19 April, 2008

कोल इंडिया ने अंतरिम राहत का आदेश दिया

कोल इंडिया ने कामगारों को अंतरिम राहत (आइआर) पेमेंट करने संबंधी आदेश भेज दिया है। कंपनी के डीपी आर मोहन दास ने सभी कंपनियों के सीएमडी को इस बाबत पत्र भेजा है। इसमें 30 जून 06 के बेसिक पर 15 प्रतिशत की दर से भुगतान करने को कहा गया है। मई में होने वाले अप्रैल के पेमेंट से इसे दिया जायेगा।

इस राशि को सैलरी सीट में अलग से दर्शाने का निर्देश भी दिया गया है। जुलाई 06 से मार्च 08 तक के एरियर का भुगतान दो किस्त में करने को कहा गया है। पहला दुर्गा पूजा से पहले एवं दूसरा 31 जनवरी 09 तक। भुगतान की तिथि बाद में घोषित करने की बात कही गयी है। दी जाने वाली राशि पर दो फीसदी की दर से सीएमपीएफ-पीएफ काटने की बात भी कही गयी है। ग्रेच्युटी और लीव बेनीफीट एवं अन्य वैधानिक कटौती भी की जायेगी। इस राशि पर अन्य भत्तों की गणना नहीं होगी। यह राशि एनसीडब्ल्यूए-8 के फाइनल एग्रीमेंट के बाद एडजस्ट भी की जायेगी। उक्त आदेश के आलोक में सीसीएल के डीजीएम धु्रव कुमार ने सभी सीजीएम, जीएम एवं संबंधित अधिकारी को सूचित कर दिया है।

कोयला कामगारों के वेतन समझौते की अवधि भी बढ़ती गयी। शुरू में यह चार साल की अवधि के लिए ही होता था। शुरुआती तीन समझौतों तक यह जारी रहा। इसके बाद श्रमिक प्रतिनिधि की सहमति से प्रबंधन ने इसकी अवधि बढ़ाकर साढ़े चार वर्ष कर दी। तुरंत बाद इसकी अवधि बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गयी। सातवें वेतन समझौते से प्रबंधन दस साल का एग्रीमेंट करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि श्रमिक प्रतिनिधि इस पर सहमत नहीं हो रहे हैं। प्रतिनिधियों का कहना है कि कम अवधि का वेतन समझौता कामगार हित में होता है। इस बार प्रबंधन के साथ कुछ कामगार भी दस साल का वेतन समझौता चाह रहे हैं। हालांकि श्रमिक संगठन पांच साल के समझौते का अल्टीमेटम भी दे चुके हैं।

12 April, 2008

वेतन आयोग सिफारिशों की छानबीन

कर्मचारियों के एक वर्ग के असंतोष को देखते हुए सरकार ने आज छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की छानबीन के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की एक समिति गठित करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में समिति के गठन को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट सचिव के।एम. चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली सचिवों की अधिकार संपन्न समिति छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की छानबीन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी, जिसके बाद मंत्रिमंडल अंतिम निर्णय लेगा। न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण की अध्यक्षता वाले छठे वेतन आयोग ने गत 24 मार्च को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

सचिवों की समिति तय करेगी कि वेतन आयोग की सिफारिशों को किस तरह लागू किया जाए। समिति आयोग की सिफारिशों की पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी जिसके बाद मामला फिर मंत्रिमंडल के समक्ष आएगा। सरकार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू करना चाहेगी।

09 April, 2008

सेना और पुलिस ने वेतन आयोग की कई विसंगतियाँ दूर कराईं

सेना और केंद्रीय सचिवालय सेवा (सीएसएस) ने छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को सुधरवा लिया है लेकिन सुधार के बाद भी कुछ वेतनमान बढ़ने की जगह घट गए हैं। प्री-कमीशन अधिकारियों और लेफ्टिनेंट, सब-लेफ्टिनेंट और फ्लाइंग ऑफिसर और कैप्टन तक को दो हजार से लेकर आठ हजार रूपए तक का फायदा होगा। पुलिस वालों को भी वर्दी भत्ते के तौर पर एक हजार रूपए का फायदा दे दिया गया है। जारी संशोधन से बाकी सेवाओं के लोगों में बेचैनी है। वित्त मंत्रालय ने एक मूल्याकंन कमेटी का गठन किया है जो विसंगतियों को देख रही है।

