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18 August, 2008

उत्तर प्रदेश में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के 14 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन को छठे केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरुप पुनरीक्षित करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि इसके तहत राज्य के सभी कर्मचारियों को पुनरीक्षित वेतनमानों का लाभ एक जनवरी 2006 से दिया जाएगा। इससे पूर्व उन्होंने यह घोषणा विधानसभा में भी की थी। पुनरीक्षित वेतनमानों के अनुरुप कर्मचारियों को नकद भुगतान 1 दिसम्बर 2008 से किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों और शिक्षकों के पुनरीक्षित वेतनमानों के राज्य सरकार ने भारतीय सेवा के प्रशासनिक अवकाश प्राप्त अधिकारी जगमोहन लाल बजाज की अगुवाई में एक समिति गठित की है। राज्य नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आलोक रंजन और वित्त सचिव बी।एन. दीक्षित इस समिति के सदस्य तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव अजय अग्रवाल सदस्य सचिव होंगे। समिति अपनी रिपोर्ट तीन माह में देगी। इस कदम से राजकोष पर 5179 करोड रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा जिसमें से 3789 करोड रुपए वेतन के मद में तथा 1400 करोड रुपए पेंशन मद में खर्च होगा।

29 June, 2008

वेतन आयोग की सिफारिश जनवरी 2006 की जगह जनवरी 2007 से लागू !?

छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने के लिए बनी कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने सरकारी कर्मचारियों को सालाना चार प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी देने की सिफारिश की है। कर्मचारियों को निराशा पहुंचाने वाली सबसे अहम बात है कि उन्हें एक जनवरी 2006 की जगह एक जनवरी 2007 से एरियर देने की सिफारिश की गई है। नए वेतनमान से निचले स्तर के कर्मचारियों को फायदा हुआ है जबकि संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को नुकसान हुआ है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों पर सभी वर्ग के कर्मचारियों को घोर आपत्ति थी। इन्हीं आपत्तियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की एक समिति का गठन किया था। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी है जिसे संभवत: 29 जून की बैठक के बाद पेश किया जाएगा। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बहुत परिवर्तन नहीं किया लेकिन उन बिंदुओं पर संशोधन कर दिया है जहां आपत्तियां थीं।

एक अहम सुझाव कर्मचारियों के सालाना वेतन वृद्धि को लेकर है। छठे वेतन आयोग ने 2.5 से 3.5 प्रतिशत तक वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की थी। अब समिति ने सभी के लिए कुल वेतन का 4 प्रतिशत बढ़ोतरी की सिफारिश की है। एक और अहम पहलू है वेतन आयोग की सिफारिश 1 जनवरी 2006 की जगह एक जनवरी 2007 से लागू होगी। छठे वेतन आयोग ने कुल 22 वेतनमान और चार पे-बैंड तय किए थे। समिति ने वेतनमानों की संख्या घटाकर 15 कर दी और पे-बैंडों की संख्या बढ़ाकर 10 कर दी। इससे वरिष्ठता और कनिष्ठता का जो बवाल खड़ा हो गया था वह दूर हो जाएगा।

27 June, 2008

सशस्त्र बलों के वेतन प्रस्ताव का ब्लूप्रिंट तैयार

देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने २६ जून को एक उच्चस्तरीय बैठक में सशस्त्र बलों के वेतन संबंधी प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए गहन विचार मंथन किया, जिसे कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। रक्षा सूत्रों ने इस बैठक का ब्यौरा देने से इंकार करते हुए कहा, “बंद कमरे में हुए विचार-विमर्श को वहीं तक सीमित रखने का निर्णय लिया गया है”।

एक रक्षा अधिकारी ने कहा, “बेहतर होगा कि वेतन में संशोधन के मुद्दे पर कोई अटकलें नहीं लगाई जाएं क्योंकि इससे सशस्त्र बलों के हितों पर ही प्रतिकूल असर पड़ेगा”। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के अलावा नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता, वायुसेना अध्यक्ष एयरचीफ मार्शल फली होमी मेजर और सेना उप प्रमुख लेफ्टीनेंट जनरल मिलन नायडू मौजूद थे, क्योंकि सेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर रूस गए हुए हैं। एंटनी ने सैन्य प्रमुखों के साथ यह बैठक ऐसे समय की है जबकि सेना के अफसर छठे वेतन आयोग की नाकाफी सिफारिशों से खफा हैं और सेना छोड़ने वाले अधिकारियों का तांता लगा हुआ है। वेतन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद से बीच की रैंक के 120 से ज्यादा अफसर सेना छोड़ने की अर्जी दे चुके हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है।

