03 March, 2009
छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को केंद्रीय वेतनमान
02 July, 2008
सरकारी कर्मचारियों के लिए PAN नंबर जरूरी नहीं
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार में होने वाले लेन-देन के लिए परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के दायरे से निवेशकों की कुछ श्रेणियों को बाहर रखने का निर्देश दिया है। इनमें केंद्रीय और राज्य सरकारों के कर्मचारियों तथा अदालत द्वारा नियुक्त लोग शामिल हैं।इससे पहले पिछले वर्ष सेबी ने सभी निवेशकों के लिए PAN अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद बाजार नियामक संस्था को निवेशकों की विभिन्न श्रेणियों से अनिवार्य रूप से PAN प्रस्तुत करने से छूट देने के लिए अनुरोध पत्र मिले थे।
14 May, 2008
२० अगस्त को सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे
यह हड़ताल छठे वेतन आयोग की नकारात्मक सिफारिशों, ठेकेदारी की बढ़ती प्रवृत्ति, काम करने की जगहों पर स्थाई कर्मचरियों को नियुक्ति नहीं करने एवं बाहर से काम कराने (आउटसोर्सिंग) का विरोध जताने के लिए आयोजित की जा रही है।
23 April, 2008
LTC में अब टूर पैकेज शामिल
गर्मियों की छुट्टियों में सैर सपाटे का मौसम शुरू होने से ठीक पूर्व केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को तोहफा दिया है। केन्द्र के नए दिशानिर्देशों के तहत अब सरकारी कर्मचारियों के लिए यात्रा अवकाश रियायत (Leave Travel Concession) में टूर पैकेजों को भी शामिल किया गया है इसके तहत केन्द्रीय कर्मचारी सरकारी एजेंसियों द्वारा तैयार किए जाने वाले टूर पैकेज ले सकेंगे और इस मद में व्यय हुई राशी को LTC के तहत क्लेम कर सकेंगे अभी तक यह सुविधा उन्हें हासिल नहीं थीं गर्मियों में स्कूलों में छुट्टियाँ होने के कारण ज्यादातर कर्मचारी मई-जून में एलटीसी की सुविधा लेते हैं। जिसके चलते 30-40 फीसदी कर्मचारी गर्मियों में छुट्टियों पर चले जाते हैं। यह नई सुविधा जोड़े जाने से प्रतिशत और बढ़ेगा। केंद्र की इस पहल का लाभ राज्यों को भी मिलेगा। मूलत: राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के लिए केंद्र के अनुरूप नियम बनाती हैं। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी एक ताजा आदेश के अनुसार केंद्रीय कर्मचारी भारतीय पर्यटन विकास निगम (Indian Tourist Development Corporation) , राज्य पर्यटन विकास निगम (State Tourist Development Corporation) तथा भारतीय रेलवे कैटरिंग तथा पर्यटन विकास निगम (Indian Railway Catering and Tourist Development Corporation) द्वारा तैयार किए जाने वाले टूर पैकेजों को भी एलटीसी में शामिल करने की सहमति प्रदान की है। कर्मचारियों से कहा गया है कि वे इन संस्थानों के टूर पैकेज लेकर एलटीसी पर जा सकते हैं लेकिन क्लेम लेते वक्त उन्हें टूर पर जाने का आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
पिछले कुछ समय से सरकार कर्मचारियों के सैर सपाटे का विशेष ध्यान रख रही है। इसके तहत कर्मचारियों को एलटीसी में हवाई यात्रा की सुविधा भी प्रदान की जा चुकी है। निचले स्तर के कर्मचारी जो रेल में प्रथम श्रेणी की यात्रा के हकदार नहीं हैं, उन्हें यह सुविधा दी गई है कि वे प्रथम श्रेणी से यात्रा कर सकते हैं, बशर्ते की स्वीकृत किराए से बाकी राशि वह खुद वहन करें। इसके साथ ही पूर्व में कर्मचारियों को पीएफ की राशि से तीर्थाटन करने की अनुमति दी जा चुकी है। लेकिन इस सब प्रक्रिया में एक ही गड़बड़ यह होती है कि ज्यादातर कर्मचारी एलटीसी का पैकेज गर्मियों की दो महीनों की छुट्टियों के दौरान लेते हैं जिस कारण 30-40 फीसदी कर्मचारियों के एकाएक छुट्टी पर जाने से सरकारी कामकाज प्रभावित होता है।