देश में सेना, रेलवे यूनियन और सीएसएस ऐसोसिएशन तीनों की ताकत का लोहा सब मानते हैं, इसलिए इन तीनों की सुन ली गई है। हालांकि सेना की तरफ से रक्षा मंत्री एके एंटनी ने जो प्रस्ताव दिया है उसके हिसाब से वेतनमान में संशोधन अलग से होना है। सेना अधिकारियों की धमकी और रक्षा मंत्री की वकालत के बाद वित्त मंत्रालय ने अंतिम वर्ष ट्रेनिंग ले रहे प्री-कमीशन अधिकारियों को भी पीबी-3 यानी ग्रुप- सेवा के बराबर रख दिया है। अब उन्हें 15600-5400 अर्थात कुल 21000 हजार रूपए वेतनमान मिलेगा। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें 6000 रूपए सेना भत्ता नहीं दिया जाएगा। उन्हें 8000 रूपए प्रतिमाह स्टाइपेंड देने की सिफारिश की गई थी।

वेतन आयोग ने ऑनरेरी कैप्टन को 2900 के पे-बैंड में रखा था जिससे उनमें भारी रोष था। इन समूह के अधिकारियों को 2600 रूपए की बढ़ोतरी देते हुए अधिकारियों को 5700 के पे-बैंड में रख दिया गया है। अब इनका वेतनमान 29970 रूपए होगा। इसके अतिरिक्त सभी को 6000 रूपए का सेना भत्ता मिलेगा। लेफ्टिनेंट, सब-लेफ्टिनेंट और फ्लाइंग अधिकारी के वेतनमानों में संशोधन किया गया है। 14360 के वेतनमान को 15600, 14880 को 15990, 15400 को 15990, 15930 को 16390 कर दिया गया है लेकिन इससे अधिक के वेतनमानों को कम कर दिया गया है। 16450 को 16390, 16970 को 16800 तथा 17490 को घटाकर 17270 कर दिया गया है। यहां पर स्पष्टीकरण है यह कि इस समूह के लोग कैप्टन, लेफ्टिनेंट और फ्लाइंग लेफ्टिनेंट हो जाएंगे। उन्हें 18490 का वेतनमान मिलना था जो अब बढ़ाकर 19190 कर किया गया है। मेजर, लेफ्टिनेंट कमांडर और स्क्वाड्रन लीडर के वेतनमान 23540 को बढ़ाकर 24540 रूपए कर दिया गया है।

सीएसएस एसोसिएशन ने बड़ी यूनियनबाजी से अपनी तनख्वाह और वेतनमान बढ़वाया था लेकिन छठे वेतन आयोग ने उसे बराबर कर दिया था। इससे सीएसएस वाले नाराज थे और वे आंदोलन की धमकी दे रहे थे। वित्त मंत्रालय ने उनकी विसंगतियों को दूर कर दिया है। अब जो सेक्शन ऑफिसर चार साल का कार्यकाल पूरा करेंगे, उन्हें 5400 का पे-बैंड मिलेगा। यह पहले 4800 किया हुआ था। यह लाभ इसी स्केल पर काम कर रहे दूसरी सेवा के अधिकारियों को नहीं मिलेगा। भारतीय सूचना सेवा के ग्रुप बी के अधिकारी इसी स्केल पर थे लेकिन अब वे नीचे आ गए हैं।

आयोग ने पुलिस को मिलने वाली वर्दी की शुरूआती ग्रांट को 13000 रूपए से बढ़ाकर 14000 रूपए कर दिया है। प्रत्येक तीन साल में मिलने वाली रिन्यूअल ग्रांट को छह हजार से कम कर तीन हजार किया गया है। वेतन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पे-बैंड-1 में डी समूह के वही लोग जाएंगे जो न्यूनतम योग्यता रखतें हों अन्यथा वे तब तक पुराने समूह में बने रहेंगे जब तक कि योग्यता हासिल न कर लें।

इसके अलावा रात को ड्यूटी करने करने वाले रेलवे कर्मचारियों का भत्ता बढ़ाया जाएगा। इस बाबत विचार विमर्श जारी है।

वेतन आयोग की मार, अब बच्चों की शिक्षा पर

छठे वेतन आयोग की सिफारिशें आपकी जेब पर भारी पड़ने वाली हैं। टीचर्स की बढ़ी सैलरी का बोझ अपने ऊपर से हटाने के लिए पब्लिक स्कूलों की फीस काफी ज्यादा बढ़ रही है। यह बढ़ोतरी सिर्फ ट्यूशन फी में ही नहीं, बल्कि डेवेलपमेंट, मेंटिनेंस ट्रांसपोटेर्शन में भी होगी।

फेडरेशन ऑफ पब्लिक स्कूल के चेयरमैन आर. पी. मलिक का कहना है कि जितनी लोगों की तनख्वाह बढ़ेगी, उसी हिसाब से महंगाई भी बढ़ेगी और इसका असर स्कूल, शिक्षकों और पालकों पर भी पड़ेगा। उनका कहना है कि इस बार छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हो रही हैं, इसलिए सभी स्कूलों ने छात्रों की फीस 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला किया है।