निचले रैंक के सैन्य अधिकारी खासतौर से आक्रोश में हैं, क्योंकि दस साल बाद वेतन में संशोधन होने के बावजूद उनकी तनख्वाह 15 प्रतिशत ही बढ़ी है जबकि असैन्य अधिकारियों के वेतन में 40 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई है। दूसरी ओर पूर्व सैनिकों के संगठन ने चेतावनी दी हुई है कि अगर फौजियों के वेतन में संशोधन की मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे देश के 300 जिलों में 6 जुलाई से विरोध प्रदर्शन शुरू कर देंगे।

09 May, 2008

अफसरों को, सेना रास नहीं आ रही

बढ़ते तनाव, प्राइवेट सेक्टर की अपेक्षा बेहद कम तनख्वाह और सुविधाओं के चलते अब अफसरों को सेना रास नहीं आ रही है। इसकी बानगी तब देखने को मिली जब रक्षा मंत्री ऐ.के. एंटनी ने राज्यसभा में सेना छोड़ रहे अधिकारियों का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 से 2007 के बीच कम से कम 2076 आर्मी अधिकारियों ने समय से पहले ही रिटायरमेंट ले लिया। इस दौरान रक्षा सेवा में नौकरी छोड़ने का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है।

वायुसेना में इस दौरान समय से पहले सेवानिवृत्तियों और इस्तीफों की संख्या 793 थी जबकि नौसेना में यह आंकड़ा 780 तक पहुंचा गया। राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ने ये बातें कहीं। उन्होंने बताया कि 2003 से 2007 के बीच 3474 आर्मी अधिकारियों ने समय से पहले रिटायरमेंट या इस्तीफे के लिए आवेदन किया था। इनमें से 2076 अधिकारियों को नौकरी छोड़ने की अनुमति दी गई। जबकि एयरफोर्स में कुल 1269 अधिकारियों ने नौकरी छोड़ने के लिए आवेदन किया था। वहीं, नेवी में नौकरी छोड़ने के इच्छुक अधिकारियों की संख्या 954 थी।

उन्होंने कहा कि रक्षा अधिकारियों ने नौकरी छोड़ने के पीछे कई कारण बताए हैं। बर्खास्तगी, बेहद संवेदनशील आधार, निम्न चिकित्सीय श्रेणी और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में असफल रहने के आधार पर सभी को नौकरी छोड़ने की अनुमति दी गई है। प्राइवेट सेक्टर में उच्च वेतनमान और अधिक सुविधाएं भी सैन्यकर्मियों के नौकरी छोड़ने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। सैन्य बलों में सेवा शर्तों को देखते हुए वेतनमान काफी कम है जबकि बदल रहे सामाजिक परिवेश और टूटते संयुक्त परिवार के कारण जवानों की मूलभूत आवश्यकताओं को लेकर समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में कम आयु में अवकाश प्राप्त करने और पेंशन पर शेष जीवन का गुजारा कठिन हो जाता है।

06 May, 2008

सैन्य बलों के वेतन पर फैसला आज

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से नाराज तीनों सेनाओं के अधिकारियों और जवानों को कुछ राहत मिल सकती है। कैबिनेट सचिव के. एम. चंद्रशेखर ने इस समस्या के समाधान के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार द्वारा वेतन संबंधी समस्याओं के लिए गठित सचिवों की उच्चस्तरीय समिति के सदस्य भी शरीक होंगे और तीनों सेनाओं का पक्ष रखने के लिए नौसेनाध्यक्ष एडमिरल सुरिश मेहता, सेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर और वायुसेनाध्यक्ष फलीएच मेजर भी उपस्थित होंगे।

अमर उजाला के अनुसार, कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में यह बैठक पहले सोमवार, ५ मई को ही होनी थी लेकिन अपरिहार्य कारणों से इसे मंगलवार, ६ मई तक के लिए टाल दिया गया। इस क्रम में तीनों सेनाओं ने पहले ही सैन्य बलों के वेतन, भत्तों और सिविल अधिकारियों की तुलना में सैन्य अधिकारियों के साथ हो रहे भेदभाव से संबंधित शिकायतों को रक्षा मंत्रालय को सौंप दिया है। इसमें अधिकारी वर्ग से नीचे के जवानों के वेतन आदि के साथ न्याय करने, मध्यक्रम के अधिकारियों का स्तर सुधारने और सिविल और सैन्य अधिकारियों के बीच बढ़ रही दूरी कम करने की सिफारिश प्रमुख है। अवकाश प्राप्त करने के बाद सैन्य अधिकारियों और जवानों को मिलने वाली पेंशन और सुविधाओं को दुरुस्त करने की भी अपील की गई है। इसलिए इस बैठक के नतीजों का सैन्य अधिकारियों को भी बेसब्री से इंतजार है।

