08 July, 2008

सरकारी कर्मचारियों को काफ़ी ज़्यादा तनख्वाह दी जाती है!?

भारत भी उन देशों में है , जो अपने सरकारी कर्मचारियों को ऊंची तनख्वाह देता है। पिछले दशकों में यहां सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाहें काफ़ी ज़्यादा बढ़ी हैं। यहां तक कि बांग्लादेश में भी सरकारी कर्मचारियों का वेतन ज़्यादा है। कई विकासशील देशों में सरकारी कर्मचारियों को काफ़ी ज़्यादा तनख्वाह दी जाती है और इससे इन देशों में आर्थिक विकास की रफ़्तार पर बुरा असर पड़ रहा है। Asian Development Bank (एडीबी) की अध्ययन रिपोर्ट से यह बात सामने आई है।

एशिया , अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका के 19 देशों में किए गए अध्ययन के बाद एडीबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है , ' जिस देश में सरकारी तनख्वाह जितनी ज़्यादा है , उस देश की विकास दर उतनी ही कम है। ' हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक कर्मचारियों की संख्या ज़्यादा होने से विकास दर पर बुरा असर नहीं पड़ता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वियतनाम में भी सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह में काफ़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और लंबे वक्त में यह देश के लिए घातक है।

05 July, 2008

दस कर्मियों वाले उद्योग भी ईपीएफ दायरे में

सरकार ने 10 या इससे अधिक कर्मियों वाले उद्योगों को कर्मचारी भविष्य निधि (Employee Provident Fund) के दायरे में लाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जबकि पहले यह सीमा 20 या इससे अधिक कर्मचारियों की थी। हालांकि, चालू वित्त वर्ष के लिए EPF समूह कोष की ब्याज दरों में संशोधन का निर्णय अगली बैठक तक के लिए टाल दिया गया। केंद्रीय श्रम मंत्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय भविष्य निधि फंड बोर्ड के सदस्यों की उच्च स्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि 10 या इससे अधिक कर्मचारी वाले उद्योग अब ईपीएफ में योगदान करेंगे।

उद्योगों के लिए तय सीमा में संशोधन किया गया है और अब 10 या इससे अधिक कर्मियों वाले उद्योगों को ईपीएफ राशि काटनी पड़ेगी। फिलहाल 20 या इससे अधिक कर्मियों वाले उद्योगों को ईपीएफ के दायरे में लाया जाता है।

04 July, 2008

इंतजार की घडियाँ समाप्त: लागू होंगी वेतन आयोग की सिफारिशें

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की समिति (Committee of Secretaries) ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट का जायजा लेने के बाद रिपोर्ट को कैबिनेट की अगली बैठक में छठे वेतन आयोग को लागू करने का प्रस्ताव पेश किया जाएगा। संभवता इसे अमल में लाने का निर्णय ले लिया जाएगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी के अनुसार कैबिनेट की अगली बैठक में वेतन आयोग की सिफारिशों को पेश किया जाएगा। Committee of Secretaries ने पिछले हफ्ते ही अपनी रिपोर्ट तैयार कर थी लेकिन केंद्र सरकार जानबूझ कर देरी कर रही थी। Committee of Secretaries ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की विसंगतियों को दूर करते हुए रक्षा, पैरा मिलिटरी फोर्स और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वेतन में 15 प्रतिशत वृद्धि करने, सरकारी कर्मचारियों को वार्षिक 4 प्रतिशत का इन्क्रीमेंट देने तथा एरियर एक जुलाई 2007 से देने की सिफारिश की है। छठे वेतन आयोग ने एक जनवरी 2006 से एरियर देने की सिफारिश की है। छठे वेतन आयोग ने 2.5 से 3.5 प्रतिशत तक वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की थी। छठे वेतन आयोग ने कुल 22 वेतनमान और चार पे-बैंड तय किये थे। इस कमेटी ने वेतनमानों की संख्या घटाकर 15 कर दी और पे-बैंडों की संख्या बढ़ाकर 10 कर दी।

The Pay Revision Committee has suggested an additional pay of 15 per cent for the armed and paramilitary forces, over and above the revised basic pay scales ...

The lowest pay scale (1-S) recommended by the SPC was 4440-7440 1300. The corresponding pay scale (PB-1) suggested by the committee is 5,500-16,500 with grade pay of Rs 2,500. The basic pay works out to be Rs 8,000 and with the inclusion of annual increment (4 pc), dearness allowance (15 pc) and the 15 per cent additional pay, the lowest gross pay works out to be Rs 10,816.

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02 July, 2008

सरकारी कर्मचारियों के लिए PAN नंबर जरूरी नहीं

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार में होने वाले लेन-देन के लिए परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के दायरे से निवेशकों की कुछ श्रेणियों को बाहर रखने का निर्देश दिया है। इनमें केंद्रीय और राज्य सरकारों के कर्मचारियों तथा अदालत द्वारा नियुक्त लोग शामिल हैं।

इससे पहले पिछले वर्ष सेबी ने सभी निवेशकों के लिए PAN अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद बाजार नियामक संस्था को निवेशकों की विभिन्न श्रेणियों से अनिवार्य रूप से PAN प्रस्तुत करने से छूट देने के लिए अनुरोध पत्र मिले थे।