कुछ स्कूलों ने 40 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है। बाकी बढ़ाने वाले हैं। वैसे भी हर साल स्कूलों में 8 से 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ती है। इस बार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक सैलरी पैकेज काफी बढ़ाना पड़ेगा। ऐसे में बढ़े हुए खर्चों को निकालने के लिए बच्चों की फीस बढ़ानी पड़ेगी। बढ़ोतरी कितने प्रतिशत होगी इस बारे में स्केल का पता लग जाए तभी कुछ कहा जा सकता है।

डीपीएस, आर के पुरम की प्रिंसिपल श्यामा चोना कहती हैं कि वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक तनख्वाह बढेगी , तो फीस बढ़ेगी ही। मगर अभी हमारे पास इस संबंध में सीधी कोई सूचना नहीं आई है, इसलिए अभी कुछ कह नहीं सकते हैं, मगर फर्क तो जरूर पड़ेगा।

डॉन बॉस्को पब्लिक स्कूल, अलकनंदा में ग्यारहवीं में पढ़ने वाले एक स्टूडेंट की मां का कहना था कि इस बार तीन महीने की फीस और दो माह का ट्रांसपोर्टेशन चार्ज मिलाकर उन्हें 10 हजार रुपये स्कूल में जमा कराने पड़े हैं, जबकि इससे पहले तक ग्यारहवीं क्लास के बच्चों को आठ हजार रुपये भुगतान करना पड़ता था। एक पब्लिक स्कूल में प्री प्राइमरी में पढ़ रही एक स्टूडेंट के पिता के अनुसार, उन्हें इस बार तीन महीने के लिए 3990 रुपये और ट्रांसपोर्टेशन के 600 रुपये जमा कराने पड़े हैं, जबकि पिछले सेशन में इस क्लास की फीस इतनी नहीं थी।

04 April, 2008

सेना की नाराजगी, वेतन आयोग के लिए

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से नाखुश तीनों सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारियों ने शुक्रवार, अप्रैल को आयोग के सदस्यों के समक्ष खुल कर अपनी भड़ास निकाली। आयोग के सदस्यों ने उन्हें यह कह कर शांत करने की कोशिश की कि भले रेलवे को छोड़ कुल केंद्रीय कर्मचारियों में सशस्त्र बलों के 40 फीसदी कर्मचारी हों पर उन पर खर्च 61 फीसदी किया जाएगा।

रक्षा मंत्री एके एंटनी द्वारा बुलाई गई इस बैठक में वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर व थलसेना के डिप्टी चीफ समेत तमाम अधिकारियों का कहना था कि सैन्य अधिकारियों को सिविल व पुलिस अधिकारियों के मुकाबले कम करके आंका गया है जबकि इनका कार्य ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। इसके अलावा कम अधिकारी ही ऊंचे स्तर पर पहुंच पाते हैं। इसके जवाब में आयोग का कहना था कि उन्होंने रैंक वेतन में ऐसी व्यवस्था की है कि पदोन्नत न होने के बावजूद वेतन बढ़ता रहे। इसके अलावा निचले स्तर पर सैनिकों को एक समय के बाद अ‌र्द्धसैनिक बलों में भेजने की भी सिफारिश की है। आयोग का कहना था कि अगर अलग-अलग सेवाएं समान पदों को लेकर इस तरह से तुलना करेंगी तो दिक्कत खड़ी हो जाएगी।

आयोग के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने पहली हार मिलिट्री सर्विस पे को मंजूरी दी है। इसे न केवल वेतन का भाग माना जाएगा बल्कि पेंशन तय करते हुए भी इसे आधार बनाया जाएगा। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि सैनिकों के लिए यह कम से कम तीन हजार किया जाना चाहिए। आयोग ने सैनिकों के लिए एक हजार तो अधिकारियों के लिए छह हजार रुपये मिलिट्री सर्विस पे तय की है।

एंटनी ने बैठक में कहा कि आयोग के सदस्यों व सैन्य अधिकारियों के आमने-सामने अपनी बात रखने से अब स्थिति साफ हो रही है। अब आयोग की सिफारिशों में सुधार को लेकर जो संशोधन भेजे जाने हैं वह रक्षा मंत्रालय तैयार करके वित्त मंत्रालय के पास भेज देगा। माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय आयोग की सिफारिशों में कुछ सुधारों को स्वीकार कर सकता है।