22 April, 2008

प्रधानमंत्री, उचित वेतनमान के पक्ष में

वेतन आयोग की सिफारिशों पर सरकारी कर्मियों की चिंताओं को दूर करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रशासनिक और रक्षा सेवाओं के लिए उचित वेतनमान का पक्ष लिया। हाल ही में वेतन आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रशासनिक सेवाओं के कुछ वर्गो ने रिपोर्ट की सिफारिशों पर अपनी चिंताएं जाहिर की थी।

लोक सेवा दिवस के मौके पर नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सोमवार, २१ अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि मैं चाहूंगा कि प्रशासनिक और रक्षा सेवाओं को उचित तरीके रिवार्ड मिले। उन्होंने कहा कि मेरा यह भी मानना है कि जब तक हम अपनी जनता के बेहतर हित में कुशलतापूर्वक काम करते रहेंगे, करदाता हममें किसी को भी बेहतर पारिश्रमिक देने में अनिच्छा नहीं दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मियों की शिकायतों को सुनने और उन्हें दूर करने के लिए सरकार द्वारा पहले ही एक प्रणाली शुरू की जा चुकी है।

गौरतलब है कि वेतन आयोग की सिफारिशों की आलोचना को देखते हुए सरकार ने कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय आधिकारिक समिति के गठन की पिछले सप्ताह घोषणा की थी। सिंह ने काम में सुधार के साथ कार्य की शर्तो में सुधार की वकालत करते हुए कहा सरकार अपने सभी कर्मचारियों के कल्याण के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि साथ ही मैं लोक सेवकों से उच्च स्तर के अनुशासन और मर्यादा की अपेक्षा करूंगा।

21 April, 2008

छठे वेतन आयोग द्वारा दिए सुझावों के क्रियान्वयन हेतु, प्रकोष्ठ गठित

छठे वेतन आयोग के सुझावों के क्रियान्वयन के लिए एक प्रकोष्ठ की स्थापना कर दी है। यह प्रकोष्ठ छठे वेतन आयोग की स्वीकार्य सिफारिशों को लागू करने और उसकी प्रक्रिया का जिम्मा संभालेगा। संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में यह प्रकोष्ठ अपना काम एक अप्रैल से लेकर छह महीने की अवधि में पूरा करेगा।

मीडिया में आयी जानकारी के अनुसार आधा दर्जन सदस्यों यह इकाई, व्यय विभाग में बनायी जाएगी। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कार्यान्वयन प्रकोष्ठ की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। खबरों पर भरोसा किया जाए तो प्रकोष्ठ की स्थापना के जरिये सरकार यह संदेश देने की कोशिश में है कि उसकी दिलचस्पी वेतन अयोग की 'संशोधित' सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू करने में है। न कि राजनैतिक फायदे के लिए इसे चुनावों तक टालने में।

पिछले हफ्ते एक दर्जन सचिवों की समिति गठित करने के कैबिनेट के फैसले को कर्मचारी और अधिकारी मान रहे थे कि समिति का रास्ता सरकार ने सिफारिशों पर उठे बवंडर से फौरी तौर पर बचने के लिए अपनाया था। आईपीएस एसोसिएशन ने तो साफ कह दिया था कि इस तरह की समिति किसी सकारात्मक नतीजे पर नहीं पहुंचती है। कर्मचारियों की शिकायतें जस की तस बनी रह जाती हैं। अब कार्यान्वयन प्रकोष्ठ स्थापित कर सरकार यही शंका दूर करने की कोशिश में है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि प्रकोष्ठ को अपना काम पूरा करने के लिए भले ही छह महीने का समय दिया गया हो लेकिन वह संशोधित रिपोर्ट मिलते ही इसे जल्द से जल्द से निपटाने में जुटेगा।

एक अधिकारी के अनुसार वेतन आयोग की रिपोर्ट की विसंगतिया दूर करने में ही अभी लंबी चौड़ी कवायद होनी है। अमल करने की बात तो अभी कोसों दूर है। गौरतलब है कि आईपीएस, आईएफएस, आईआईएस और सेना के अधिकारियों ने पहले कह दिया है कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली प्रोसेसिंग समिति को उनकी हर दलील सुननी पड़ेगी।