29 June, 2008

हड़ताल के दिन में बदलाव का आग्रह ठुकराया

वामदलों ने 20 अगस्त को केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रस्तावित राष्ट्रीय हड़ताल के दिन में परिवर्तन करने के कांग्रेस के आग्रह को ठुकरा दिया है। कांग्रेस चाहती है कि वाम दल राजीव गांधी के 64 वें जन्मदिवस के दिन देशव्यापी हड़ताल को टाल दें। वामदलों के सूत्रों के अनुसार विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी से आग्रह किया था कि हड़ताल का कोई अन्य दिन निश्चित करने का प्रयास करें।

सूत्रों के अनुसार येचुरी ने विदेश मंत्री के संदेश को पार्टी से जुड़े सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) के नेताओं तक पहुंचा दिया था, लेकिन सीटू नेताओं ने इस आग्रह को ठुकरा दिया। सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष तपन सेन ने ऐसे भी औपचारिक आग्रह से इंकार करते हुए कहा कि उनकोइस बारे में अन्य सूत्रों से ही पता चला है। सभी श्रम कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग को लेकर सात श्रम संगठनों ने इस हड़ताल का आयोजन किया है। श्रम संगठनों की मांग है कि न्यूनतम मजदूरी, काम के घंटों, सामाजिक सुरक्षा और उत्पीड़न से संबधित कानूनों को कड़ाई से लागू किया जाए। कांग्रेस कार्यकर्ता पूरे देश में 20 अगस्त को 'सद्भावना दिवस' के रूप में मनाते हैं।

वेतन आयोग की सिफारिश जनवरी 2006 की जगह जनवरी 2007 से लागू !?

छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने के लिए बनी कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने सरकारी कर्मचारियों को सालाना चार प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी देने की सिफारिश की है। कर्मचारियों को निराशा पहुंचाने वाली सबसे अहम बात है कि उन्हें एक जनवरी 2006 की जगह एक जनवरी 2007 से एरियर देने की सिफारिश की गई है। नए वेतनमान से निचले स्तर के कर्मचारियों को फायदा हुआ है जबकि संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को नुकसान हुआ है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों पर सभी वर्ग के कर्मचारियों को घोर आपत्ति थी। इन्हीं आपत्तियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की एक समिति का गठन किया था। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी है जिसे संभवत: 29 जून की बैठक के बाद पेश किया जाएगा। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बहुत परिवर्तन नहीं किया लेकिन उन बिंदुओं पर संशोधन कर दिया है जहां आपत्तियां थीं।

एक अहम सुझाव कर्मचारियों के सालाना वेतन वृद्धि को लेकर है। छठे वेतन आयोग ने 2.5 से 3.5 प्रतिशत तक वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की थी। अब समिति ने सभी के लिए कुल वेतन का 4 प्रतिशत बढ़ोतरी की सिफारिश की है। एक और अहम पहलू है वेतन आयोग की सिफारिश 1 जनवरी 2006 की जगह एक जनवरी 2007 से लागू होगी। छठे वेतन आयोग ने कुल 22 वेतनमान और चार पे-बैंड तय किए थे। समिति ने वेतनमानों की संख्या घटाकर 15 कर दी और पे-बैंडों की संख्या बढ़ाकर 10 कर दी। इससे वरिष्ठता और कनिष्ठता का जो बवाल खड़ा हो गया था वह दूर हो जाएगा।

27 June, 2008

सशस्त्र बलों के वेतन प्रस्ताव का ब्लूप्रिंट तैयार

देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने २६ जून को एक उच्चस्तरीय बैठक में सशस्त्र बलों के वेतन संबंधी प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए गहन विचार मंथन किया, जिसे कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। रक्षा सूत्रों ने इस बैठक का ब्यौरा देने से इंकार करते हुए कहा, “बंद कमरे में हुए विचार-विमर्श को वहीं तक सीमित रखने का निर्णय लिया गया है”।

एक रक्षा अधिकारी ने कहा, “बेहतर होगा कि वेतन में संशोधन के मुद्दे पर कोई अटकलें नहीं लगाई जाएं क्योंकि इससे सशस्त्र बलों के हितों पर ही प्रतिकूल असर पड़ेगा”। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के अलावा नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता, वायुसेना अध्यक्ष एयरचीफ मार्शल फली होमी मेजर और सेना उप प्रमुख लेफ्टीनेंट जनरल मिलन नायडू मौजूद थे, क्योंकि सेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर रूस गए हुए हैं। एंटनी ने सैन्य प्रमुखों के साथ यह बैठक ऐसे समय की है जबकि सेना के अफसर छठे वेतन आयोग की नाकाफी सिफारिशों से खफा हैं और सेना छोड़ने वाले अधिकारियों का तांता लगा हुआ है। वेतन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद से बीच की रैंक के 120 से ज्यादा अफसर सेना छोड़ने की अर्जी दे चुके हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है।

निचले रैंक के सैन्य अधिकारी खासतौर से आक्रोश में हैं, क्योंकि दस साल बाद वेतन में संशोधन होने के बावजूद उनकी तनख्वाह 15 प्रतिशत ही बढ़ी है जबकि असैन्य अधिकारियों के वेतन में 40 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई है। दूसरी ओर पूर्व सैनिकों के संगठन ने चेतावनी दी हुई है कि अगर फौजियों के वेतन में संशोधन की मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे देश के 300 जिलों में 6 जुलाई से विरोध प्रदर्शन शुरू कर देंगे।