22 April, 2008
प्रधानमंत्री, उचित वेतनमान के पक्ष में
वेतन आयोग की सिफारिशों पर सरकारी कर्मियों की चिंताओं को दूर करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रशासनिक और रक्षा सेवाओं के लिए उचित वेतनमान का पक्ष लिया। हाल ही में वेतन आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रशासनिक सेवाओं के कुछ वर्गो ने रिपोर्ट की सिफारिशों पर अपनी चिंताएं जाहिर की थी।लोक सेवा दिवस के मौके पर नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सोमवार, २१ अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि मैं चाहूंगा कि प्रशासनिक और रक्षा सेवाओं को उचित तरीके रिवार्ड मिले। उन्होंने कहा कि मेरा यह भी मानना है कि जब तक हम अपनी जनता के बेहतर हित में कुशलतापूर्वक काम करते रहेंगे, करदाता हममें किसी को भी बेहतर पारिश्रमिक देने में अनिच्छा नहीं दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मियों की शिकायतों को सुनने और उन्हें दूर करने के लिए सरकार द्वारा पहले ही एक प्रणाली शुरू की जा चुकी है।
गौरतलब है कि वेतन आयोग की सिफारिशों की आलोचना को देखते हुए सरकार ने कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय आधिकारिक समिति के गठन की पिछले सप्ताह घोषणा की थी। सिंह ने काम में सुधार के साथ कार्य की शर्तो में सुधार की वकालत करते हुए कहा सरकार अपने सभी कर्मचारियों के कल्याण के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि साथ ही मैं लोक सेवकों से उच्च स्तर के अनुशासन और मर्यादा की अपेक्षा करूंगा।
02 April, 2008
इलाज पर ज्यादा खर्च किया तो भुगतान नहीं
सरकारी कर्मचारी अपनी मर्जी के अस्पतालों में इलाज करवाने से पहले सोच लें। उन्हें इलाज खर्च का उतना ही भुगतान होगा जितना उनके विभाग ने नियमानुसार तय किया है। नियम से ज्यादा का भुगतान किसी भी स्थिति में नहीं किया जा सकता। यह व्यवस्था देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो सरकारी कर्मियों को दिए जाने वाले तय मेडिकल खर्च से ज्यादा भुगतान देने के हाईकोर्ट के फैसलों को रद कर दिया। जस्टिस एस।बी। सिन्हा और वी।एस। सिरपुरकर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद-३०९ के तहत राज्य सरकारों को अपने कर्मचारियों के चिकित्सा खर्च को तय करने और उनके नियम बनाने का अधिकार है। इन नियमों में उदारता बरतने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है लेकिन मामला अत्यंत गंभीर बीमारियों का है इसलिए अनुच्छेद-142 के तहत असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सर्वोच्च अदालत आदेश देती है कि इन दो मामलों में कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान दे दिया जाए। लेकिन स्पष्ट किया जाता है कि यह आदेश नजीर के रूप में न लिया जाए।