12 April, 2008

वेतन आयोग सिफारिशों की छानबीन

कर्मचारियों के एक वर्ग के असंतोष को देखते हुए सरकार ने आज छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की छानबीन के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की एक समिति गठित करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में समिति के गठन को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट सचिव के।एम. चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली सचिवों की अधिकार संपन्न समिति छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की छानबीन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी, जिसके बाद मंत्रिमंडल अंतिम निर्णय लेगा। न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण की अध्यक्षता वाले छठे वेतन आयोग ने गत 24 मार्च को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

सचिवों की समिति तय करेगी कि वेतन आयोग की सिफारिशों को किस तरह लागू किया जाए। समिति आयोग की सिफारिशों की पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी जिसके बाद मामला फिर मंत्रिमंडल के समक्ष आएगा। सरकार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू करना चाहेगी।

09 April, 2008

वेतन आयोग की मार, अब बच्चों की शिक्षा पर

छठे वेतन आयोग की सिफारिशें आपकी जेब पर भारी पड़ने वाली हैं। टीचर्स की बढ़ी सैलरी का बोझ अपने ऊपर से हटाने के लिए पब्लिक स्कूलों की फीस काफी ज्यादा बढ़ रही है। यह बढ़ोतरी सिर्फ ट्यूशन फी में ही नहीं, बल्कि डेवेलपमेंट, मेंटिनेंस व ट्रांसपोटेर्शन में भी होगी।

फेडरेशन ऑफ पब्लिक स्कूल के चेयरमैन आर. पी. मलिक का कहना है कि जितनी लोगों की तनख्वाह बढ़ेगी, उसी हिसाब से महंगाई भी बढ़ेगी और इसका असर स्कूल, शिक्षकों और पालकों पर भी पड़ेगा। उनका कहना है कि इस बार छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हो रही हैं, इसलिए सभी स्कूलों ने छात्रों की फीस 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला किया है।

कुछ स्कूलों ने 40 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है। बाकी बढ़ाने वाले हैं। वैसे भी हर साल स्कूलों में 8 से 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ती है। इस बार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक सैलरी पैकेज काफी बढ़ाना पड़ेगा। ऐसे में बढ़े हुए खर्चों को निकालने के लिए बच्चों की फीस बढ़ानी पड़ेगी। बढ़ोतरी कितने प्रतिशत होगी इस बारे में स्केल का पता लग जाए तभी कुछ कहा जा सकता है।

डीपीएस, आर के पुरम की प्रिंसिपल श्यामा चोना कहती हैं कि वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक तनख्वाह बढेगी , तो फीस बढ़ेगी ही। मगर अभी हमारे पास इस संबंध में सीधी कोई सूचना नहीं आई है, इसलिए अभी कुछ कह नहीं सकते हैं, मगर फर्क तो जरूर पड़ेगा।

डॉन बॉस्को पब्लिक स्कूल, अलकनंदा में ग्यारहवीं में पढ़ने वाले एक स्टूडेंट की मां का कहना था कि इस बार तीन महीने की फीस और दो माह का ट्रांसपोर्टेशन चार्ज मिलाकर उन्हें 10 हजार रुपये स्कूल में जमा कराने पड़े हैं, जबकि इससे पहले तक ग्यारहवीं क्लास के बच्चों को आठ हजार रुपये भुगतान करना पड़ता था। एक पब्लिक स्कूल में प्री प्राइमरी में पढ़ रही एक स्टूडेंट के पिता के अनुसार, उन्हें इस बार तीन महीने के लिए 3990 रुपये और ट्रांसपोर्टेशन के 600 रुपये जमा कराने पड़े हैं, जबकि पिछले सेशन में इस क्लास की फीस इतनी नहीं थी।

04 April, 2008

सेना की नाराजगी, वेतन आयोग के लिए

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से नाखुश तीनों सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारियों ने शुक्रवार, ४ अप्रैल को आयोग के सदस्यों के समक्ष खुल कर अपनी भड़ास निकाली। आयोग के सदस्यों ने उन्हें यह कह कर शांत करने की कोशिश की कि भले रेलवे को छोड़ कुल केंद्रीय कर्मचारियों में सशस्त्र बलों के 40 फीसदी कर्मचारी हों पर उन पर खर्च 61 फीसदी किया जाएगा।

रक्षा मंत्री एके एंटनी द्वारा बुलाई गई इस बैठक में वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर व थलसेना के डिप्टी चीफ समेत तमाम अधिकारियों का कहना था कि सैन्य अधिकारियों को सिविल व पुलिस अधिकारियों के मुकाबले कम करके आंका गया है जबकि इनका कार्य ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। इसके अलावा कम अधिकारी ही ऊंचे स्तर पर पहुंच पाते हैं। इसके जवाब में आयोग का कहना था कि उन्होंने रैंक वेतन में ऐसी व्यवस्था की है कि पदोन्नत न होने के बावजूद वेतन बढ़ता रहे। इसके अलावा निचले स्तर पर सैनिकों को एक समय के बाद अ‌र्द्धसैनिक बलों में भेजने की भी सिफारिश की है। आयोग का कहना था कि अगर अलग-अलग सेवाएं समान पदों को लेकर इस तरह से तुलना करेंगी तो दिक्कत खड़ी हो जाएगी।