02 April, 2008

इलाज पर ज्यादा खर्च किया तो भुगतान नहीं

सरकारी कर्मचारी अपनी मर्जी के अस्पतालों में इलाज करवाने से पहले सोच लें। उन्हें इलाज खर्च का उतना ही भुगतान होगा जितना उनके विभाग ने नियमानुसार तय किया है। नियम से ज्यादा का भुगतान किसी भी स्थिति में नहीं किया जा सकता। यह व्यवस्था देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो सरकारी कर्मियों को दिए जाने वाले तय मेडिकल खर्च से ज्यादा भुगतान देने के हाईकोर्ट के फैसलों को रद कर दिया। जस्टिस एस।बी। सिन्हा और वी।एस। सिरपुरकर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद-३०९ के तहत राज्य सरकारों को अपने कर्मचारियों के चिकित्सा खर्च को तय करने और उनके नियम बनाने का अधिकार है। इन नियमों में उदारता बरतने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है लेकिन मामला अत्यंत गंभीर बीमारियों का है इसलिए अनुच्छेद-142 के तहत असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सर्वोच्च अदालत आदेश देती है कि इन दो मामलों में कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान दे दिया जाए। लेकिन स्पष्ट किया जाता है कि यह आदेश नजीर के रूप में न लिया जाए।

मामले के अनुसार कर्नाटक के टैक्स विभाग और राजस्थान के न्यायिक विभाग के दो कर्मचारियों ने क्रमश्र: दिल और गुर्दे की बीमारी का इलाज निजी अस्पतालों में करवाया। दिल के मरीज के बाइपास सर्जरी पर खर्च 150,600 रुपये आया। लेकिन रिइंबर्समेंट पर सरकार ने उसे 39,207 रुपये ही दिए। इसी प्रकार दिल्ली के बत्रा अस्पताल में गुर्दा बदलवाने का खर्च आया 2.11 लाख रुपये लेकिन राज्य सरकार ने भुगतान किया सिर्फ 50,000 रुपये। गुर्दे के मरीज को एम्स में रेफर किया गया था लेकिन बिस्तर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने इमरजेंसी में बत्रा अस्पताल में इलाज करवाया। कम भुगतान मिलने के खिलाफ दोनों कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में रिट दायर की। कर्नाटक और दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार कर लीं और सरकारों को आदेश दिया कि कर्मचारियों को इलाज पर आए वास्तविक खर्च का भुगतान किया जाए। इस आदेश का राज्य सरकारों ने चुनौती दी थी।

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छठवें वेतन आयोग से वन सेवा के अधिकारी नाराज

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से खफा भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अफसरों का कहना है कि आयोग ने उनका पे स्केल घटा दिया है। आईएएस और आईएफएस अफसरों के वेतन में अब तक सिर्फ 2-3 हजार रुपये का फर्क होता था लेकिन नए स्केल लागू होने के बाद यह गैप 15-18 हजार तक बढ़ जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि वनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इस सेवा केअफसरों को हतोत्साहित किए जाने के नकारात्मक परिणाम निकल सकते हैं।

आईएफएस एसोसिएशन के महासचिव एस.के. चड़ढा ने बताया कि 18-20 साल की सेवा पूरी कर आईएफएस अफसर वन संरक्षक बनता है। इस पद का सुपरटाइम स्केल अभी 16400 से शुरू होता है। लेकिन आयोग ने इस स्केल को घटाकर 15600 करने की सिफारिश की है। जबकि 14 साल की सेवा पूरी करने के बाद आईएएस अधिकारी का सुपरटाइम स्केल अभी 18400 है जिसे बढ़ाकर 39200 रुपये करने की सिफारिश की गई है। इससे दोनों सेवाओं के अफसरों के वेतन स्केल में दोगुने से भी ज्यादा का अन्तर हो गया है।

इसी तरह प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फारेस्ट (पीसीसीएफ) का मौजूदा स्केल 24050-26000 है। इस पद पर आईएफएस अफसर अपने कार्यकाल के अंतिम चार-पांच सालों में पहुंचते हैं। 2-3 साल की सेवा के बाद अफसर 26 हजार रुपये के स्केल तक पहुंच जाते हैं जो अभी भारत सरकार के सचिव के बराबर का स्केल है। लेकिन नई सिफारिशों में इस स्केल को बढ़ाकर 39200-67000 में रखा गया है तथा १३००० के पे ग्रेड का प्रावधान किया गया है। लेकिन 13 हजार के पे ग्रेड को पाने में अफसरों को कम से कम 12 साल इस पद पर कार्य करना होगा। जबकि जो अफसर इस पद पर पहुंचते हैं उनकी सर्विस के सिर्फ 4-5 साल ही बचे होते हैं। इसका परिणाम यह होगा कि इस सेवा के अफसर भविष्य में सचिवों की भांति 80 हजार रुपये तक का वेतनमान नहीं हासिल कर पाएंगे। जबकि अभी वे इस पद पर आने के बाद 3 साल के भीतर सचिव के बराबर वेतन पाने में सफल रहते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि छठे वेतन आयोग ने सिर्फ आईएएस अफसरों का ध्यान रखा है।