मामले के अनुसार कर्नाटक के टैक्स विभाग और राजस्थान के न्यायिक विभाग के दो कर्मचारियों ने क्रमश्र: दिल और गुर्दे की बीमारी का इलाज निजी अस्पतालों में करवाया। दिल के मरीज के बाइपास सर्जरी पर खर्च 150,600 रुपये आया। लेकिन रिइंबर्समेंट पर सरकार ने उसे 39,207 रुपये ही दिए। इसी प्रकार दिल्ली के बत्रा अस्पताल में गुर्दा बदलवाने का खर्च आया 2.11 लाख रुपये लेकिन राज्य सरकार ने भुगतान किया सिर्फ 50,000 रुपये। गुर्दे के मरीज को एम्स में रेफर किया गया था लेकिन बिस्तर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने इमरजेंसी में बत्रा अस्पताल में इलाज करवाया। कम भुगतान मिलने के खिलाफ दोनों कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में रिट दायर की। कर्नाटक और दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार कर लीं और सरकारों को आदेश दिया कि कर्मचारियों को इलाज पर आए वास्तविक खर्च का भुगतान किया जाए। इस आदेश का राज्य सरकारों ने चुनौती दी थी।
28 March, 2008
काफी नहीं है सरकारी नौकरशाहों का वेतन
सचिव स्तर को अधिकारियों को 80000 रुपये प्रति माह का निर्धारित वेतन देने की सिफारिश की गई है और अन्य अधिकारियों को वेतन उनसे भी कम है, जिससे उनके और निजी क्षेत्र के हाई प्रोफाइल मुख्य कार्याधिकारियों के वेतनमानों बीच का फासला स्पष्ट होता है। कई पूर्व सरकारी अधिकारियों को अपनी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में नौकरी देने वाले मुकेश अंबानी 25 करोड़ रुपये का वेतन सालाना लेते हैं, जबकि मीडिया मैग्नेट सन टीवी के कलानिधि मारन करीब 23 करोड़ रुपये सालाना कमाते हैं। सन टीवी की ही संयुक्त प्रबंध निदेशक कावेरी कलानिधि को 23 करोड़ रुपये का वेतन मिलता है। सुनील भारती मित्तल को करीब 15 करोड़ रुपये का वेतन मिलता है, जबकि प्रमुख फार्मा कंपनी डा रेड्डीज लैब्स के कार्यकारी अध्यक्ष अंजी रेड्डी को वेतन के तौर पर 14 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा मिलता है। निजी क्षेत्र की करीब 300 कार्यकारियों को एक करोड़ रुपये सालाना से ज्यादा का वेतन मिलता है और यह संख्या आने वाले दिनों बढ़ती हुई ही दिखती है।
भारत का निजी क्षेत्र भारी-भरकम वेतन [करोड़ों रुपये] पाने वाले उद्योगपतियों की सूची से भरा पड़ा है लेकिन सरकारी क्षेत्र की बात करें तो मंत्रिमंडल सचिव और समकक्ष थल, जल और वायु सेना प्रमुखों के अलावा कोई भी अधिकारी 10 लाख रुपये के स्तर को भी पार नहीं कर पाएगा।
साभार: जागरण
29 January, 2008
वेतन हो सकता है तिगुना, केंद्रीय कर्मियों का
दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, इसी तरह संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों को भी आयोग खुश करने में लगा है। आयोग नया वेतनमान जनवरी 2006 से लागू करने के पक्ष में है। वेतन आयोग की सिफारिशों पर अगर सरकार ने अमल किया तो संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी का मूल वेतन 60 हजार रुपये प्रतिमाह होगा। इसी तरह अतिरिक्त सचिव का मूल वेतन 70 हजार तक पहुंच जाएगा। आयोग की सिफारिश के मुताबिक सचिव स्तर के अधिकारी का मूल वेतन 75 हजार रुपये प्रतिमाह होने के आसार हैं। वहीं कैबिनेट सचिव का मासिक वेतन 80 हजार कर दिया जाएगा। इसके अलावा इन अधिकारियों के लिए मकान किराया भत्ता समेत अन्य तमाम सुविधाएं भी देने की सिफारिश आयोग ने की हैं। इनमें सीसीए और परिवहन की सुविधा शामिल हैं। इन पदों पर काबिज अधिकारियों के लिए एचआरए उनके मूल वेतन का 40 प्रतिशत से भी ज्यादा हो सकता है। इन पदों के लिए मौजूदा वेतनमानों के अनुसार संयुक्त सचिव से लेकर सचिव स्तर तक के पदों पर वेतन 40 हजार से 60 हजार तक है।