आयोग के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने पहली हार मिलिट्री सर्विस पे को मंजूरी दी है। इसे न केवल वेतन का भाग माना जाएगा बल्कि पेंशन तय करते हुए भी इसे आधार बनाया जाएगा। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि सैनिकों के लिए यह कम से कम तीन हजार किया जाना चाहिए। आयोग ने सैनिकों के लिए एक हजार तो अधिकारियों के लिए छह हजार रुपये मिलिट्री सर्विस पे तय की है।

एंटनी ने बैठक में कहा कि आयोग के सदस्यों व सैन्य अधिकारियों के आमने-सामने अपनी बात रखने से अब स्थिति साफ हो रही है। अब आयोग की सिफारिशों में सुधार को लेकर जो संशोधन भेजे जाने हैं वह रक्षा मंत्रालय तैयार करके वित्त मंत्रालय के पास भेज देगा। माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय आयोग की सिफारिशों में कुछ सुधारों को स्वीकार कर सकता है।

02 April, 2008

छठवें वेतन आयोग से वन सेवा के अधिकारी नाराज

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से खफा भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अफसरों का कहना है कि आयोग ने उनका पे स्केल घटा दिया है। आईएएस और आईएफएस अफसरों के वेतन में अब तक सिर्फ 2-3 हजार रुपये का फर्क होता था लेकिन नए स्केल लागू होने के बाद यह गैप 15-18 हजार तक बढ़ जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि वनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इस सेवा केअफसरों को हतोत्साहित किए जाने के नकारात्मक परिणाम निकल सकते हैं।

आईएफएस एसोसिएशन के महासचिव एस.के. चड़ढा ने बताया कि 18-20 साल की सेवा पूरी कर आईएफएस अफसर वन संरक्षक बनता है। इस पद का सुपरटाइम स्केल अभी 16400 से शुरू होता है। लेकिन आयोग ने इस स्केल को घटाकर 15600 करने की सिफारिश की है। जबकि 14 साल की सेवा पूरी करने के बाद आईएएस अधिकारी का सुपरटाइम स्केल अभी 18400 है जिसे बढ़ाकर 39200 रुपये करने की सिफारिश की गई है। इससे दोनों सेवाओं के अफसरों के वेतन स्केल में दोगुने से भी ज्यादा का अन्तर हो गया है।

इसी तरह प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फारेस्ट (पीसीसीएफ) का मौजूदा स्केल 24050-26000 है। इस पद पर आईएफएस अफसर अपने कार्यकाल के अंतिम चार-पांच सालों में पहुंचते हैं। 2-3 साल की सेवा के बाद अफसर 26 हजार रुपये के स्केल तक पहुंच जाते हैं जो अभी भारत सरकार के सचिव के बराबर का स्केल है। लेकिन नई सिफारिशों में इस स्केल को बढ़ाकर 39200-67000 में रखा गया है तथा १३००० के पे ग्रेड का प्रावधान किया गया है। लेकिन 13 हजार के पे ग्रेड को पाने में अफसरों को कम से कम 12 साल इस पद पर कार्य करना होगा। जबकि जो अफसर इस पद पर पहुंचते हैं उनकी सर्विस के सिर्फ 4-5 साल ही बचे होते हैं। इसका परिणाम यह होगा कि इस सेवा के अफसर भविष्य में सचिवों की भांति 80 हजार रुपये तक का वेतनमान नहीं हासिल कर पाएंगे। जबकि अभी वे इस पद पर आने के बाद 3 साल के भीतर सचिव के बराबर वेतन पाने में सफल रहते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि छठे वेतन आयोग ने सिर्फ आईएएस अफसरों का ध्यान रखा है।

30 March, 2008

डॉक्टर और वेतन आयोग

चर्चा गरम है कि डाक्टर प्राइवेट नौकरी की तरफ भाग सकते हैं। छठवें वेतन आयोग की सिफारिश में यह 'मामूली' वेतन वृद्धि सरकारी डाक्टरों को बांध नहीं सकेगी। अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा अस्पतालों और मरीजों की बेतहाशा भीड़ का। एक भुक्तभोगी हैं, जिन्हें किडनी का आपरेशन कराने की तारीख छह महीने से नहीं मिल रही। डॉक्टरों की कमी की वजह से एक सर्जन को इतने अधिक आपरेशन करने होते हैं कि वह चाहते हुए भी जल्दी तारीख नहीं दे सकता। बड़े अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टरों की संख्या आवश्यकता से 25-30 प्रतिशत कम है। कहां हैं डाक्टर?

