसगढ़ में छठवें वेतन आयोग की अनुशंसा लागू करने की मांग को लेकर राज्य के करीब ढ़ाई लाख कर्मचारी 21 अगस्त को हड़ताल करेंगे। छत्तीसगढ़ प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष ने बताया है कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में राज्य के सभी कर्मचारी, अधिकारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से केन्द्रीय कर्मचारियों की भांति राज्य के कर्मचारियों को छठवें वेतन भत्ते स्वीकृत करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में 21 अगस्त 2008 को प्रदेशव्यापी एक दिवसीय हड़ताल रखी गई है जिसमें मंत्रालय से लेकर विकासखंड स्तर तक सभी कार्यालय तथा शैक्षणिक संस्थाएं बंद रहेंगे।

14 August, 2008

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली, सितम्बर से नया वेतन

सरकार ने छठे वेतन आयोग की संशोधित सिफारिशों को मानते हुए कर्मचारियों के वेतन में औसतन 21 फीसदी तक बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। वेतन वृद्धि एक जनवरी 2006 से लागू होगी और बढ़ा हुया वेतन सितंबर माह से मिलेगा। 31 अगस्त 2008 तक एरियर की एक बड़ी किश्त भी कर्मचारियों की जेब मोटी करेगी। केंद्र सरकार के फैसले के मुताबिक एरियर की राशि दो किस्तों में मिलेगी। चालीस फीसदी राशि मौजूदा वित्त वर्ष 2008-09 में और बाकी साठ प्रतिशत अगले वित्त वर्ष 2009-10 में निकाली जा सकेगी। वेतन के साथ जुड़ने वाले भत्ते अगले माह से ही दिए जाएंगे। वेतन आयोग रिपोर्ट में मौजूद प्रशासकीय सुधार से जुड़ी सिफारिशों को सरकार ने फिलहाल नहीं छुआ है।

१४ अगस्त को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने छठे वेतन आयोग की संशोधित सिफारिशों को मंजूरी दे दी। लाल किले से प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के संबोधन के कुछ हिस्से में कर्मियों के फायदे की कुछ व लुभावनी घोषणाएं भी हो सकती हैं। अंदाजे लगाए जा रहे हैं कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर प्रधानमंत्री कुछ संकेत दे सकते हैं। सिफारिशों की समीक्षा करने वाली सचिवों की समिति के सुझावों से अतिरिक्त सरकार ने अपनी तरफ से अहम फैसले किए हैं। ऐसे ही एक फैसले के तहत राज्यों के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के लिए वही वेतनमान कर दिया गया है जिसमें मुख्य सचिव आते हैं। इससे पुलिस के मुखिया का वेतन 80 हजार रुपये प्रति माह होगा।

नाराज चल रहे निम्न श्रेणी कर्मचारियों का ख्याल सरकार ने खूब रखा है। सबसे निचले स्तर के कर्मचारी का मूल वेतन सात हजार रुपये मासिक कर दिया गया है जो भत्ते जोड़कर दस हजार रुपये पार कर जाएगा। वेतन आयोग ने इस स्तर के लिए 6660 रुपये मासिक वेतन की सिफारिश की थी। कर्मचारियों की वार्षिक वेतन बढ़ोतरी अब ढाई की बजाय तीन प्रतिशत करने का फैसला किया गया है। 'सुनिश्चित कैरियर प्रगति स्कीम' के तहत कर्मचारियों को कम से कम तीन पदोन्नति अनिवार्य रूप से हासिल होगी। यह असैन्य कर्मचारियों को सेवा काल के 10, 20 और 30 साल पूरे करने पर मिलेगी। सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए परिवहन भत्ते में भी वृद्धि को लेकर समिति का सुझाव मान लिया गया। अब ए-1 व ए श्रेणी के शहरों में परिवहन भत्ता 400 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया गया है। छोटे शहरों में यह भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये कर दिया गया है।

कैबिनेट ने समिति के उस सुझाव को जस का तस मान लिया है जिसमें मध्य स्तर के पुलिस और असैन्य अधिकारियों को पे बैंड-4 में शुमार करने की सिफारिश है। छठे वेतन आयोग की सिफारिश में एक और अहम संशोधन के तहत सरकार ने तय किया है कि चार साल की सेवा के बाद बी समूह के अधिकारियों को ए समूह का वेतनमान दिए जाने पर रोक नहीं लगेगी। बल्कि दोनों समूह के अधिकारियों को पे-बैंड-2 की जगह ज्यादा वेतनमान वाले पे-बैंड-3 में रखा गया है। बीस वर्ष की नौकरी पूरी कर चुके डाक्टरों को संयुक्त सचिव के बराबर का पद (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) दिया जाएगा।

09 February, 2008

मनमाने निर्णय की हो सकती है समीक्षा: कैट

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने कहा है कि समान कर्मचारियों के बीच भेदभाव करने वाले मनमाने नीतिगत निर्णय की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।

न्यायमूर्ति शंकर राजू की अध्यक्षता वाली न्यायाधिकरण की पीठ ने कहा है कि समान लोगों के बीच भेदभाव करने वाली कोई भी नीति न्यायिक समीक्षा में टिक नहीं सकती। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है। पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के एक विभागीय आदेश को दरकिनार कर दिया। इस आदेश में विशेष प्रतिनियुक्ति भत्ता केवल मुख्यालय में पदस्थ कर्मचारियों तक ही सीमित कर दिया गया है। फील्ड आफिस में कार्यरत कर्मचारियों को इससे वंचित कर दिया गया है। निर्णय में कहा कि यदि याचिकाकर्ता को पूर्व में इससे वंचित किया गया तो कैग उन्हें बकाये भत्ते का भुगतान करे।

एस मनोज कुमार, आर एस राठी, वीरेंद्र और आरएम शर्मा सहित 40 कैग कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका में विभाग द्वारा छह अक्टूबर को जारी आदेश को चुनौती दी गई थी।