इसके अलावा वेतन आयोग केंद्र सरकार के तमाम विभागों में छोटे स्तर के कर्मचारियों के पदनाम बदलने की भी सिफारिश देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। निजी क्षेत्रों की तर्ज पर ऐसा प्रयोग करने का मूड आयोग ने बनाया है। सरकारी दफ्तरों को निजी क्षेत्र की तरह मुस्तैद करने पर जोर दे रहा वेतन आयोग चाहता है कि चपरासी पद पर बैठे व्यक्ति को लोग कार्यालय सहायक (आफिस असिस्टेंट) कहें। इसी तरह आयोग निम्न श्रेणी लिपिक (एलडीसी) पद का नाम बदल कर जूनियर एक्जीक्यूटिव और उच्च श्रेणी लिपिक (यूडीसी) पद नाम बदल कर एक्जीक्यूटिव रखने के पक्ष में है। आयोग की सोच है कि पदनाम बदलने से निश्चित रूप से कामकाज के ढंग पर कुछ सकारात्मक असर होगा।
19 December, 2007
चयन में दखल नहीं दे सकती हैं अदालतें
न्यायमूर्ति एके माथुर और न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू की पीठ ने कहा कि आकलन करने के लिए चयन समिति पर भरोसा किया जाना चाहिए और यह अपील करने का विषय नहीं है। न्यायालय ने कहा कि इस तरह का कोई आम नियम या सख्त दिशानिर्देश नहीं हो सकता है जिनका पालन चयन समितियां सालाना गोपनीय रिपोर्ट में अधिकारियों को वरीयता देते वक्त करें।
पीठ ने कहा कि एसीआर का निरीक्षण करने पर समिति इस नतीजे पर पहुंच सकती है कि कोई खास उम्मीदवार अच्छा है या बहुत अच्छा। ऐसे मामलों में अदालतों या न्यायाधिकरण को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
पीठ ने यह व्यवस्था कर्नाटक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दी। इन अधिकारियों ने उन्हें आईएएस संवर्ग देने के लिए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा अपनाई गई चयन प्रक्रिया को चुनौती दी थी। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने इससे पहले चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। न्यायाधिकरण की राय थी कि समिति ने कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए मनमाने तरीके से काम किया।
बहरहाल, यूपीएससी की याचिका पर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने चयन प्रक्रिया को जायज ठहरा दिया था जिसके बाद अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष याचिकाएं दाखिल की थीं।
18 December, 2007
सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल
केंद्रीय कर्मचारियों की जेब भारी करने के साथ-साथ छठा वेतन आयोग उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल करने की सिफारिश पर विचार कर रहा है। श्रम और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ सेवानिवृत्ति आयु में दो साल की बढ़ोतरी करने की राय आयोग के आला अधिकारी को देने की तैयारी में हैं। इस सलाह के पीछे उनकी दलील है कि इस तरह सरकार पेंशन बिल पर पड़ने वाला बोझ कम से कम दो साल के लिए टाल सकती है।
संभावित वेतन वृद्धि की वजह से सरकार पर पड़ने वाले बोझ से निपटने के तरीके तलाशने के तहत ही आयोग सेवानिवृत्ति से जुड़े पहलू पर विचार कर रहा है। इस सिलसिले में हिसाब-किताब लगा रहे विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सेवानिवृत्ति आयु में दो साल की बढ़ोतरी से सरकार को काफी राहत मिल सकती है। ऐसा नहीं करने से सरकार को 'दोहरे आर्थिक बोझ' से दो-चार होना पड़ेगा।