नवीन गौतम लिखते हैं कि अस्पताल प्रशासकों के मुताबिक मोटी तनख्वाह के बदले कुछ बड़े निजी अस्पताल चले गए, कुछ विदेश निकल गए और कुछ ने अपने नर्सिग होम खोल लिए। सऊदी अरब में एक भारतीय डाक्टर को कम से कम एक लाख रुपये महीना करमुक्त वेतन मिलता है। सरकारी संस्थानों में बीस-बीस साल नौकरी कर चुके पुराने डाक्टर जब नए खून को पैसे में लोटते देखते हैं, तो वे भी बाहर जाने की जुगत लगाते हैं। डाक्टरों के विदेश जाने की प्रवृत्ति का एक अच्छा उदाहरण एम्स है, जहां कुल 42 बैच से निकले 2129 छात्रों में 780 को विदेश बेहतर लगा। जब सरकार बाजार का मुकाबला नहीं कर सकती हैं, तो फिर वेतन की तुलना क्यों की जाती है?

सरकार एक मेडिकल छात्र पर औसतन 25 लाख रुपये खर्च करती है। देश में हर साल लगभग 20 हजार एमबीबीएस और इसके करीब आधे स्नातकोत्तर स्तर के डाक्टर तैयार होते हैं। निजी संस्थानों में एक छात्र को दो से पांच लाख रुपये प्रति वर्ष फीस देनी पड़ती है, जबकि एम्स में 1500 रुपये और मौलाना आजाद जैसे संस्थानों में विभिन्न मदों में प्रति वर्ष 3,670 रुपये शुल्क देने पड़ते हैं। बाकी खर्च सरकार वहन करती है।

28 March, 2008

छठे वेतन आयोग से सेना नाख़ुश!

भारतीय सेना की तरफ से छठें वेतन आयोग में वेतन बढ़ाने को लेकर सुगबुगाहटें तेज़ हो गई हो गई हैं। सेना के तीनों अंगों का मानना है कि वेतन आयोग ने उनके लिए जितना वेतन बढ़ाने की सिफ़ारिश की है, वो नाकाफी है। इसी सिलसिले में सैन्य बलों के तीनों प्रमुखों ने रक्षा मंत्री एके एंटनी से मुलाक़ात की है।

माना जा रहा है कि सैन्य बलों के तीनों प्रमुखों ने रक्षा मंत्री एके एंटनी से कहा है कि ऐसी सिफारिशों से सेना में अफ़सरों की कमी दूर नहीं होगी और इस बढ़ोत्तरी के अलावा 40 से 60 प्रतिशत की और बढ़ोत्तरी की जानी चाहिए.
सैन्य प्रमुखों ने कहा है कि सेना में अफ़सरों की संख्या में कमी को देखते हुए यह बढोत्तरी ज़रूरी है.

इंडियन डिफ़ेंस रिव्यु के संपादक कैप्टन भरत वर्मा का मानना है कि वेतन आयोग में बैठे लोग सेना की ज़रूरतों को नहीं समझते हैं, तभी सेना की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकी हैं। वे कहते हैं, "एक अजीब सी बात है कि डिफ़ेंस का कोई भी व्यक्ति छठें वेतन आयोग में नहीं है। पता नहीं वहाँ बैठे लोग सेना के लोगों की तन्ख्वाहें कैसे तय कर रहे हैं." भरत वर्मा कहते हैं कि वेतन आयोग की सिफारिशों से मध्य श्रेणी के अफ़सरों और जवानों के मुकाबले ऊंचे ओहदे पर बैठे सैन्य अफ़सरों को ज़्यादा फ़ायदा होगा।

वेतन आयोग की रिपोर्ट में जहां सेना के जवान के विशेष सेना सेवा वेतन में 1000 रुपए प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी की गई है वहीं अधिकारियों के विशेष सेना सेवा वेतन में 6000 रुपए प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी की गई है। रिटायर्ड मेजर जनरल योगेश्वर बहल कहते हैं, "यह कोशिश की गई है कि ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों को खुश कर दिया जाए. सेना में क़रीब 11000- 12000 अफ़सरों की कमी है. लेफ्टिनेंट कर्नल और कर्नल को मुश्किल से चार या पांच हज़ार रुपए ज्यादा मिलेंगे. पिछले कुछ दिनों से जब से छठें वेतन आयोग के बारे में खबरें आ रही थी, कई सैन्य अधिकारी जो सेना छोड़ना चाहते थे, वे रुके हुए थे, लेकिन अब आयोग की रिपोर्ट के बाद उनमें रोष है."

भरत वर्मा तो यह तक कहते हैं कि इस वेतन आयोग में सेना छोड़ने वाले जवानों के करियर की तरफ ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। यानी सेना को सरकार से उम्मीदें बहुत हैं। सेवानिवृत्त अधिकारियों का कहना है कि अगर ये उम्मीदें पूरी न हुईं, तो भविष्य में देश के लिए कुर्बानी देने और तकलीफें झेलने के लिए तैयार लोगों को ढूंढने में हमें और मुश्किलें का सामना करना पड़ेगा.

साभार: बीबीसीहिंदी.कॉम

24 March, 2008

छठे वेतन आयोग ने क्या- क्या दिया?

छठे वेतन आयोग ने केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के लिए नए वेतनमानों की सिफारिश करते हुए न्यूनतम वेतनमान 6,660 रुपए और अधिकतम 80,000 रुपए मासिक तय किया है। न्यायमूर्ति बी. एन. श्रीकृष्ण की अध्यक्षता वाले छठे वेतन आयोग ने नए वेतनमानों को 1 जनवरी 2006 से लागू करने की सिफारिश अपनी रिपोर्ट में दी है।

रिपोर्ट के अन्य अहम बिंदु इस प्रकार हैं-

1. केन्द्र सरकार के अधिकारियों में सचिव और केबिनेट सचिव को अलग-अलग वेतनमान दिए गए हैं। केबिनेट सचिव के लिए 90,000 रुपए मासिक (निर्धारित) वेतन तय किया गया है।
2. रिपोर्ट में कहा गया है कि ए-1 श्रेणी के शहरों के लिए आवास भत्ता मौजूदा दर 30 प्रतिशत पर ही रहेगा। लेकिन ए, बी-1 और बी-2 श्रेणी के शहरों में यह भत्ता बढ़ाकर 20 प्रतिशत तथा सी श्रेणी तथा अन्य शहर जो किसी श्रेणी में नहीं आते उनके लिए आवास भत्ता 10 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है।
3. रिपोर्ट के मुताबिक छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक नए वेतनमान लागू करने से 2008-09 में सरकार पर 12,561 करोड़ रुपए का बोझ आएगा।
4। आयोग ने कहा है कि यदि उसके द्वारा सुझाए गए उपायों को लागू किया गया, तो 4586 करोड़ रुपए की बचत होगी और सरकार पर 7,975 करोड़ रुपए का ही बोझ पड़ेगा। आयोग के अनुसार ‘अरियर्स’ के
भुगतान पर 18,060 करोड़ रुपए की एकबारगी अदायगी का अतिरिक्त बोझ सरकार को उठाना पड़ेगा।
5. रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा सेवाओं के लिए भी नागरिक सेवाओं के वेतनमानों के समान ही ग्रेड मान्य होंगे, लेकिन सेनाओं में ब्रिगेडियर की रैंक तक सभी अधिकारियों को 6,000 रुपए और नर्सिंग सेवाओं के अधिकारियों को 4,200 रुपए तथा अधिकारियों से नीचे की सभी रैंक के कर्मियों को 1000 रुपए प्रतिमाह अलग से सैन्य सेवा वेतन के रुप में दिए जाएंगे।
6. आवास और महंगाई भत्ते जैसे दूसरे भत्तों की गणना में सैन्य सेवा वेतन शामिल होगा, लेकिन सालाना वेतन वृद्धि में यह शामिल नहीं होगा।
7. सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा के महानिदेशक को सर्वोच्च वेतनमान 80,000 रुपए (निर्धारित) में रखा गया है।
8. रक्षा सेनाओं में अधिकारी से नीचे के रैंक के लिए केवल दो ट्रेड समूह रखे गए हैं। इससे पहले के वाई और जेड ट्रेड समूह को मिला दिया गया है। एक्स समूह में आने वाले ट्रेड समूह के कर्मचारियों को 1400 रुपए महीने का अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा।
9. पेंशन का भुगतान अंतिम पूर्ण वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर किया जाएगा और इसमें पूर्ण पेंशन भुगतान के लिए 33 साल की नौकरी की शर्त भी नहीं होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 से 20 साल की सेवा के बाद नौकरी छोड़ने वालों को उदार सेवानिवृति पैकेज दिया जाएगा।
10. सेवानिवृत्ति के बाद 80 वर्ष, 85 वर्ष, 90, 95 और 100 साल की उम्र तक पहुंचने वाले पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को अधिक दर पर पेशन दी जाएगी।
11. एकमुश्त पेंशन लेने के लिए नए सिरे से निर्धारण करने की भी सिफारिश रिपोर्ट में की गई है।
12. किसी सरकारी कर्मचारी की नौकरी पर रहते अचानक किसी घटना में मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार को 10 साल की अवधि के लिए बढ़ी दर पर पेंशन का भुगतान किया जाएगा।
13. केन्द्रीय कर्मचारियों के वेतनमान ग्रेड भी 35 से घटाकर 20 कर दिए गए हैं। इन 20 ग्रेडों को चार अलग अलग वेतन बैंड पीबी-1, पीबी-2,पीबी-3 और पीबी-4 में बांटा गया हैं। वेतन बैंड के साथ पद के हिसाब से अलग-अलग ग्रेड वेतन भी रखी गई है। इससे ऊपर शीर्ष वेतनमान सचिव के लिए और इससे भी ऊपर एक अलग वेतनमान केबिनेट सचिव के लिए रखा गया है।
14. इस तरह नए वेतनमान के हिसाब से सरकारी नौकरी में सबसे निचले पद पर भर्ती के समय पीबी-1 के लिए 4,860 रुप का बैंक वेतन और 1800 रुपए की ग्रेड वेतन सहित कुल वेतनमान 6,660 रुपए होगा।
15. इसके ऊपर महंगाई और आवास भत्ता अलग से देय होगा और सालाना वेतनवृद्धि भी इसी वेतनमान के हिसाब से तय की जाएगी। वेतन बैंड और उसके साथ लागू वेतन ग्रेड को मिलाकर उसका ढ़ाई प्रतिशत सालाना वेतनवृद्धि के रुप में लिया जाएगा।
16. रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी मामलों में सालाना वेतनवृद्धि का समय एक जुलाई होगा। किसी भी स्केल में छह महीने अथवा इससे अधिक रहने वाले कर्मचारी एक जुलाई को सालाना वेतनवृद्धि के योग्य होंगे।
17. किसी भी श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति होने पर उसी वेतन बैंड में नए पद के हिसाब से ग्रेड वेतन बदल जाएगी।