एक ओर आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद वेतन वृद्धि से पड़ने वाला वित्तीय भार तो होगा ही, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन व उससे जुड़े तमाम आर्थिक दावों की लंबी फेहरिस्त भी होगी। वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों के साथ चंद रोज पहले हुई चर्चा में इस मामले का बड़ी गंभीरता से आकलन किया गया। वित्त मंत्रालय मान रहा है कि भविष्य में पेंशन बिल के भुगतान पर होने वाला खर्च वेतन के चलते पड़ने वाले आर्थिक बोझ से किसी तरह कम नहीं होगा। इसके लिए विशेषज्ञ अपने आंकड़े भी वेतन आयोग तक पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि 2007-08 में केंद्रीय कर्मचारियों का पेंशन बिल वेतन बिल से ऊपर निकल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार 2006-07 में पेंशन और उससे जुड़ी अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने पर सरकार को 39,074 करोड़ रुपये का भार पड़ा था। वेतन संबंधी भुगतान से पड़ने वाला बोझ 40,047 करोड़ रुपये का था। अगर इन आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो मौजूदा वित्तीय वर्ष में पेंशन पर होने वाला खर्च निश्चित रूप से केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन के खर्च से आगे निकल जाएगा।
वेतन आयोग को बताया गया है कि रेल कर्मियों के मामले में यह तो हो ही रहा है। अब अगर इन विशेषज्ञों की दलीलें आयोग के गले उतरीं तो 60 साल पूरा करके सेवानिवृत्ति की दहलीज पर खड़े कर्मचारियों को दो साल और सेवाएं देनी होंगी।
04 December, 2007
सरकारी कर्मचारी की अविवाहित पुत्री को जीवनपर्यन्त पेंशन
केन्द्र सरकार के कानून में अभी तक केवल 25 साल की उम्र तक अविवाहित बेटियों के लिये यह प्रावधान था।
एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि अगर वह 25 साल से पहले विवाह कर लेती है तो उसकी पारिवारिक पेंशन बंद हो जायेगी।
लेकिन संचार विभाग के दिवंगत कर्मचारी की 65 वर्षीय अविवाहित कमलजीत कौर के मामले ने सरकार को कानून की समीक्षा करने का मौका दिया। अब कानून यह होगा कि अगर सरकारी कर्मचारी की पुत्री विवाह नहीं करते तो वह जीवनपर्यन्त पेंशन की हकदार होगी।
भाषा
28 November, 2007
नई पेंशन का पैसा बाजार में लगेगा
पहली जनवरी 2004 से लागू इस योजना का करीब 2000 रुपए का कोष इस समय केंद्र सरकार के खाते में पड़ा है जिस पर कर्मचारियों को आठ प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज मिलता है जो बाजार में निवेश पर मिलने वाले संभावित प्रतिफल से कम बताई जा रही है।
नई पेंशन योजना के पैसे को बाजार में निवेश करने की व्यवस्था बनाने और कर्मचारियों के रिकॉर्ड रखने के लिए पीएफआरडीए ने राष्ट्रीय प्रतिभूति डिपाजिटरी लि. (एनएसडीएल) को केंद्रीय अभिलेख संरक्षक एजेंसी (सीआरए) के साथ कल एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
पीएफआरडीए मे अध्यक्ष डी स्वरूप और एनएसडीएल के प्रमुख सीबी भावे ने उम्मीद जताई की सीआरए पहली जून से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के कोष के संबंध में अपना काम शुरू कर सकती है। उन्होंने कहा कि उसके साथ ही उनके पेंशन कोष के निवेश के पूरे प्रबंध कर लिए जाने की उम्मीद है।
16 November, 2007
रिटायर होने की उम्र बढ़ाने की तैयारी में सरकार!
हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों पर यूपीए-लेफ्ट रिश्तों में खटास आती रही है। इनमें भारत-अमेरिका परमाणु करार का मसला भी शामिल रहा है। रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने के तरीके को लागू करने पर अभी कार्मिक और वित्त मंत्रालय में काम चल रहा है। इसकी औपचारिक घोषणा बजट में किए जाने की संभावना है। नवभारत टाइम्स में छ्पी खबर के अनुसार अगर इसे लागू किया गया, तो इसका फायदा सभी सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा। रेलवे और पोस्टल जैसे डिपार्टमेंट के कर्मचारियों के अलावा पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है।