05 February, 2008

दिख सकती है वेतन बढ़ने की झलक

इस माह के अंत में पेश होने वाले बजट में केंद्रीय कर्मचारियों की पगार में बढ़ोतरी को लेकर अहम संकेत मिल सकते हैं। मार्च-अप्रैल में सौंपी जाने वाली आयोग की सिफारिशों में कर्मियों की वेतन वृद्धि की संभावना के मद्देनजर वित्त मंत्री चिदंबरम अपने बजट भाषण में उनके लिए आर्थिक प्रावधान की घोषणा कर सकते हैं। आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे लाखों कर्मियों की निगाहें वित्तमंत्री के बजट भाषण पर टिकी रहेंगी। बजट दस्तावेजों में दबी इन जानकारियों से केंद्रीय सेवाओं में लगे करीब 33 लाख कर्मचारियों की वेतन वृद्धि को लेकर अनुमान लगाया जा सकेगा।

दैनिक जागरण की खबर है कि वित्त वर्ष के लिए तैयार किए जा रहे बजट में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आर्थिक प्रावधान को भी शुमार किया जाना तय है। इसके लिए वित्तमंत्री ने तमाम संबद्ध अधिकारियों, जिनमें श्रम मंत्रालय व योजना आयोग के आला अधिकारी शामिल हैं, के साथ पिछले दिनों कई दौर की बैठकें भी की हैं। इन बैठकों के दौरान हासिल हुई जानकारियों के आधार पर वित्तीय प्रावधान को अंतिम रूप देने में वित्त मंत्रालय के अधिकारी जुट गए हैं।

भले ही छठे वेतन आयोग का पिटारा मार्च-अप्रैल में खुलने वाला हो लेकिन कर्मचारियों को अपनी तनख्वाह में बढ़ोतरी के संकेत बजट में ही मिल जाएंगे, बल्कि बजट दस्तावेज में दर्शाए गए प्रावधान से वेतन वृद्धि के अनुपात का अंदाजा लगाने में भी सहूलियत होगी। इस बीच श्रम मंत्रालय में वेतन अयोग की सिफारिशों को लेकर कयास का बाजार भी गरम है। चर्चा यह चल पड़ी है कि वेतन आयोग अब अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द दे सकता है। माना जा रहा है कि आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दे चुका है। केवल उसे सरकार को सौंपने की औपचारिकता पूरी करनी बाकी है।